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Jhajjar-Bahadurgarh News: 700 लिपिक हड़ताल पर, रजिस्ट्री, लाइसेंस का कार्य प्रभावित

Wed, 12 Jul 2023 01:19 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Wed, 12 Jul 2023 01:19 AM IST
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700 clerks on strike, work of registry, license affected
धरने पर बैठे लिपिकों को संबोधित करते शिक्षक प्रधान नरेश कुमार। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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झज्जर। क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारी व सदस्य लघु सचिवालय के सामने हड़ताल पर बैठे हैं। लोग अपने कामकाज के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। लोगों के समय पर काम न होने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र से किराया लगाकर लोग अपने काम के लिए कार्यालयों में पहुंच रहे हैं और निराश होकर लौटने को मजबूर हैं। लिपिकीय वर्ग लगातार कार्य समीक्षा के आधार पर वेतनमान 35 हजार 400 रुपये निर्धारित करने की मांग कर रहा है। मंगलवार को हड़ताल में जिलेभर से लगभग 700 कर्मचारियों ने भाग लिया।
लिपिकाें की हड़ताल पर चले जाने से आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वही सरकार को रजिस्ट्री,मोटर व्हीकल,लाइसेंस नही बनने के कारण राजस्व भी घट रहा है। प्रतिदिन लघु सचिवालय में 35 रजिस्ट्री व 30 के करीब मोटर व्हीकल पंजीकरण होते थे, लेकिन लिपिकों की हड़ताल के कारण सभी काम बाधित हो रहें है।
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क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसाइटी के जिला प्रधान आनंद कुमार ने बताया कि एसोसिएशन की सिर्फ एक ही मांग लिपिकों के कार्य व योग्यता के आधार पर न्यूनतम वेतन 19 हजार 900 रुपये से बढ़ाकर 35 हजार 400 रुपये किया जाए। एसोसिएशन के पिछले तीन वर्ष से चल रहे संघर्ष व प्रदर्शन के बावजूद सरकार जायज मांग को नजरंदाज कर रही हैं। लिपिकों ने बताया कि जब तक मांगों को नहीं माना जाएगा, उनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
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- यह बोले लोग


कई दिनों से अपनी फैमिली आईडी ठीक करवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन लिपिक धरने पर बैठे हैं और कुर्सियां खाली पड़ी हुई हैं।

- कांशीराम, गांव ढाणा।



लघु सचिवालय में अपना रिहायशी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए के लिए आया था, यहां आकर पता चला कि लिपिकों की हड़ताल चल रही है। किराया व समय दोनों खराब गए।

- प्रीतम।



रिहायशी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आया था, लेकिन कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण उसका काम नहीं हो पाया। खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है।

- प्रवीण कुमार।
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