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रसोई का बजट बिगाड़ रही महंगाई, गृहणी परेशान
Updated Sun, 02 Jul 2017 01:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। सबसे अधिक असर सब्जियों पर दिखाई दे रहा है। करीब महीने भर के अंतराल में कई सब्जियों के रेट काफी बढ़ गए हैं। टमाटर के रेट तो डबल हो गए हैं। इससे रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। गृहणियों की परेशानी भी बेहद बढ़ गई है।
टमाटर हो रहा लाल
टमाटर के दामों में तो बेहद ही ज्यादा उछाल आया है। महीने भर पहले तक 25 से 30 रुपये किलो के हिसाब से बिकने वाले टमाटर के रेट डबल से भी ज्यादा हो गए हैं। कई गुणा बढ़ गए हैं। फिलहाल मंडी में टमाटर गुणवत्ता अनुसार 50 से 60 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है। टमाटर के थोक व्यवसायी संजय की मानें महीने भर पहले 25 किलो की टमाटर की कैरेट 200 रुपये से 400 रुपये के हिसाब से बिक रही थी। अब उक्त कैरेट का थोक रेट 1100 रुपये तक पहुंच गया है। काफी दाम बढ़ जाने के कारण टमाटर तड़का और सलाद से गायब होने लगा है।
रसोई का बजट बिगड़ा
मेन बाजार निवासी मोनिका शर्मा ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले कुछ दिनों से रसोई का बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। दाल रोटी तो दूर की बात है अब तो चटनी बनाना भी पहुंच से बाहर होता जा रहा है। टमाटर और धनिये के दाम काफी बढ़ गए हैं। किलो की बजाय पावभर के हिसाब से टमाटर खरीदने पड़ रहे हैं।
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बिना सब्जी, रोटी कैसे खाएं?
जोशी राठी ने कहा कि परचून की दुकान पर दालें महंगी और मंडी में सब्जियां महंगी हैं। बिना सब्जी के खाना कैसे खाएं? मजबूरन महंगी सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं। थोड़ा बहुत बढ़े तो चल जाए, मगर इतना रेट बढ़ जाना चिंता का विषय है। कोई ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे सब्जियों के आमजन की पहुंच से बाहर न हो।
दालों के रेटों पर अंकुश लगे
बबीता रोहिल्ला ने कहा कि शहरीकरण हो जाने दूध-दही तो लगभग थाली से गायब है। दाल-रोटी खाने की कहावत भी अब बीती बात हो गई। संपन्न लोगों को तो दिक्कतें नहीं होती, लेकिन निर्धन तबके को दो वक्त की रोटी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सरकार को दालों के रेटों में कमी लानी चाहिए।
सब्जी विक्रेता
सब्जी विक्रेता विनोद ने कहा कि बरसात में लोकल सब्जियां खत्म हो जाती हैं। इसलिए सब्जियां बाहर से आ रहीं हैं। अभी और बरसात होगी, जिससे सब्जियों के रेट और अधिक बढ़ेंगे। जब लोकल सब्जियां आनी शुरू होंगी, तो रेट कम होते चले जाएंगे, लेकिन लोकल सब्जियों को आने में अभी वक्त लगेगा।
-
सब्जी मंडी भाव गुणवत्ता अनुसार
-
सब्जी भाव वर्तमान 30 दिन पहले
टमाटर 50 से 60 25 से 30
खीरा 20 से 25 10 से 15
तोरई 20 से 30 15 से 20
बैंगन 20 से 30 15 से 20
टिंडा 30 से 40 25 से 30
भिंडी 20 से 30 12 से 18
प्याज 10 से 16 08 से 10
करेला 20 से 30 10 से 15
घीया 20 से 30 15 से 20
मंडी में अच्छी किस्म की दालों के भाव रिटेल में
दाल भाव किलो में
अरहर 80 रुपये
उड़द 90 रुपये
चना दाल 80 रुपये
मूंग की दाल 80 रुपये
खाद्य पदार्थों के दाम रिटेल में
सरसों तेल 85 रु पये
रिफाइंड 85 रुपये तक
वनस्पति घी 70 रुपये
चीनी 40 से 42 रुपये
बेसन 90 से 100 रुपये
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बहादुरगढ़।
महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। सबसे अधिक असर सब्जियों पर दिखाई दे रहा है। करीब महीने भर के अंतराल में कई सब्जियों के रेट काफी बढ़ गए हैं। टमाटर के रेट तो डबल हो गए हैं। इससे रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। गृहणियों की परेशानी भी बेहद बढ़ गई है।
टमाटर हो रहा लाल
टमाटर के दामों में तो बेहद ही ज्यादा उछाल आया है। महीने भर पहले तक 25 से 30 रुपये किलो के हिसाब से बिकने वाले टमाटर के रेट डबल से भी ज्यादा हो गए हैं। कई गुणा बढ़ गए हैं। फिलहाल मंडी में टमाटर गुणवत्ता अनुसार 50 से 60 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है। टमाटर के थोक व्यवसायी संजय की मानें महीने भर पहले 25 किलो की टमाटर की कैरेट 200 रुपये से 400 रुपये के हिसाब से बिक रही थी। अब उक्त कैरेट का थोक रेट 1100 रुपये तक पहुंच गया है। काफी दाम बढ़ जाने के कारण टमाटर तड़का और सलाद से गायब होने लगा है।
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रसोई का बजट बिगड़ा
मेन बाजार निवासी मोनिका शर्मा ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले कुछ दिनों से रसोई का बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। दाल रोटी तो दूर की बात है अब तो चटनी बनाना भी पहुंच से बाहर होता जा रहा है। टमाटर और धनिये के दाम काफी बढ़ गए हैं। किलो की बजाय पावभर के हिसाब से टमाटर खरीदने पड़ रहे हैं।
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बिना सब्जी, रोटी कैसे खाएं?
जोशी राठी ने कहा कि परचून की दुकान पर दालें महंगी और मंडी में सब्जियां महंगी हैं। बिना सब्जी के खाना कैसे खाएं? मजबूरन महंगी सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं। थोड़ा बहुत बढ़े तो चल जाए, मगर इतना रेट बढ़ जाना चिंता का विषय है। कोई ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे सब्जियों के आमजन की पहुंच से बाहर न हो।
दालों के रेटों पर अंकुश लगे
बबीता रोहिल्ला ने कहा कि शहरीकरण हो जाने दूध-दही तो लगभग थाली से गायब है। दाल-रोटी खाने की कहावत भी अब बीती बात हो गई। संपन्न लोगों को तो दिक्कतें नहीं होती, लेकिन निर्धन तबके को दो वक्त की रोटी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सरकार को दालों के रेटों में कमी लानी चाहिए।
सब्जी विक्रेता
सब्जी विक्रेता विनोद ने कहा कि बरसात में लोकल सब्जियां खत्म हो जाती हैं। इसलिए सब्जियां बाहर से आ रहीं हैं। अभी और बरसात होगी, जिससे सब्जियों के रेट और अधिक बढ़ेंगे। जब लोकल सब्जियां आनी शुरू होंगी, तो रेट कम होते चले जाएंगे, लेकिन लोकल सब्जियों को आने में अभी वक्त लगेगा।
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सब्जी मंडी भाव गुणवत्ता अनुसार
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सब्जी भाव वर्तमान 30 दिन पहले
टमाटर 50 से 60 25 से 30
खीरा 20 से 25 10 से 15
तोरई 20 से 30 15 से 20
बैंगन 20 से 30 15 से 20
टिंडा 30 से 40 25 से 30
भिंडी 20 से 30 12 से 18
प्याज 10 से 16 08 से 10
करेला 20 से 30 10 से 15
घीया 20 से 30 15 से 20
मंडी में अच्छी किस्म की दालों के भाव रिटेल में
दाल भाव किलो में
अरहर 80 रुपये
उड़द 90 रुपये
चना दाल 80 रुपये
मूंग की दाल 80 रुपये
खाद्य पदार्थों के दाम रिटेल में
सरसों तेल 85 रु पये
रिफाइंड 85 रुपये तक
वनस्पति घी 70 रुपये
चीनी 40 से 42 रुपये
बेसन 90 से 100 रुपये