{"_id":"5956aa4a4f1c1b1c6e8b4600","slug":"21498851914-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"10 जुलाई से पंजाब के वाहनों को हरियाणा में नहीं लेने देंगे एंट्री: अभय चौटाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
10 जुलाई से पंजाब के वाहनों को हरियाणा में नहीं लेने देंगे एंट्री: अभय चौटाला
Updated Sat, 01 Jul 2017 01:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
एसवाइएल के मामले में अगर कोई भी प्रदेश के किसानों के हकों की लड़ाई सही मायनों में लड़ रहा है तो वह केवल इनेलो ही है। इस मुद्दे पर जब तक किसानों को उनका वाजिब हक नहीं मिल जाता है तब तक इनेलो का संघर्ष जारी रहेगा। यदि नौ जुलाई तक कोई भी फैसला सरकार नहीं लेती है तो 10 जुलाई को अंबाला में पंजाब से आने वाले वाहनों को पूरी तरह से रोक दिया जाएगा। यह बात शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष अभय सिंह चौटाला ने कही। स्थानीय जिला इनेलो कार्यालय में उपस्थित पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 1971 में हुए बंटवारे के अनुसार पंजाब को 62 लाख क्यूसिक और हरियाणा को 38 लाख क्यूसिक पानी अलॉट किया गया था। इसके बाद पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने मुख्यमंत्री रहते हुए साल 2000 में सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश की ओर से इस मामले की पैरवी पूरी तरह से की। 2002 में हरियाणा के किसानों के पक्ष में यह फैसला आ गया था, लेकिन उस समय की पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। अभय सिंह चौटाला ने कहा कि 2005 से लेकर 2014 तक हरियाणा में कांग्रेस का कार्यकाल था, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सिर्फ इस मामले में कोरी राजनीति ही की। गत साल 10 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि हरियाणा के किसानों को उनका वाजिब हक मिले।
चौटाला ने कहा कि इसके बाद 17 नवंबर को मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी दलों से सहयोग की अपील की। इसमें सभी दलों के प्रतिनिधियों ने साथ देने का वायदा किया लेकिन आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरी तरह से किसानों को ठगने का ही कार्य कर रही है, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की बात करने वाली सरकार को आज किसानों के कर्जे व उनके द्वारा की जा रही आत्महत्याएं नहीं दिखाई दे रही हैं। अगर बीजेपी वाकई गंभीर है तो उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब के तर्ज पर हरियाणा प्रदेश के किसानों को कर्जा माफी मिले।
इस मौके पर ऋषि पाल उमरवास, नरेश द्वारका, राजदीप फौगाट, राव बहादुर सिंह, कर्नल रघबीर सिंह छिल्लर, रणबीर मंदौला, आनंद महराणा, जसबीर ढिल्लो, सज्जन बलाली, विजय पंचगांवा, राजेश सांगवान झोझू, महेंद्र शास्त्री, रामनिवास मिर्च, मनफूल शर्मा, लक्ष्मी बलौदा, विजय प्रकाश, विजय सांगवान, प्रभूराम गोदारा, दरियाव सिंह, वेदपाल कादयान, रविंद्र सांगवान चरखी, कैलाश पालड़ी, अशोक स्वामी, राजेश फौगाट, बबलू श्योराण, महेंद्र जाखड़, राकेश कलकल, शशि शर्मा, ओमपाल चौबारला, सतपाल आर्य, शकुंतला, विनोद, राजवंती, विरेंद्र पहलवान, रमेश वर्मा, प्यारेलाल लांबा, योगेश, राजकुमार, कुलदीप दलाल, बबलू चौधरी, जयभगवान ठेकेदार, प्रद्युमन, रामोतार मंदौला, दिलबाग सैन, दिनेश शास्त्री और डॉ. ओमप्रकाश यादव आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
चरखी दादरी।
एसवाइएल के मामले में अगर कोई भी प्रदेश के किसानों के हकों की लड़ाई सही मायनों में लड़ रहा है तो वह केवल इनेलो ही है। इस मुद्दे पर जब तक किसानों को उनका वाजिब हक नहीं मिल जाता है तब तक इनेलो का संघर्ष जारी रहेगा। यदि नौ जुलाई तक कोई भी फैसला सरकार नहीं लेती है तो 10 जुलाई को अंबाला में पंजाब से आने वाले वाहनों को पूरी तरह से रोक दिया जाएगा। यह बात शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष अभय सिंह चौटाला ने कही। स्थानीय जिला इनेलो कार्यालय में उपस्थित पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 1971 में हुए बंटवारे के अनुसार पंजाब को 62 लाख क्यूसिक और हरियाणा को 38 लाख क्यूसिक पानी अलॉट किया गया था। इसके बाद पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने मुख्यमंत्री रहते हुए साल 2000 में सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश की ओर से इस मामले की पैरवी पूरी तरह से की। 2002 में हरियाणा के किसानों के पक्ष में यह फैसला आ गया था, लेकिन उस समय की पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। अभय सिंह चौटाला ने कहा कि 2005 से लेकर 2014 तक हरियाणा में कांग्रेस का कार्यकाल था, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सिर्फ इस मामले में कोरी राजनीति ही की। गत साल 10 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि हरियाणा के किसानों को उनका वाजिब हक मिले।
चौटाला ने कहा कि इसके बाद 17 नवंबर को मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी दलों से सहयोग की अपील की। इसमें सभी दलों के प्रतिनिधियों ने साथ देने का वायदा किया लेकिन आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरी तरह से किसानों को ठगने का ही कार्य कर रही है, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की बात करने वाली सरकार को आज किसानों के कर्जे व उनके द्वारा की जा रही आत्महत्याएं नहीं दिखाई दे रही हैं। अगर बीजेपी वाकई गंभीर है तो उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब के तर्ज पर हरियाणा प्रदेश के किसानों को कर्जा माफी मिले।
विज्ञापन
इस मौके पर ऋषि पाल उमरवास, नरेश द्वारका, राजदीप फौगाट, राव बहादुर सिंह, कर्नल रघबीर सिंह छिल्लर, रणबीर मंदौला, आनंद महराणा, जसबीर ढिल्लो, सज्जन बलाली, विजय पंचगांवा, राजेश सांगवान झोझू, महेंद्र शास्त्री, रामनिवास मिर्च, मनफूल शर्मा, लक्ष्मी बलौदा, विजय प्रकाश, विजय सांगवान, प्रभूराम गोदारा, दरियाव सिंह, वेदपाल कादयान, रविंद्र सांगवान चरखी, कैलाश पालड़ी, अशोक स्वामी, राजेश फौगाट, बबलू श्योराण, महेंद्र जाखड़, राकेश कलकल, शशि शर्मा, ओमपाल चौबारला, सतपाल आर्य, शकुंतला, विनोद, राजवंती, विरेंद्र पहलवान, रमेश वर्मा, प्यारेलाल लांबा, योगेश, राजकुमार, कुलदीप दलाल, बबलू चौधरी, जयभगवान ठेकेदार, प्रद्युमन, रामोतार मंदौला, दिलबाग सैन, दिनेश शास्त्री और डॉ. ओमप्रकाश यादव आदि मौजूद थे।
विज्ञापन