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जिले में मिले मलेरिया के दो मरीज
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झज्जर। मानसून सीजन से पहले ही मादा एनोफ्लीज मच्छर का डंक पैना होने लगा है। लोगों को इस मच्छर से सावधान रहने की आवश्यकता है। थोड़ी सी भी लापरवाही उन्हें भारी पड़ सकती है और वे बीमारी का शिकार हो सकते हैं। जिले के भालगढ़ और छुछकवास गांव में दो मरीज मलेरिया पॉजीटिव पाए जा चुके हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग भी सकते में आ गया है। विभाग की ओर से गांव में एंटी लारवा एक्टीविटी शुरू कर दी गई हैं। वहीं दोनों गांवों में डेल्टा मैथरीन दवाई का छिड़काव भी शुरू कर दिया है। क्षेत्र में प्री मानसून की बारिश के बाद मलेरिया के केसों में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। जबकि मध्य जुलाई के आसपास डेंगू के मरीज भी सामने आने लगते हैं। इनका सिलसिला नवंबर तक चलता है और उसके बाद जब मौसम में बदलाव आता है तो विभाग को कुछ राहत मिलती है। क्योंकि उसके बाद सर्दी का मौसम होने के कारण मच्छरों की संख्या कम होनी शुरू हो जाती है। हालांकि पिछले साल मध्य जून तक जिला में मलेरिया के आठ मरीज पाए जा चुके थे। इस बार भी एक मलेरिया पॉजीटिव मरीज पहले भी मिल चुका है। लेकिन वह दूसरे शहर से बीमार होने पर झज्जर आया था। छुछकवास गांव पहले ही स्वास्थ्य विभाग के हाई रिस्क एरिया में शामिल है। क्योंकि दो साल पहले भी यहां पर कुछ मरीज मलेरिया पॉजीटिव पाए गए थे।
मरीज के घर के आसपास किया जाता है दवा का छिड़काव
मलेरिया फैलाने वाले मादा एनोफ्लीज मच्छर पर काबू पाने के डेल्टा मैथरीन दवाई का छिड़काव किया जाता है। जबकि डेंगू फैलाने वाले एडिज मच्छर पर काबू पाने के लिए फॉगिंग की जाती है। फॉगिंग का कार्य ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायतों और शहरी क्षेत्र में नगरपालिका व नगर परिषदों को सौंपा गया है। लेकिन अभी तक फॉगिंग का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जबकि डेल्टा मैथरीन के छिड़काव की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। जिस स्थान पर मलेरिया पॉजीटिव मरीज मिलता है उसके आसपास के करीब 100 घरों में दवाई का छिड़काव किया जाता है।
100 तालाबों में छोड़ी जा चुकी है गंबूजिया मछली
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मच्छर का लारवा खाने वाली गंबूजिया मछली तालाबों में छोड़ी जाती है। विभाग की ओर से जिले में करीब 467 तालाबों को चिह्नित किया गया है। इसमें से करीब 100 तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ी जा चुकी है। विभाग की तरफ से सामान्य अस्पताल में गंबूजिया मछली पालन के लिए हैचरी बनाई गई है। जबकि मत्स्य पालन विभाग भी इस कार्य में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करता है।
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मलेरिया और डेंगू पर काबू पाने के लिए विभाग ने सर्वे शुरू करवा दिया है।103 टीमें सर्वे के कार्य में जुटी हुई हैं। छुछकवास और भालगढ़ गांव में दवाई का छिड़काव किया जा रहा है।
डॉ. कुलदीप, डीएमओ, झज्जर।
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मरीज के घर के आसपास किया जाता है दवा का छिड़काव
मलेरिया फैलाने वाले मादा एनोफ्लीज मच्छर पर काबू पाने के डेल्टा मैथरीन दवाई का छिड़काव किया जाता है। जबकि डेंगू फैलाने वाले एडिज मच्छर पर काबू पाने के लिए फॉगिंग की जाती है। फॉगिंग का कार्य ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायतों और शहरी क्षेत्र में नगरपालिका व नगर परिषदों को सौंपा गया है। लेकिन अभी तक फॉगिंग का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जबकि डेल्टा मैथरीन के छिड़काव की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। जिस स्थान पर मलेरिया पॉजीटिव मरीज मिलता है उसके आसपास के करीब 100 घरों में दवाई का छिड़काव किया जाता है।
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100 तालाबों में छोड़ी जा चुकी है गंबूजिया मछली
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मच्छर का लारवा खाने वाली गंबूजिया मछली तालाबों में छोड़ी जाती है। विभाग की ओर से जिले में करीब 467 तालाबों को चिह्नित किया गया है। इसमें से करीब 100 तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ी जा चुकी है। विभाग की तरफ से सामान्य अस्पताल में गंबूजिया मछली पालन के लिए हैचरी बनाई गई है। जबकि मत्स्य पालन विभाग भी इस कार्य में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करता है।
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मलेरिया और डेंगू पर काबू पाने के लिए विभाग ने सर्वे शुरू करवा दिया है।103 टीमें सर्वे के कार्य में जुटी हुई हैं। छुछकवास और भालगढ़ गांव में दवाई का छिड़काव किया जा रहा है।
डॉ. कुलदीप, डीएमओ, झज्जर।