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रैली से खुलकर सामने आई कांग्रेस में फूट
Updated Mon, 04 Jun 2018 12:36 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की समालखा में रविवार को हुई जनक्रांति रैली से बहादुरगढ़ कांग्रेस में फूट खुलकर सामने आ गई है। इस मौके पर भी कांग्रेसी एकजुटता दिखाकर पार्टी की ताकत का प्रदर्शन नहीं कर पाए। पार्टी के विभिन्न गुटों के स्थानीय नेता अपने-अपने समर्थकों के साथ अलग-अलग टोलियों में समालखा रैली के लिए रवाना हुए।
अशोक तंवर समर्थकों का तो समालखा रैली में भाग न लेना तय ही था। तंवर के समर्थक स्थानीय कांग्रेस नेता पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सतीश छिक्कारा, पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजेश जून और राज पहलवान तो समालखा रैली में गए ही नहीं, हुड्डा के अपने समर्थकों ने भी हुड्डा के लिए एकता नहीं दिखाई। हुड्डा के समर्थक पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह जून रैली में शामिल नहीं हुए। सूत्रों ने बताया कि उनके रैली में नहीं जाने की वजह अस्वस्थता रही। उनकी कमी को उनके बेटे विक्रम जून ने पूरी करने का प्रयास किया। रैली में शामिल हुए अपने पिता के कार्यकर्ताओं की अगुवाई विक्रम ने ही की। पूर्व पंचायत समिति अध्यक्ष तेजवीर दलाल, पूर्व मार्केट कमेटी अध्यक्ष आजाद सिंह राठी व एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष रवींद्र जून भी थे।
हुड्डा के खास समर्थक माने जाने वाले सतपाल नीना राठी अपने अलग समूह के साथ सांखोल के पास अपने आफिस में इकट्ठे हुए। नीना के साथ महिलाओं की भी काफी संख्या थी। नगर परिषद अध्यक्ष शीला राठी व उनके पति बिजेंद्र राठी अपने सहयोगियों के साथ झज्जर रोड स्थित अपने निवास से रैली के लिए निकले। उनके साथी तीन नगर पार्षद धर्मेंद्र वत्स, सत्यप्रकाश छिक्कारा व युवराज छिल्लर और ब्लाक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रियव्रत दलाल व जगदीश नंबरदार भी थे। पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रवि खत्री ने भी अपनी ढपली अलग बजाई। वह भी अपने साथियों को लेकर अलग टोली में जनक्रांति रैली पहुंचे।
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बहादुरगढ़।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की समालखा में रविवार को हुई जनक्रांति रैली से बहादुरगढ़ कांग्रेस में फूट खुलकर सामने आ गई है। इस मौके पर भी कांग्रेसी एकजुटता दिखाकर पार्टी की ताकत का प्रदर्शन नहीं कर पाए। पार्टी के विभिन्न गुटों के स्थानीय नेता अपने-अपने समर्थकों के साथ अलग-अलग टोलियों में समालखा रैली के लिए रवाना हुए।
अशोक तंवर समर्थकों का तो समालखा रैली में भाग न लेना तय ही था। तंवर के समर्थक स्थानीय कांग्रेस नेता पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष सतीश छिक्कारा, पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजेश जून और राज पहलवान तो समालखा रैली में गए ही नहीं, हुड्डा के अपने समर्थकों ने भी हुड्डा के लिए एकता नहीं दिखाई। हुड्डा के समर्थक पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह जून रैली में शामिल नहीं हुए। सूत्रों ने बताया कि उनके रैली में नहीं जाने की वजह अस्वस्थता रही। उनकी कमी को उनके बेटे विक्रम जून ने पूरी करने का प्रयास किया। रैली में शामिल हुए अपने पिता के कार्यकर्ताओं की अगुवाई विक्रम ने ही की। पूर्व पंचायत समिति अध्यक्ष तेजवीर दलाल, पूर्व मार्केट कमेटी अध्यक्ष आजाद सिंह राठी व एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष रवींद्र जून भी थे।
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हुड्डा के खास समर्थक माने जाने वाले सतपाल नीना राठी अपने अलग समूह के साथ सांखोल के पास अपने आफिस में इकट्ठे हुए। नीना के साथ महिलाओं की भी काफी संख्या थी। नगर परिषद अध्यक्ष शीला राठी व उनके पति बिजेंद्र राठी अपने सहयोगियों के साथ झज्जर रोड स्थित अपने निवास से रैली के लिए निकले। उनके साथी तीन नगर पार्षद धर्मेंद्र वत्स, सत्यप्रकाश छिक्कारा व युवराज छिल्लर और ब्लाक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रियव्रत दलाल व जगदीश नंबरदार भी थे। पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रवि खत्री ने भी अपनी ढपली अलग बजाई। वह भी अपने साथियों को लेकर अलग टोली में जनक्रांति रैली पहुंचे।
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