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मातृ-शिशु अस्पताल को मिली गाइनी व एनीस्थीसिया स्पेशलिस्ट
Updated Fri, 10 Aug 2018 01:21 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। एक साल पहले अस्तित्व में आने के बावजूद चिकित्सकों और सुविधाओं की कमी झेल रहे जच्चा-बच्चा अस्पताल में आखिरकार स्वास्थ्य विभाग ने ध्यान दे दिया है। गर्भवती महिलाओं को आ रही दिक्कतों को देखते हुए विभाग ने यहां गायनोकॉलॉजिस्ट और एनिस्थीसिया स्पेशलिस्ट की नियुक्ति कर दी है। यहां रोहतक से दो चिकित्सकों सहित लैब टेक्नीशियन की तैनाती भी की गई है। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के एडीजी आदित्य चौधरी ने की। अमर उजाला ने जुलाई में अस्पताल में खाली पड़े महिला चिकित्सकों के पदों सहित सुविधाओं के मुद्दे को अलग-अलग संस्करणों में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अमर उजाला की मुहिम को शहर के सामाजिक संगठनों और पार्षदों ने भी अपना समर्थन दिया था।
झाडू सिंह चौक रोड स्थित पुराने सिविल अस्पताल बिल्डिंग परिसर में शहर के लिए 30 बेड के जच्चा-बच्चा अस्पताल को करीब एक साल पहले शुरू किया गया था। इसके बाद यहां वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए उपचार सेवा भी शुरू कर दी थी। लंबा समय गुजर जाने के बाद भी आधे-अधूरे इंतजाम को स्वास्थ्य विभाग ने पूरा नहीं किया और इसका खामियाजा यहां आने वाली महिला मरीजों को भुगतना पड़ रहा था। यहां के लिए 44 पोस्ट तो विभाग ने स्वीकृत कर दी थी लेकिन चिकित्सकों की तैनाती व अन्य सुविधाओं का टोटा दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए थे।
नौ जुलाई के संस्करण में अमर उजाला ने नाम का जच्चा-बच्चा अस्पताल, सुविधाएं तीन किलोमीटर दूर शीर्षक से प्रकाशित की थी। इसके बाद भी अमर उजाला ने लगातार अपने संस्करणों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद शहर के सामाजिक संगठन व पार्षद भी इस मुहिम से जुड़ गए। इन सभी ने यहां चिकित्सकों की तैनाती व स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा करने की मांग की थी। 20 जुलाई को शहर के सामाजिक संगठनों ने एक मंच पर आकर इस संबंध में एडीएम ओमप्रकाश देवराला को ज्ञापन भी सौंप था। अमर उजाला ने 21 जुलाई के संस्करण में जच्चा-बच्चा अस्पताल में सुविधाएं बढ़वाने को सौंपा ज्ञापन नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस पर एसडीएम ने यह डिमांड उच्चाधिकारियों की मार्फत सरकार तक भेजने का आश्वासन दिया था।
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44 पोस्ट हैं स्वीकृत्त
जच्चा-बच्चा अस्पताल में एक लेडी एसएमओ, सात चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट, आठ स्टाफ नर्स (आउटसोर्सिंग), दो नर्सिंग सिस्टर, एक पीएचएनसी, दो एलटी, एक एंबुलेंस चालक, एक ड्राइवर, एक क्लर्क और एक अकाउंटेंट सहित 44 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 10 फीसदी पदों पर ही अब तक तैनाती हो सकी है। यहां डेंटल सर्जन व डेंटल मैकेनिक के पद भी स्वीकृत हैं।
निजी अस्पताल के चिकित्सक को भी प्रति डिलीवरी फीस देगा विभाग
स्वास्थ्य विभाग के एडीजी आदित्य चौधरी ने बताया कि प्रदेश में चिकित्सकों की कमी है। इसके चलते दादरी जिले में चिकित्सकों की कमी है। उन्होंने बताया कि अगर कोई निजी अस्पताल का चिकित्सक अपनी सेवाएं देना चाहता है तो विभाग उन्हें इसके बदले फीस देने के लिए तैयार है। अगर कोई महिला सर्जन सिविल अस्पताल में डिलीवरी करवाती है तो विभाग प्रति डिलीवरी भी उन्हें फीस देने के लिए तैयार है।
चरखी दादरी के एमसीएच में रोहतक से गायनी, एनिस्थीसिया स्पेशलिस्ट और एलटी की तैनाती कर दी गई है। जल्द ही यहां अन्य सुविधाएं भी विभाग मुहैया करवा देगा।
-आदित्य चौधरी, एडीजी, स्वास्थ्य विभाग
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चरखी दादरी। एक साल पहले अस्तित्व में आने के बावजूद चिकित्सकों और सुविधाओं की कमी झेल रहे जच्चा-बच्चा अस्पताल में आखिरकार स्वास्थ्य विभाग ने ध्यान दे दिया है। गर्भवती महिलाओं को आ रही दिक्कतों को देखते हुए विभाग ने यहां गायनोकॉलॉजिस्ट और एनिस्थीसिया स्पेशलिस्ट की नियुक्ति कर दी है। यहां रोहतक से दो चिकित्सकों सहित लैब टेक्नीशियन की तैनाती भी की गई है। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के एडीजी आदित्य चौधरी ने की। अमर उजाला ने जुलाई में अस्पताल में खाली पड़े महिला चिकित्सकों के पदों सहित सुविधाओं के मुद्दे को अलग-अलग संस्करणों में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अमर उजाला की मुहिम को शहर के सामाजिक संगठनों और पार्षदों ने भी अपना समर्थन दिया था।
झाडू सिंह चौक रोड स्थित पुराने सिविल अस्पताल बिल्डिंग परिसर में शहर के लिए 30 बेड के जच्चा-बच्चा अस्पताल को करीब एक साल पहले शुरू किया गया था। इसके बाद यहां वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए उपचार सेवा भी शुरू कर दी थी। लंबा समय गुजर जाने के बाद भी आधे-अधूरे इंतजाम को स्वास्थ्य विभाग ने पूरा नहीं किया और इसका खामियाजा यहां आने वाली महिला मरीजों को भुगतना पड़ रहा था। यहां के लिए 44 पोस्ट तो विभाग ने स्वीकृत कर दी थी लेकिन चिकित्सकों की तैनाती व अन्य सुविधाओं का टोटा दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए थे।
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नौ जुलाई के संस्करण में अमर उजाला ने नाम का जच्चा-बच्चा अस्पताल, सुविधाएं तीन किलोमीटर दूर शीर्षक से प्रकाशित की थी। इसके बाद भी अमर उजाला ने लगातार अपने संस्करणों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद शहर के सामाजिक संगठन व पार्षद भी इस मुहिम से जुड़ गए। इन सभी ने यहां चिकित्सकों की तैनाती व स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा करने की मांग की थी। 20 जुलाई को शहर के सामाजिक संगठनों ने एक मंच पर आकर इस संबंध में एडीएम ओमप्रकाश देवराला को ज्ञापन भी सौंप था। अमर उजाला ने 21 जुलाई के संस्करण में जच्चा-बच्चा अस्पताल में सुविधाएं बढ़वाने को सौंपा ज्ञापन नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस पर एसडीएम ने यह डिमांड उच्चाधिकारियों की मार्फत सरकार तक भेजने का आश्वासन दिया था।
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44 पोस्ट हैं स्वीकृत्त
जच्चा-बच्चा अस्पताल में एक लेडी एसएमओ, सात चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट, आठ स्टाफ नर्स (आउटसोर्सिंग), दो नर्सिंग सिस्टर, एक पीएचएनसी, दो एलटी, एक एंबुलेंस चालक, एक ड्राइवर, एक क्लर्क और एक अकाउंटेंट सहित 44 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 10 फीसदी पदों पर ही अब तक तैनाती हो सकी है। यहां डेंटल सर्जन व डेंटल मैकेनिक के पद भी स्वीकृत हैं।
निजी अस्पताल के चिकित्सक को भी प्रति डिलीवरी फीस देगा विभाग
स्वास्थ्य विभाग के एडीजी आदित्य चौधरी ने बताया कि प्रदेश में चिकित्सकों की कमी है। इसके चलते दादरी जिले में चिकित्सकों की कमी है। उन्होंने बताया कि अगर कोई निजी अस्पताल का चिकित्सक अपनी सेवाएं देना चाहता है तो विभाग उन्हें इसके बदले फीस देने के लिए तैयार है। अगर कोई महिला सर्जन सिविल अस्पताल में डिलीवरी करवाती है तो विभाग प्रति डिलीवरी भी उन्हें फीस देने के लिए तैयार है।
चरखी दादरी के एमसीएच में रोहतक से गायनी, एनिस्थीसिया स्पेशलिस्ट और एलटी की तैनाती कर दी गई है। जल्द ही यहां अन्य सुविधाएं भी विभाग मुहैया करवा देगा।
-आदित्य चौधरी, एडीजी, स्वास्थ्य विभाग