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महेंद्रगढ़ के बाद भिवानी जिला में मर्ज हुआ चरखी दादरी, दो साल पहले अलग जिले के रूप में आया अस्तित्व में

Thu, 01 Nov 2018 12:32 AM IST
Updated Thu, 01 Nov 2018 12:32 AM IST
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महेंद्रगढ़ के बाद भिवानी जिला में मर्ज हुआ चरखी दादरी, दो साल पहले अलग जिले के रूप में आया अस्तित्व में
चरखी दादरी। चरखी दादरी 2016 से पहले भिवानी जिला में शामिल था और इससे पहले भिवानी व चरखी दादरी महेंद्रगढ़ जिले के तहत आते थे। महेंद्रगढ़ से अलग होकर भिवानी जिला बना। उस समय चरखी दादरी का पुराना नाम डालमिया दादरी था। बाद में इसका नाम चरखी दादरी रखा गया। जब एक नवंबर 1966 को हरियाणा का गठन हुआ तब चरखी दादरी में विकास के नाम पर कुछ नहीं था। जिले में गेहूं की भी पैदावार नहीं होती थी और नहरें भी नहीं बनी थी। जिले में उस समय उद्योगों की संख्या न के बराबर थी। हालांकि उस समय प्रतिष्ठित सीसीआई सीमेंट फैक्टरी जरूर चल रही थी। सीसीआई का यह एरिया करीब 250 एकड़ में है। अब यह कई दशकों से बंद पड़ी है। 1775 के दशक में उद्योगों ने थोड़ी गति पकड़ी। शहर मेें लघु एवं कुटीर उद्योग लगे। पाइप एवं स्पीनिंग व ऑयल उद्योग को बढ़ावा मिला। इस समय जिला भर में सौ से ज्यादा छोटे एवं माध्यम स्तर के उद्योग हैं। सीएम मनोहरलाल ने 18 सितंबर 2016 में चरखी दादरी को जिले का दर्जा देने की घोषणा की थी उसके बाद दिसंबर प्रथम सप्ताह में जिला गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई थी। जिला बन जाने के बाद ऑनलाइन जनसेवाओं में जिले को दो बार राज्य में प्रथम स्थान मिल चुका है। जिला का बौंद कलां ब्लॉक सक्षम हो चुका है।
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नहरों का बिछा जाल, बिजली सब स्टेशनों का मिला तोहफा
हरियाणा गठन से पहले जिले में नहरें भी नहीं थी। पूर्व बंसीलाल के शासनकाल में जिले में नहरों का जाल बिछाया गया। 1972-73 के दशक में मेन लोहारू कैनाल, लोहारू फीडर का निर्माण हुआ। इस नहर के निर्माण के बाद जिला में खासकर गेहूं, जौ की फसल को बढ़ावा मिला। सिंचाई के अभाव में गेहूं की पैदावार नहीं होती थी। इस समयावधि में शहर में दो बिजली के बस स्टेशन भी बनवाए गए। प्रदेश गठन के बाद शहर के बाजार में पुराना बस स्टैंड बना था लेकिन उस समय चरखी दादरी डिपो नहीं था। बाद में चरखी दादरी में रोडवेज का डिपो बनाया गया है। डिपो के बेड़े में इस समय करीब 155 बसें हैं। यहां दूसरे राज्यों को भी बसों का आवागमन होता है।
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1970 में बना था पहला स्कूल, अब संख्या पहुंची 365
प्रदेश गठन के बाद शहर में एकमात्र राजकीय स्कूल 1970 के दशक में बना था। इसके अलावा जिले में कोई बड़ा सरकारी स्कूल नहीं था। यह स्कूल प्रदेश को दो सीएम (बनारसी दास गुप्ता और मास्टर हुक्म सिंह) दे चुका है। सन 1970-75 में शहर में भूतपूर्व सांसद रामकृष्ण गुप्ता की अथक प्रयासों से शहर में जनता कालेज स्थापित हुआ। इस समय जिले में आयुर्वेदिक कालेज, करीब डेढ़ दर्जन बीएड कालेज, एक दर्जन डीएड कालेज, आधा दर्जन डिग्री कालेज भी खुले हैं। जिले में इस समय करीब 365 राजकीय स्कूल और तीन राजकीय आईटीआई व तकनीकी कालेज भी खुले हैं।
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अंग्रेजी शासनकाल में बने रेलवे स्टेशन का अब हो रहा नवीनीकरण
शहर का रेलवे स्टेशन अंग्रेजी शासनकाल का बना हुआ है। सीसीआई सीमेंट फैक्टरी से तैयार माल ट्रेन के जरिए बाहर भेजा जाता था। इसी वजह से यहां रेलवे स्टेशन का निर्माण हुआ था। अब यह स्टेशन आधुनिक रूप लेने जा रहा है। इसके प्रोजेक्ट पर काम जोरों पर है। रेलवे लाइन का भी दोहरीकरण किया जा रहा है। प्रदेश गठन के बाद राजधानी दिल्ली के अलावा पड़ोसी जिलों महेंद्रगढ़, लोहारू, रोहतक को जोड़ने वाले प्रमुख सड़क मार्ग बनाए गए। चरखी दादरी के पुराने पहलवानों में लीलाराम ने एशिया चैंपियनशिप जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया था। जिला निवासी अर्जुन अवार्डी राजकुमार सांगवान ने बाक्सिंग व संजय मकड़ाना भारतीय वालीबॉल की टीम में खेल चुके हैं। वहीं, महिला पहलवान गीता, बबीता, विनेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिला का नाम रोशन किया है तो आदमपुर डाढ़ी निवासी बहनें प्रिंयका और पिंकी पिलानियां कबड्डी में देश की टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।


श्यामेश्वर तालाब व रानीला अतिशय क्षेत्र
शहर में श्यामेश्वर तालाब ऐतिहासिक माना जाता है। शहर बसने के समय से ही यह तालाब अस्तित्व में है। इसी प्रकार जिले के गांव रानीला में जैन समुदाय का जैन मंदिर देशभर में अपनी धार्मिक ख्याति समेटेे हैं। यहां प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर का धार्मिक आयोजन होता है। इसमें विभिन्न राज्यों से जैन मुनि और समाज के लोग शामिल होते हैं। करीब चार दशक पहले शहर में जलघर बना था। उसके बाद अब शहर को एक और जलघर की जरूरत बनी हुई है। जिलेभर में इस समय 58 जलघर हैं। जिला बन जाने पर अब जिला में पानी की खपत बढ़कर करीब दो गुणा तक बढ़ गई है।
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