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जिले में 70 लघु उद्योग, 95 प्रतिशत के पास नहीं दमकल विभाग की एनओसी
Updated Thu, 22 Mar 2018 01:28 AM IST
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70 लघु उद्योगों में 95 प्रतिशत के पास नहीं दमकल विभाग की एनओसी
चरखी दादरी।
जिले में फैक्ट्री, मिल व अन्य उद्योगों की संख्या करीब 70 है। इनमें करीब 600 कर्मचारी काम कर रहे हैं। वहीं सरकार के अनुसार तय नियमों के बावजूद दमकल विभाग की ओर से एनओसी मुश्किल से 5 प्रतिशत कारखाना मालिकों के पास भी नहीं है। इतना ही नहीं श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है।
शहर व गांवों में करीब 70 फैक्ट्री, छोटे उद्योग व कारखानों के अलावा कपास व आयॅल मिल हैं। शहर में 20 से ज्यादा तार फैक्ट्री हैं डेढ़ दर्जन से अधिक आयॅल व कपास मिल हैं। रोहतक रोड पर पाइप और तारों की फैक्ट्री हैं। कनीना रोड पर ज्यादातर ऑयल व कॉटन मिल हैं जिनमें साल में तीन से चार बार आग लगने की घटनाएं होती हैं। जिले में आग की ज्यादातर घटनाएं कॉटन मिल में ही हुई है। जिले में पेंट एवं केमिकल का एक भी कारखाना नहीं है। इन उद्योगों में काम रहे श्रमिकों में 10 प्रतिशत भी रजिस्टर्ड नहीं हैं। ऐसे में इन श्रमिकों का भविष्य पूरी तरह से असुरक्षित है। ज्यादातर संख्या में प्रवासी श्रमिक काम करते हैं। श्रमिकों के लिए ईपीएफ व अन्य सुविधा भी नहीं है। जो रजिस्टर्ड हैं उन्हें ही यह सुविधाएं मिल पा रही हैं। इन उद्योगों में से 95 प्रतिशत के पास दमकल विभाग की ओर से जारी की गई एनओसी सर्टिफिकेट भी नहीं है। जबकि किसी भी के उद्योग को शुरू करने से पहले वहां की लोकेशन की ड्राइंग और दमकल गाड़ी पहुुंचने के लिए सड़क का विवरण देना होता है।
== वर्सन-
यह उद्योग एवं कारखाने सरकार की ओर से निर्धारित सभी मानक एवं शर्तें पूरी करते हैं। दमकल विभाग से एनओसी तकरीबन ऊद्योग मालिकों के पास नहीं है। जिस समय उद्योग शुरू किया उस समय यह प्रशासन की तरफ से मांगी ही नहीं गई। बहुत थोड़ी संख्या में ही श्रमिक रजिस्टर्ड हैं। लघु उद्योग भारती संघ की एसोसिएशन में 36 उद्योग ही दर्ज हैं। कम से कम छह माह में श्रम विभाग की ओर से जांच भी होती है।
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हरिराम खुडानिया, लघु उद्योग भारती संघ, चरखी दादरी
:: चरखी दादरी दमकल विभाग में उद्योगों का पंजीकरण नहीं है। इन उद्योगों एवं कारखाना मालिकों के पास दमकल विभाग से एनओसी नहीं है। कुछेक उद्योगों का भिवानी दमकल कार्यालय में पंजीकरण जरूर मिल सकता है।
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चरखी दादरी।
जिले में फैक्ट्री, मिल व अन्य उद्योगों की संख्या करीब 70 है। इनमें करीब 600 कर्मचारी काम कर रहे हैं। वहीं सरकार के अनुसार तय नियमों के बावजूद दमकल विभाग की ओर से एनओसी मुश्किल से 5 प्रतिशत कारखाना मालिकों के पास भी नहीं है। इतना ही नहीं श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है।
शहर व गांवों में करीब 70 फैक्ट्री, छोटे उद्योग व कारखानों के अलावा कपास व आयॅल मिल हैं। शहर में 20 से ज्यादा तार फैक्ट्री हैं डेढ़ दर्जन से अधिक आयॅल व कपास मिल हैं। रोहतक रोड पर पाइप और तारों की फैक्ट्री हैं। कनीना रोड पर ज्यादातर ऑयल व कॉटन मिल हैं जिनमें साल में तीन से चार बार आग लगने की घटनाएं होती हैं। जिले में आग की ज्यादातर घटनाएं कॉटन मिल में ही हुई है। जिले में पेंट एवं केमिकल का एक भी कारखाना नहीं है। इन उद्योगों में काम रहे श्रमिकों में 10 प्रतिशत भी रजिस्टर्ड नहीं हैं। ऐसे में इन श्रमिकों का भविष्य पूरी तरह से असुरक्षित है। ज्यादातर संख्या में प्रवासी श्रमिक काम करते हैं। श्रमिकों के लिए ईपीएफ व अन्य सुविधा भी नहीं है। जो रजिस्टर्ड हैं उन्हें ही यह सुविधाएं मिल पा रही हैं। इन उद्योगों में से 95 प्रतिशत के पास दमकल विभाग की ओर से जारी की गई एनओसी सर्टिफिकेट भी नहीं है। जबकि किसी भी के उद्योग को शुरू करने से पहले वहां की लोकेशन की ड्राइंग और दमकल गाड़ी पहुुंचने के लिए सड़क का विवरण देना होता है।
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== वर्सन-
यह उद्योग एवं कारखाने सरकार की ओर से निर्धारित सभी मानक एवं शर्तें पूरी करते हैं। दमकल विभाग से एनओसी तकरीबन ऊद्योग मालिकों के पास नहीं है। जिस समय उद्योग शुरू किया उस समय यह प्रशासन की तरफ से मांगी ही नहीं गई। बहुत थोड़ी संख्या में ही श्रमिक रजिस्टर्ड हैं। लघु उद्योग भारती संघ की एसोसिएशन में 36 उद्योग ही दर्ज हैं। कम से कम छह माह में श्रम विभाग की ओर से जांच भी होती है।
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हरिराम खुडानिया, लघु उद्योग भारती संघ, चरखी दादरी
:: चरखी दादरी दमकल विभाग में उद्योगों का पंजीकरण नहीं है। इन उद्योगों एवं कारखाना मालिकों के पास दमकल विभाग से एनओसी नहीं है। कुछेक उद्योगों का भिवानी दमकल कार्यालय में पंजीकरण जरूर मिल सकता है।