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नोटबंदी से कैशलैश की तरफ बढ़े कदम

Sat, 11 Nov 2017 01:22 AM IST
Updated Sat, 11 Nov 2017 01:22 AM IST
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नोटबंदी से कैशलैश की तरफ बढ़े कदम
अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़
पिछले साल जब नोटबंदी हुई थी उसके शुरूआती दिनों में तो लोगों को काफी मुश्किलें आई थी। मगर तीन-चार महीने बाद ही सब कुछ सामान्य होने लग गया था। अब हालात एकदम सुधर गए हैं। कहीं पर भी पैसे की कोई दिक्कत लोगों को नहीं आ रही है। नोटबंदी के एक वर्ष पूरा होने के बाद शहर के लोगों ने मिलीजुली राय दी। लोगों ने कुछ खट्टे-मीठे अपने अनुभव अमर उजाला टीम के साथ सांझा किए। खास बात यह रही कि नोटबंदी के बाद लोगों ने मोबाइल वॉलेट से भुगतान करना शुरू कर दिया। अब अधिकतर लोग ई बैंकिंग से जुड़ गए हैं।

मोबाइल वॉलेट से भुगतान
माल गोदाम रोड पर कपड़े का व्यवसाय करने वाले शिव कुमार गुप्ता के मुताबिक पिछले वर्ष ही मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करना सीखा, क्योंकि यह नोटबंदी के दौर में लेनदेन का सबसे आसान तरीके के तौर पर उभरा था। उनके मुताबिक एक साल बाद सब कुछ सामान्य होने के बाद अब भी मोबाइल वॉलेट समेत भुगतान के अन्य माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन्होंने भी उस दौर में इस सुविधा का लाभ उठाया, वह अब भी इससे जुड़े हैं।
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सकारात्मक प्रभाव पड़ा
शिक्षिका इंदू के मुताबिक नोटबंदी का सकारात्मक प्रभाव पड़ा। एक तो लोग एक-दूसरे की मदद को आगे आए। दूसरे उनमें यह विश्वास आया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह का कदम भी उठाया जा सकता है। इसलिए आज भी राजनीतिक स्तर के अलावा कोई इसका विरोध करता नजर नहीं आ रहा।
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जरूरी था यह कदम
गारमेंट्स का काम करने वाले राहुल के मुताबिक नोटबंदी जरूरी था, क्योंकि कब तक भ्रष्टाचारियों को लूटने की छूट देते। इसलिए सरकार के इस फैसले के साथ देश का आम नागरिक भी रहा। उनके मुताबिक कुछ राजनीतिक दल पूछते हैं कि व्यक्तिगत तौर पर नोटबंदी ने उनको क्या फायदा दिया तो वह कहते हैं कि देश की आर्थिक सेहत दुरुस्त करने वाला फैसला दूरगामी परिणाम सामने आएगा।


नोटबंदी ने लाई क्रांति
नई बस्ती निवासी राजेंद्र कुमार ने कहा कि नोटबंदी ने भारतीय समाज में क्रांति लाई, क्योंकि इसके पहले बाजार परंपरागत तरीके से चल रहा था। लोगों ने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा भी होगा। जब ऐसा हुआ तब लोगों ने विकल्प ढूंढे। यह फैसला एक क्रांति की तरह था। यह कालेधन पर करारा प्रहार था। इससे आम लोगों को राहत मिली, क्योंकि वह मेहनत से पैसा कमाते हैं।

- फोटो 1 : शिव कुमार गुप्ता
- फोटो 2 : इंदू, शिक्षिका
- फोटो 3 : राहुल
- फोटो 4 : राजेेंद्र कुमार
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