{"_id":"5c4a0f2cbdec22737b7b765b","slug":"61548357420-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीआरओ ने लगाए प्रति एकड़ 28 लाख रुपये, मंजूरी के लिए बजट भेजा चंडीगढ़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीआरओ ने लगाए प्रति एकड़ 28 लाख रुपये, मंजूरी के लिए बजट भेजा चंडीगढ़
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
बादली। छुड़ानी गांव के किसानों की जमीन की कीमत 28 लाख रुपये प्रति एकड़ लगाई गई है। यह कलेक्टर रेट हैं, जिसे राजस्व विभाग की ओर से सिंचाई विभाग की मांग पर लगवाए गए हैं। कलेक्टर रेट मातन लिंक ड्रेन के निर्माण के लिए जमीन खरीदने के लिए लगाए गए हैं। कलेक्टर रेट को इसी सप्ताह मंजूरी के लिए चंडीगढ़ भेजा गया है जहां से बजट की मंजूरी मिलने पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
ड्रेन निर्माण कार्य करवाने का आश्वासन 20 जनवरी को सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने छुड़ानी गांव के किसानों को खेतों में पहुंचकर दिया था। किसानों ने जमीन और फसल खराब होने पर भाजपा के बहिष्कार की चेतावनी दी थी। चेतावनी के बाद सिंचाई विभाग के अभियंता अनिल संभरवाल, एसडीओ सतेंद्र कुमार और मेकेनिकल इंजीनियर राजेश कुमार निरीक्षण करने के लिए छुड़ानी गांव के खेतों में पहुंचे जहां किसानों ने जलभराव दिखाया। किसानों ने साथ ही बताया कि खरहर, खरमान और मातन गांव के किसान मातन लिंक ड्रेन में पानी छोड़ देते हैं, जिससे छुड़ानी के खेतों में जलभराव होता है। मातन लिंक ड्रेन और केसीबी ड्रेन के बीच करीब एक किलोमीटर की दूरी है।
जमीन के हिसाब मिलेगी कीमत
विभाग का कहना है कि ड्रेन निर्माण के दौरान जिस किसान की जितनी जमीन आएगी, उसके हिसाब उसकी अदायगी कर दी जाएगी। किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। विभाग सभी किसानों को उनकी जमीन के हिसाब से ही पेमेंट करेगा।
विज्ञापन
फसल तबाह
गांव के सरपंच सत्यवान, प्रवीन ब्लॉक समिति सदस्य, जगदीश चंद्र, लाला नंबरदार, प्रदीप, रामफल, अजीत, प्रताप नंबरदार का कहना है कि प्रतिवर्ष लाखों रुपये का नुकसान जलभराव से हो जाता है। पहले जहां बारिश के दिनों में फसल खराब होती थी वहीं इस बार गेहूं और सरसों की भी करीब 400 एकड़ फसल जलभराव से खराब हो गई है। अभी तक खेतों में पानी भरा हुआ है।
जमीन की कीमत 28 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से लगाई गई है, जो कलेक्टर रेट हैं। बजट को मंजूरी के लिए चंडीगढ़ भेज दिया है और मंजूरी मिलते ही ड्रेन का अधूरा निर्माण कार्य पूरा करवाया जाएगा। अभी तीन हजार फीट लंबी ड्रेन का निर्माण कार्य बाकी है।
सतेंद्र कुमार, एसडीओ, सिंचाई विभाग।
विज्ञापन
बादली। छुड़ानी गांव के किसानों की जमीन की कीमत 28 लाख रुपये प्रति एकड़ लगाई गई है। यह कलेक्टर रेट हैं, जिसे राजस्व विभाग की ओर से सिंचाई विभाग की मांग पर लगवाए गए हैं। कलेक्टर रेट मातन लिंक ड्रेन के निर्माण के लिए जमीन खरीदने के लिए लगाए गए हैं। कलेक्टर रेट को इसी सप्ताह मंजूरी के लिए चंडीगढ़ भेजा गया है जहां से बजट की मंजूरी मिलने पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
ड्रेन निर्माण कार्य करवाने का आश्वासन 20 जनवरी को सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने छुड़ानी गांव के किसानों को खेतों में पहुंचकर दिया था। किसानों ने जमीन और फसल खराब होने पर भाजपा के बहिष्कार की चेतावनी दी थी। चेतावनी के बाद सिंचाई विभाग के अभियंता अनिल संभरवाल, एसडीओ सतेंद्र कुमार और मेकेनिकल इंजीनियर राजेश कुमार निरीक्षण करने के लिए छुड़ानी गांव के खेतों में पहुंचे जहां किसानों ने जलभराव दिखाया। किसानों ने साथ ही बताया कि खरहर, खरमान और मातन गांव के किसान मातन लिंक ड्रेन में पानी छोड़ देते हैं, जिससे छुड़ानी के खेतों में जलभराव होता है। मातन लिंक ड्रेन और केसीबी ड्रेन के बीच करीब एक किलोमीटर की दूरी है।
विज्ञापन
जमीन के हिसाब मिलेगी कीमत
विभाग का कहना है कि ड्रेन निर्माण के दौरान जिस किसान की जितनी जमीन आएगी, उसके हिसाब उसकी अदायगी कर दी जाएगी। किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। विभाग सभी किसानों को उनकी जमीन के हिसाब से ही पेमेंट करेगा।
विज्ञापन
फसल तबाह
गांव के सरपंच सत्यवान, प्रवीन ब्लॉक समिति सदस्य, जगदीश चंद्र, लाला नंबरदार, प्रदीप, रामफल, अजीत, प्रताप नंबरदार का कहना है कि प्रतिवर्ष लाखों रुपये का नुकसान जलभराव से हो जाता है। पहले जहां बारिश के दिनों में फसल खराब होती थी वहीं इस बार गेहूं और सरसों की भी करीब 400 एकड़ फसल जलभराव से खराब हो गई है। अभी तक खेतों में पानी भरा हुआ है।
जमीन की कीमत 28 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से लगाई गई है, जो कलेक्टर रेट हैं। बजट को मंजूरी के लिए चंडीगढ़ भेज दिया है और मंजूरी मिलते ही ड्रेन का अधूरा निर्माण कार्य पूरा करवाया जाएगा। अभी तीन हजार फीट लंबी ड्रेन का निर्माण कार्य बाकी है।
सतेंद्र कुमार, एसडीओ, सिंचाई विभाग।