{"_id":"5a2067094f1c1baf678bf170","slug":"71512072969-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्मॉग व धुंध के लिए तैयार नहीं रोडवेज लारी, खुद के रिस्क पर सफर करेंगे दैनिक सवारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्मॉग व धुंध के लिए तैयार नहीं रोडवेज लारी, खुद के रिस्क पर सफर करेंगे दैनिक सवारी
Updated Fri, 01 Dec 2017 01:46 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
रोडवेज की लारी में सफर करने वाले दैनिक यात्री खुद के रिस्क पर ही सवारी कर रहे हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि झज्जर डिपो की रोडवेज बसों में धुंध व स्मॉग से निपटने के लिए फॉग लाइटें नहीं हैं। धुंध का सीजन शुरू होते ही विभाग के निदेशालय के द्वारा ऐसा करने के आदेश जारी कर दिए जाते हैं। इसके बावजूद अभी तक फॉग से निपटने के लिए विभाग के अधिकारियों के द्वारा लाइटें नहीं लगवाई गई हैं। चार दिन स्मॉग के दौरान हुए हादसों से भी विभाग ने सबक नहीं लिया। दैनिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने वाली रोडवेज बसें यात्रा के लिए कितनी सुरक्षित हैं, यह जानने के लिए अमर उजाला टीम ने बस स्टैंड का दौरा किया। इस दौरान बसों के फर्स्ट एड बॉक्स में जो चीजें निकल आई वो चौंकाने वाली हैं।
फर्स्ट एड बॉक्स में दवाई की जगह मिले बीड़ी के बंडल
रोडवेज विभाग के द्वारा हर बस में फर्स्ट एड बॉक्स लगवाया जाता है। इससे इमरजेंसी के दौरान यात्रियों को फर्स्ट एड की सुविधा मुहैया करवाई जा सके। इस फर्स्ट एड बॉक्स को जब अमर उजाला टीम ने चेक किया तो पाया कि उसमें दवाई तो नहीं थे लेकिन बीड़ी के बंडल व डिस्पोजल ग्लास जरूर रखे थे। मतलब है कि रोडवेज की बसें धुंध के सीजन को तो तैयार हैं ही नहीं, अगर हादसा हो जाता है तो उन्हें प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाएगा।
शिकायत नंबर पर मिला पेंट
रोडवेज विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही या फिर किसी समस्या आने पर दैनिक यात्री रोडवेज के अधिकारियों से संपर्क करना चाहे तो वह नहीं हो सकता। रोडवेज की अधिकांश बसों में जीएम कार्यालय के नंबर पर पेंट किया हुआ है। अब ऐसा क्यों किया गया, इसकी पड़ताल अमर उजाला टीम ने की तो और भी चौंकाने वाला सच सामने आया। पता लगा कि पिछले दो साल से रोडवेज डिपो का लैंडलाइन कनेक्शन कटा हुआ है। इससे कोई भी लैंडलाइन नंबर पर फोन करता तो वह मिलता ही नहीं। इसी सच को छिपाने के लिए नंबर पर पेंट कर दिया गया।
विज्ञापन
फॉग लाइट न लगवाने की ये है वजह
बसों में अगर पीली लाइट लगवा दी जाए तो आरटीए विभाग उन पर जुर्माना कर सकता है। क्योंकि सरकार के द्वारा इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। धुंध से निपटने के लिए उनके द्वारा लाइट के अंदर ही धुंध से निपटने के लिए ट्यूब लगाई जाती है जोकि अभी तक नहीं लगाई गई है। ऐसा इसलिए नहीं किया गया है क्योंकि चालकों ने अभी कोई समस्या जाहिर नहीं की है।
वर्जन
बसों की लाइटों में धुंध से निपटने के लिए ट्यूब जल्द लगवाई जाएंगी। फर्स्ट एड बॉक्स में अगर ऐसा किया गया है तो वे खुद इसकी जांच करेंगे। अगर ऐसा पाया गया तो चालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कार्यालय के कनेक्शन के लिए भी बीएसएनएल विभाग के अधिकारियों से बात की जाएगी।
- लेखराज, जीएम, झज्जर डिपो।
विज्ञापन
झज्जर।
रोडवेज की लारी में सफर करने वाले दैनिक यात्री खुद के रिस्क पर ही सवारी कर रहे हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि झज्जर डिपो की रोडवेज बसों में धुंध व स्मॉग से निपटने के लिए फॉग लाइटें नहीं हैं। धुंध का सीजन शुरू होते ही विभाग के निदेशालय के द्वारा ऐसा करने के आदेश जारी कर दिए जाते हैं। इसके बावजूद अभी तक फॉग से निपटने के लिए विभाग के अधिकारियों के द्वारा लाइटें नहीं लगवाई गई हैं। चार दिन स्मॉग के दौरान हुए हादसों से भी विभाग ने सबक नहीं लिया। दैनिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने वाली रोडवेज बसें यात्रा के लिए कितनी सुरक्षित हैं, यह जानने के लिए अमर उजाला टीम ने बस स्टैंड का दौरा किया। इस दौरान बसों के फर्स्ट एड बॉक्स में जो चीजें निकल आई वो चौंकाने वाली हैं।
फर्स्ट एड बॉक्स में दवाई की जगह मिले बीड़ी के बंडल
रोडवेज विभाग के द्वारा हर बस में फर्स्ट एड बॉक्स लगवाया जाता है। इससे इमरजेंसी के दौरान यात्रियों को फर्स्ट एड की सुविधा मुहैया करवाई जा सके। इस फर्स्ट एड बॉक्स को जब अमर उजाला टीम ने चेक किया तो पाया कि उसमें दवाई तो नहीं थे लेकिन बीड़ी के बंडल व डिस्पोजल ग्लास जरूर रखे थे। मतलब है कि रोडवेज की बसें धुंध के सीजन को तो तैयार हैं ही नहीं, अगर हादसा हो जाता है तो उन्हें प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाएगा।
विज्ञापन
शिकायत नंबर पर मिला पेंट
रोडवेज विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही या फिर किसी समस्या आने पर दैनिक यात्री रोडवेज के अधिकारियों से संपर्क करना चाहे तो वह नहीं हो सकता। रोडवेज की अधिकांश बसों में जीएम कार्यालय के नंबर पर पेंट किया हुआ है। अब ऐसा क्यों किया गया, इसकी पड़ताल अमर उजाला टीम ने की तो और भी चौंकाने वाला सच सामने आया। पता लगा कि पिछले दो साल से रोडवेज डिपो का लैंडलाइन कनेक्शन कटा हुआ है। इससे कोई भी लैंडलाइन नंबर पर फोन करता तो वह मिलता ही नहीं। इसी सच को छिपाने के लिए नंबर पर पेंट कर दिया गया।
विज्ञापन
फॉग लाइट न लगवाने की ये है वजह
बसों में अगर पीली लाइट लगवा दी जाए तो आरटीए विभाग उन पर जुर्माना कर सकता है। क्योंकि सरकार के द्वारा इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। धुंध से निपटने के लिए उनके द्वारा लाइट के अंदर ही धुंध से निपटने के लिए ट्यूब लगाई जाती है जोकि अभी तक नहीं लगाई गई है। ऐसा इसलिए नहीं किया गया है क्योंकि चालकों ने अभी कोई समस्या जाहिर नहीं की है।
वर्जन
बसों की लाइटों में धुंध से निपटने के लिए ट्यूब जल्द लगवाई जाएंगी। फर्स्ट एड बॉक्स में अगर ऐसा किया गया है तो वे खुद इसकी जांच करेंगे। अगर ऐसा पाया गया तो चालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कार्यालय के कनेक्शन के लिए भी बीएसएनएल विभाग के अधिकारियों से बात की जाएगी।
- लेखराज, जीएम, झज्जर डिपो।