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पौलेंड में दिखी झज्जर की छोरी के मुक्कों की धमक

Sun, 16 Sep 2018 02:09 AM IST
Updated Sun, 16 Sep 2018 02:09 AM IST
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पौलेंड में दिखी झज्जर की छोरी के मुक्कों की धमक

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झज्जर। झज्जर की बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं, चाहे वह कोई भी क्षेत्र हो। सबसे अधिक खेल के क्षेत्र में बेटियां आगे बढ़ रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कामयाबी के झंडे गाढ़ रही हैं। झज्जर जिला के खानपुर खुर्द गांव निवासी नेहा पिलानियां ने विदेश की धरती सोना जीत कर विश्व पटल पर भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। 10 से 15 सितंबर तक पोलेंड के गलीविक में आयोजित हुई 13वीं अंतरराष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में लतीविया की खिलाड़ी बोकेनिकोलिना को 3-2 से हराते हुए सोने पर कब्जा किया है। शु़क्रवार की शाम को हुए मुकाबले में नेहा ने गोल्ड मेडल जीत कर देश की झोली में डाला तो ग्रामीणों और परिवार के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

हिसार में ले रही है प्रशिक्षण
नेहा के पिता बलजीत सिंह भारतीय सेना में कार्यरत हैं और इन दिनों वे हिसार कैंट में तैनात हैं। नेहा भी अपने पिता के साथ रहती है और आर्मी पब्लिक स्कूल हिसार कैंट में दसवीं कक्षा में शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। वह हिसार की यूनिवर्सल बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। इससे पहले भी वह राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पदक प्राप्त कर चुकी हैं। जबकि उनकी माता रीनादेवी गृहिणी हैं और नेहा का हौंसला बढ़ाने के लिए उनके साथ ही रहती हैं। इसके अलावा पूरा परिवार गांव खानपुर खुर्द में रहा है। उनके दादा सूबे सिंह और पिता बलजीत सिंह का कहना है कि उनकी बेटी निरंतर कामयाबी की तरफ बढ़ती जा रही है और उनका असली सपना उस दिन पूरा होगा जब नेहा ओलंपिक में सोना जीतेगी। उन्हें विश्वास है कि एक दिन उनकी बेटी यह सपना अवश्य पूरा करेगी।
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स्वदेश लौटने का किया जा रहा इंतजार
खानपुर खुर्द गांव के पूर्व सरपंच सूबेसिंह की सुपौत्री नेहा ने जब सोना जीता तो लोगों ने उन्हें बधाई देनी शुरू कर दी। अब बेटी के स्वदेश लौटने का इंतजार किया जा रहा है। नेहा17 सितंबर को स्वदेश लौटेंगी और 18 सितंबर को गांव में उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा। उनके पिता का कहना है कि इस उपलब्धि का श्रेय उनके कोच राजेश श्योराण को जाता है।
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दादी खिलाएंगी चूरमा और मां खिलाएंगी पनीर
नेहा की दादी संतोष देवी का कहना है कि उनकी लाडली को उनके हाथ का चूरमा ओर मां के हाथ से बनी पनीर की सब्जी पंसद है। वे दोनों बेटी के स्वदेश लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। घर पहुंचते ही बेटी को उसकी पंसद का देशी घी का चूरमा और पनीर खिलाएंगी।
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