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अंबर चरखे से तैयारी होगी दुलीना जेल में खादी
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झज्जर। नारनौल की जिला जेल के बाद अब झज्जर की दुलीना जेल में भी खादी तैयार होने लगेगी। यहां के कैदी और बंदी बाकायदा स्वयं चरखा कात कर खादी तैयार करेंगे। हरियाणा खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड ने कैदियों को चरखे उपलब्ध करवाने व यहां एक पावरलूम स्थापित करने का प्रस्ताव जेल प्रशासन को दिया है। हरियाणा खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड की चेयरपर्सन गार्गी कक्कड़ भी इस योजना को सार्थक रूप देने के लिए दुलीना जेल का दौरा कर चुकी है। उन्होंने यहां के बंदियों व कैदियों से बात कर उन्हें चरखे से खादी तैयार कर स्वदेशी को बढ़ावा देने का आह्वान किया। गार्गी ने कहा कि बंदियों को व्यस्त कर उन्हें अच्छा बुनकर बनाना खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का लक्ष्य है।
भौंडसी जेल में भी हो रहा है चरखे का प्रयोग
गार्गी कक्कड़ के अनुसार इससे पूर्व भौंडसी जेल में भी कैदियों द्वारा चरखे प्रयोग किये जा रहे है। जेल में तैयार होने वाले खादी के इस माल को बोर्ड स्वयं बाजार तक पहुंचाएगा। कक्कड़ का कहना है कि जेल में इस कार्य के शुरु होने से न केवल कैदियों व बंदियों को काम मिल सकेगा बल्कि समाज को भी स्वदेशी वस्तुएं उपलब्ध होगी। गार्गी ने बंदियों से मुलाकात कर उन्हें चरखे और पावर लूम पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया है। गार्गी का कहना है कि बोर्ड की इस मुहिम में कुछ सामाजिक संगठनों ने भी सहयोग की पेशकश की है।
सजा को इंटर्नशिप में बदलने का मौका
गार्गी का यह भी कहना है कि बंदी न केवल अपनी सजा के दौरान बल्कि इसके बाद जब वे दोबारा समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगी तब भी इस कार्य को अपने व्यवसाय के रुप में अपना सकते हैं। गार्गी ने अपने दौरे के दौरान बंदी महिलाओं द्वारा जेल में बनाई गई विभिन्न कलाकृतियों का अवलोकन भी किया और उनकी खूब सराहना की। इस मौके पर जेल अधीक्षक दयानंद मंदौला ने भी चरखा व लूम को शुरू करवाने की बात कही और इसे खादी बोर्ड का बेहतरीन प्रयास बताया।
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भौंडसी जेल में भी हो रहा है चरखे का प्रयोग
गार्गी कक्कड़ के अनुसार इससे पूर्व भौंडसी जेल में भी कैदियों द्वारा चरखे प्रयोग किये जा रहे है। जेल में तैयार होने वाले खादी के इस माल को बोर्ड स्वयं बाजार तक पहुंचाएगा। कक्कड़ का कहना है कि जेल में इस कार्य के शुरु होने से न केवल कैदियों व बंदियों को काम मिल सकेगा बल्कि समाज को भी स्वदेशी वस्तुएं उपलब्ध होगी। गार्गी ने बंदियों से मुलाकात कर उन्हें चरखे और पावर लूम पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया है। गार्गी का कहना है कि बोर्ड की इस मुहिम में कुछ सामाजिक संगठनों ने भी सहयोग की पेशकश की है।
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सजा को इंटर्नशिप में बदलने का मौका
गार्गी का यह भी कहना है कि बंदी न केवल अपनी सजा के दौरान बल्कि इसके बाद जब वे दोबारा समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगी तब भी इस कार्य को अपने व्यवसाय के रुप में अपना सकते हैं। गार्गी ने अपने दौरे के दौरान बंदी महिलाओं द्वारा जेल में बनाई गई विभिन्न कलाकृतियों का अवलोकन भी किया और उनकी खूब सराहना की। इस मौके पर जेल अधीक्षक दयानंद मंदौला ने भी चरखा व लूम को शुरू करवाने की बात कही और इसे खादी बोर्ड का बेहतरीन प्रयास बताया।
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