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कुपोषण का शिकार हो रहा है गोवंश, गोशालाओं में होती है हर रोज 5 की मौत
Updated Wed, 21 Mar 2018 01:31 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
सड़कों पर लावारिस घूम रहे गोवंश की हालत इस समय गोशालाओं में बंद गोवंश से काफी अच्छी है। गोशालाओं में बंद गोवंश कुपोषण का शिकार होकर मौत के मुंह में समा रहे हैं। गोशालाओं में बंद गोवंश के हालात का जायजा लेने के लिए अमर उजाला टीम ने प्रयास किया, जिसमें सामने आया कि हर रोज अलग-अलग गोशालाओं में गोवंश के मरने की औसत दो-चार तक है। ऐसे में क्या उम्मीद की जा सकती है कि गोशालाओं से गोवंश की हालत सुधर जाएगी। गोशालाओं में इनको भरपेट चारा तक नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से ये कुषोषण का शिकार हो रहे हैं। जनवरी 2018 से 20 मार्च तक जिले की आठ गोशालाओं में करीब 350 गोवंश की मौत हो चुकी है।
गोशालाओं में नहीं मेडिकल सुविधा
इस समय झज्जर जिले की आठ गोशालाओं में करीब 22000 हजार गोवंश है। इनके लिए मेडिकल की कोई सुविधा नहीं है। गोशालाओं में पशुपालन विभाग की ओर से कोई चिकित्सक तैनात नहीं किए जाने के कारण गोवंश के उपचार में देरी हो जाती है, जोकि गोवंश को मौत की ओर धकेल देता है।
ये है गोशालाओं में स्थिति
गोशाला गोवंश की संख्या
1. श्रीगोशाला झज्जर 2500
2. श्रीरामकृष्ण गोशाला खेड़का गुर्जर 2000
3. बाबा मथुरापुरी गोशाला मातनहेल 3200
4. गोपाल श्रीकृष्ण गोशाला डीघल 5000
5. श्रीब्रहमचारी जयराम दास गोशाला बेरी 3100
6. आर्यवर्त गोशाला मांडौठी 5000
7. अखिल भारतीय गोशाला कड़ौदा 150
8. गोशाला गुरुकुल झज्जर 400
कुल 21450
स्ट्रे कैटल फ्री अभियान से भी फेल हुआ सिस्टम
छह माह पूर्व जिला प्रशासन के द्वारा स्ट्रे कैटल फ्री अभियान के तहत सड़कों पर घूम रहे गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ दिया गया। इसकी वजह से गोशालाओं में गोवंश की संख्या जगह की अपेक्षा अधिक हो गई। इसके चलते गोशालाओं में गोवंश को बैठने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। वहीं, गोशालाओं का बजट भी इन गोवंश के कारण बिगड़ गया है। गोशाला संचालकों का आरोप है कि जिला प्रशासन के द्वारा गोवंश तो इन गोशालाओं में छोड़ दिया गया लेकिन बजट नहीं दिया गया।
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गाय दफनाने के लिए नहीं मिल रही जगह
गोशाला संघ के जिला प्रधान हवा सिंह कबलाना के अनुसार इस वर्ष में अब तक करीब 350 गायों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं गायों को दफनाने में भी दिक्कत आ रही है। कहीं, वाटर लेवल ऊंचा है तो कहीं जगह नहीं मिलती। इसके लिए वे डीसी सोनल गोयल से मुलाकात भी कर चुके हैं। डीसी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे रोहतक वाले ठेकेदार को यहां के लिए भी परमिशन देंगी। इसके बाद वे मृत गायों को उठाकर ले जाएगा।
प्रति गाय के लिए केवल 150 रुपये की ग्रांट
गोसेवा आयोग के द्वारा नौ मार्च को झज्जर की श्रीगोशाला में कार्यक्रम आयोजित कर झज्जर व दादरी जिले की गोशालाओं के लिए ग्रांट जारी किया था। गोसेवा आयोग के द्वारा जो राशि गोशालाओं को जारी की गई थी, उसका पैमाना प्रति गाय प्रति वर्ष केवल 150 रुपये है।
वर्जन
गोवंश कुपोषण का शिकार होकर दम तोड़ रहा है। गोवंश के लिए जारी की गई ग्रांट भी मजाक ही है। रोजाना जिले भर की गोशालाओं में औसतन दो-चार गोवंश की मौत हो रही है। सरकार को गोशालाओं के लिए नई योजनाओं पर विचार करना चाहिए। वहीं, मेडिकल के लिए चिकित्सकों की भी तैनाती होनी चाहिए।
- हवा सिंह कबलाना, जिला प्रधान, गोशाला समिति झज्जर।
वर्जन
ग्रांट से गोशालाओं का भला नहीं होने वाला है। गोशालाओं की के उद्धार के लिए खाद और उपले बनाने वाली मशीनें उन्हें दी जाएंगी। उनका मकसद गोशालाओं को स्वावलंबी बनाना है। गोवंश के उपचार के लिए उन्होंने प्रस्ताव बनाकर सीएम को भेजा है, जिसके अनुसार प्रति हजार पशुओं पर एक वीएलडीए स्थायी तौर पर गोशाला में तैनात किया जाएगा। इसके बाद इस तरह की दिक्कतें नहीं आएंगी।
- भानीराम मंगला, चेयरमैन, गोसेवा आयोग हरियाणा।
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झज्जर।
सड़कों पर लावारिस घूम रहे गोवंश की हालत इस समय गोशालाओं में बंद गोवंश से काफी अच्छी है। गोशालाओं में बंद गोवंश कुपोषण का शिकार होकर मौत के मुंह में समा रहे हैं। गोशालाओं में बंद गोवंश के हालात का जायजा लेने के लिए अमर उजाला टीम ने प्रयास किया, जिसमें सामने आया कि हर रोज अलग-अलग गोशालाओं में गोवंश के मरने की औसत दो-चार तक है। ऐसे में क्या उम्मीद की जा सकती है कि गोशालाओं से गोवंश की हालत सुधर जाएगी। गोशालाओं में इनको भरपेट चारा तक नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से ये कुषोषण का शिकार हो रहे हैं। जनवरी 2018 से 20 मार्च तक जिले की आठ गोशालाओं में करीब 350 गोवंश की मौत हो चुकी है।
गोशालाओं में नहीं मेडिकल सुविधा
इस समय झज्जर जिले की आठ गोशालाओं में करीब 22000 हजार गोवंश है। इनके लिए मेडिकल की कोई सुविधा नहीं है। गोशालाओं में पशुपालन विभाग की ओर से कोई चिकित्सक तैनात नहीं किए जाने के कारण गोवंश के उपचार में देरी हो जाती है, जोकि गोवंश को मौत की ओर धकेल देता है।
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ये है गोशालाओं में स्थिति
गोशाला गोवंश की संख्या
1. श्रीगोशाला झज्जर 2500
2. श्रीरामकृष्ण गोशाला खेड़का गुर्जर 2000
3. बाबा मथुरापुरी गोशाला मातनहेल 3200
4. गोपाल श्रीकृष्ण गोशाला डीघल 5000
5. श्रीब्रहमचारी जयराम दास गोशाला बेरी 3100
6. आर्यवर्त गोशाला मांडौठी 5000
7. अखिल भारतीय गोशाला कड़ौदा 150
8. गोशाला गुरुकुल झज्जर 400
कुल 21450
स्ट्रे कैटल फ्री अभियान से भी फेल हुआ सिस्टम
छह माह पूर्व जिला प्रशासन के द्वारा स्ट्रे कैटल फ्री अभियान के तहत सड़कों पर घूम रहे गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ दिया गया। इसकी वजह से गोशालाओं में गोवंश की संख्या जगह की अपेक्षा अधिक हो गई। इसके चलते गोशालाओं में गोवंश को बैठने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। वहीं, गोशालाओं का बजट भी इन गोवंश के कारण बिगड़ गया है। गोशाला संचालकों का आरोप है कि जिला प्रशासन के द्वारा गोवंश तो इन गोशालाओं में छोड़ दिया गया लेकिन बजट नहीं दिया गया।
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गाय दफनाने के लिए नहीं मिल रही जगह
गोशाला संघ के जिला प्रधान हवा सिंह कबलाना के अनुसार इस वर्ष में अब तक करीब 350 गायों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं गायों को दफनाने में भी दिक्कत आ रही है। कहीं, वाटर लेवल ऊंचा है तो कहीं जगह नहीं मिलती। इसके लिए वे डीसी सोनल गोयल से मुलाकात भी कर चुके हैं। डीसी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे रोहतक वाले ठेकेदार को यहां के लिए भी परमिशन देंगी। इसके बाद वे मृत गायों को उठाकर ले जाएगा।
प्रति गाय के लिए केवल 150 रुपये की ग्रांट
गोसेवा आयोग के द्वारा नौ मार्च को झज्जर की श्रीगोशाला में कार्यक्रम आयोजित कर झज्जर व दादरी जिले की गोशालाओं के लिए ग्रांट जारी किया था। गोसेवा आयोग के द्वारा जो राशि गोशालाओं को जारी की गई थी, उसका पैमाना प्रति गाय प्रति वर्ष केवल 150 रुपये है।
वर्जन
गोवंश कुपोषण का शिकार होकर दम तोड़ रहा है। गोवंश के लिए जारी की गई ग्रांट भी मजाक ही है। रोजाना जिले भर की गोशालाओं में औसतन दो-चार गोवंश की मौत हो रही है। सरकार को गोशालाओं के लिए नई योजनाओं पर विचार करना चाहिए। वहीं, मेडिकल के लिए चिकित्सकों की भी तैनाती होनी चाहिए।
- हवा सिंह कबलाना, जिला प्रधान, गोशाला समिति झज्जर।
वर्जन
ग्रांट से गोशालाओं का भला नहीं होने वाला है। गोशालाओं की के उद्धार के लिए खाद और उपले बनाने वाली मशीनें उन्हें दी जाएंगी। उनका मकसद गोशालाओं को स्वावलंबी बनाना है। गोवंश के उपचार के लिए उन्होंने प्रस्ताव बनाकर सीएम को भेजा है, जिसके अनुसार प्रति हजार पशुओं पर एक वीएलडीए स्थायी तौर पर गोशाला में तैनात किया जाएगा। इसके बाद इस तरह की दिक्कतें नहीं आएंगी।
- भानीराम मंगला, चेयरमैन, गोसेवा आयोग हरियाणा।