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600 एकड़ फसल हो सकती है सिंचित, एसटीपी का शोधित पानी जा रहा है वेस्ट
Updated Sun, 03 Jun 2018 12:52 AM IST
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झज्जर। शहर में साढे़ 10 एमएलडी पानी को हर रोज ट्रीट कर सिंचाई के योग्य बनाया जा रहा है। इतने पानी से करीब 600 एकड़ फसल की सिंचाई की जा सकती है। लेकिन यहां ऐसा हो नहीं रहा। जनस्वास्थ्य विभाग के द्वारा इस पानी को वापस गंदे नाले में छोड़कर बेकार किया जा रहा है। जिससे इतना पैसा खर्च करने का महत्व ही खत्म हो रहा है। इसी पानी को अगर सिस्टम बनाकर किसानों के खेतों तक निशुल्क पहुंचा दिया जाए तो किसानों को हर साल करीब साढे़ तीन करोड़ रुपये का फायदा हो सकता है।
शहर के आसपास नहरी पानी का अभाव है, जिसके चलते यहां पर गंदे नाले से खेती की जाती है। किसान खास तौर पर यहां सब्जी की खेती ही ज्यादा करते हैं। वर्तमान में ये किसान गंदे नाले से फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, जिसके चलते शहर के लोगों की सेहत बिगड़ रही है। अगर सिस्टम बनाकर एसटीपी में साफ किया गया पानी किसानों को उपलब्ध करवा दिया जाए तो किसानों को बढ़िया पानी मिल जाएगा और शोधित पानी की सब्जियों से शहर के लोगों की सेहत सुधर जाएगी। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का सदुपयोग किसानों व शहर के लोगों के लिए फायदे का सौदा बन सकता है।
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शहर में हैं साढे़ 10 एमएलडी के प्लांट
कोसली रोड स्थित एसटीपी प्लांट की क्षमता साढे 5 एमएलडी है। जिस पर करीब 6 करोड़ का खर्च आया था तथा इसने 2007 में कार्य करना शुरू कर दिया था। वहीं सांपला रोड पर स्थित एसटीपी की क्षमता 5 एमएलडी है, इस पर करीब 5 करोड़ का खर्च आया है, इसने 2015 में कार्य करना शुरू कर दिया है। दोनों एसटीपी पर बिजली व तेल सहित होने वाले अन्य खर्च को जोड़ दिया जाए तो हर महीने करीब 2.5 लाख रुपये खर्च होते हैं।
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इतना है बीओडी-सीओडी लेवल
झज्जर शहर के सीवरेज से निकलने वाले पानी का बीओडी लेवल 175 से से 250 के बीच में रहता है तथा जिसके घटाकर से 20 से 30 के बीच में कर दिया जाता है। वहीं यहां का सीओडी लेवल 350 से 450 के आसपास रहता है, जिसके घटाकर 70 से 90 तक लाया जाता है। वहीं अब इसे अपग्रेड करने की तैयारी चल रही है। जिसके बाद बीओडी लेवल को घटाकर 10 से कम लाया जाएगा तथा सीओडी को 70 से कम करते हुए 50 लाया जाएगा।
इस काम आता है शोधित पानी
एसटीपी के द्वारा ट्रीट किए गए पानी से खेती की जा सकती है। वहीं सब्जियों के लिए भी इस पानी का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा गाड़ी धोने के काम भी यह पानी आ सकता है। ड्रेन के साथ लगती बेरी रोड, तलाव रोड, ग्वालीसन तथा कोसली बाईपास क्षेत्र के किसानों के लिए यह फायदे का सौदा बन सकता है लेकिन ड्रेन में खड़े रहने वाले पानी की वजह से अब किसान विषैले पानी से खेती करने को मजबूर हैं।
वर्जन
बीओडी और सीओडी घटाकर वे पानी को ड्रेन में छोड़ देते हैं। अगर सिंचाई विभाग समय-समय पर ड्रेन की छंटाई करवाता रहे तो यहां अलग से नाला बनवाने की आवश्यकता नहीं है। ड्रेन की छंटाई नहीं होने के कारण पानी खराब हो रहा है। अगर ड्रेन का पानी चलता रहे तो खराब नहीं होता, लेकिन पानी अब खड़ा रहता है। दोनों एसटीपी को अपग्रेड करने की तैयारी चल रही है, जिसके बाद बीओडी और सीओडी लेवल और भी कम आ जाएगा।
- सतीश राठी, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग, झज्जर।