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Jhajjar-Bahadurgarh News: बहादुरगढ़ में 3 हजार कुत्तों का होगा बधियाकरण, नगर परिषद ने दोबारा लगाया टेंडर
Wed, 10 Sep 2025 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Wed, 10 Sep 2025 02:10 AM IST
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-फोटो 62 : सड़क पर घूमते कुत्ते। स्रोत पाठक
बहादुरगढ़। शहर की गलियों में घूमते आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए नगर परिषद ने बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद परिषद ने 3 हजार कुत्तों का बधियाकरण करने का फैसला लिया है। इसके लिए टेंडर लगाया गया है। कुछ दिन पहले भी टेंडर लगाया था, लेकिन उसमें किसी ने बोली नहीं लगाई थी। अब परिषद ने इसे दोबारा लगाया है। 16 सितंबर को यह टेंडर खोला जाएगा।
नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी ने कहा कि कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोगों को परेशानी हो रही है। कुत्तों के काटने की शिकायतें शहर में काफी बढ़ रही थी। इसी के चलते नगर परिषद का लक्ष्य है कि कुत्तों की नसबंदी की प्रक्रिया पूरी तरह मानवीय तरीके से की जाए और सुप्रीम कोर्ट व पशु कल्याण बोर्ड की हिदायतों का पालन हो।
राठी ने बताया कि टेंडर की शर्तों के मुताबिक एजेंसी को वेटनरी डॉक्टर, दवाइयां, कुत्तों को पकड़ने व रखने का इंतजाम खुद करना होगा। नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। उनकी पहचान के लिए कान पर टी मार्क लगाया जाएगा।
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एजेंसी को यह भी ध्यान रखना होगा कि 6 माह से कम उम्र के कुत्तों और छोटे पिल्लों वाली मादा कुत्तों की नसबंदी नहीं की जाएगी। बीमार व घायल कुत्तों के लिए अलग व्यवस्था अनिवार्य होगी। नसबंदी के बाद प्रत्येक कुत्ते को कम से कम 4 दिन के लिए होम स्टे में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि परिषद ने इस बार साफ कर दिया है कि काम संतोषजनक न मिलने पर ठेका तुरंत रद कर दिया जाएगा।
बताया कि हम चाहते हैं कि शहरवासी सुरक्षित रहें और कुत्तों की संख्या भी नियंत्रित रहे। राठी ने कहा है कि यदि यह अभियान सफल रहा तो आने वाले समय में बहादुरगढ़ में आवारा कुत्तों की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।
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नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी ने कहा कि कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोगों को परेशानी हो रही है। कुत्तों के काटने की शिकायतें शहर में काफी बढ़ रही थी। इसी के चलते नगर परिषद का लक्ष्य है कि कुत्तों की नसबंदी की प्रक्रिया पूरी तरह मानवीय तरीके से की जाए और सुप्रीम कोर्ट व पशु कल्याण बोर्ड की हिदायतों का पालन हो।
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राठी ने बताया कि टेंडर की शर्तों के मुताबिक एजेंसी को वेटनरी डॉक्टर, दवाइयां, कुत्तों को पकड़ने व रखने का इंतजाम खुद करना होगा। नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। उनकी पहचान के लिए कान पर टी मार्क लगाया जाएगा।
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एजेंसी को यह भी ध्यान रखना होगा कि 6 माह से कम उम्र के कुत्तों और छोटे पिल्लों वाली मादा कुत्तों की नसबंदी नहीं की जाएगी। बीमार व घायल कुत्तों के लिए अलग व्यवस्था अनिवार्य होगी। नसबंदी के बाद प्रत्येक कुत्ते को कम से कम 4 दिन के लिए होम स्टे में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि परिषद ने इस बार साफ कर दिया है कि काम संतोषजनक न मिलने पर ठेका तुरंत रद कर दिया जाएगा।
बताया कि हम चाहते हैं कि शहरवासी सुरक्षित रहें और कुत्तों की संख्या भी नियंत्रित रहे। राठी ने कहा है कि यदि यह अभियान सफल रहा तो आने वाले समय में बहादुरगढ़ में आवारा कुत्तों की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।