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प्रदूषण से दिल्ली की सुरक्षा एनसीआर पर मार
Updated Sun, 12 Nov 2017 01:02 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के वातावरण में घुले धुएं के जहर को कम करने के लिए एनजीटी की मुहिम हरियाणा और खासकर एनसीआर के किसानों, मजदूरों व भारी वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। दिल्ली को स्वच्छ हवा देने के लिए बरती जा रही सख्ती से एनसीआर के लोगों को प्रदूषण की चिंता सताने लगी है। इस सख्ती से जहां अकेले झज्जर के ही बादली क्षेत्र में चलने वाले सैकड़ों भट्ठों की चिमनियां पिछले एक सप्ताह से ठंडी पड़ी हैं वहीं दूसरे प्रदेशों से रोजी-रोटी के लिए डेरा डाले हजारों मजदूरों को भी अगले कई दिनों तक रोजी-रोटी का जुगाड़ कहीं नजर नहीं आ रहा।
भारी वाहनों का दिल्ली में प्रवेश रोकने के बाद प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ा है। यदि झज्जर की बात की जाए तो अकेले झज्जर जिले में ही दिल्ली सीमा व अन्य स्थानों पर करीब 16 नाके लगाकर वाहनों को दिल्ली में जाने से रोका जा रहा है। यह कवायद अब ट्रक चालकों के लिए भी परेशानी पैदा कर रही है। कारण कि दूसरे राज्यों से आने-जाने वाले ट्रक, ट्रॉलों व अन्य बड़े वाहनों को दिल्ली के बाहरी क्षेत्र से गुजरने वाले दूसरे वैकल्पिक मार्ग से आना-जाना पड़ रहा है। इस वजह से उन्हें 30 से 80 किलोमीटर तक की दूरी ज्यादा तय करनी पड़ रही है। ऐसा होने से एनसीआर क्षेत्र में भारी वाहनों के जहरीले धुएं से प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ना शुरू हो गया है। अकेले झज्जर में ही दूसरे राज्यों से आने वाले एक हजार से भी अधिक ट्रक और ट्रॉले लंबी कतारों में खड़े हैं। तीन दिन से दिल्ली में प्रवेश रोके जाने से बहुत से ट्रक चालकों और क्लीनरों के लिए भोजन व पानी की परेशानी बढ़ गई है। उधर, प्रशासन द्वारा किसानों के खिलाफ खेतों में पराली जलाने की सूरत में मामला दर्ज किए जाने के कडे़ आदेशों से किसान चिंतित हैं। उन्हें अज्ञात कारणों से भी खेतों में लगने वाली आग की वजह से मामला दर्ज होने का डर सताने लगा है।
वाहन चालकों और क्लीनरों ने डाला सड़कों पर डेरा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जाने से रोके जाने के कारण झज्जर के मुख्य मार्गों पर हजारों ट्रकों की कतारें लगी हैं। जिससे चालक-क्लीनर परेशान हैं। चालक प्रदीप ने बताया कि उन्हें परसों दिल्ली पहुंचना था। लेकिन झज्जर में रोक दिया गया, पहले राजस्थान में रोका गया था। तीन दिन से रोके जाने के कारण उसका जेब खर्च खत्म हो गया है।
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चालक सुनील कुमार ने बताया कि वह मुंबई से केमिकल लेकर आया है और दिल्ली के स्वरूप नगर जाना है। लेकिन शुक्रवार से ट्रकों को झज्जर में ही रोका गया है। ढाबा मालिक उन्हें ढाबा परिसर में वाहन खड़ा नहीं करने दे रहे। ऐसे में सड़कों के किनारे ही दिन-रात व्यतीत रहे हैं।
मोहम्मद तमन्ना ने बताया कि वह झाड़ली से सीमेंट लेकर दिल्ली के लिए चला था। लेकिन दो दिन से ट्रक झज्जर में ही है। रंजन सिंह चालक का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा उनके ट्राले को झज्जर में तीन दिन पहले रोका था और सड़क किनारे ही अन्य काफी वाहन भी कतार में खड़े हैं। न रोटी का प्रबंध है और न पानी का। वे दिन-रात सो भी नहीं पा रहे। चालकों ने बताया कि पुलिस दिल्ली में प्रवेश करने नहीं दे रही है और दूसरे राज्यों में जाने के लिए एनसीआर से गुजरने वाले जो दूसरे मार्ग पुलिस बता रही है वे 30 से 80 किलोमीटर तक लंबे हैं। इस तरह एनसीआर में प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ेगा और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ेगी।
- दिल्ली जाने वाले वाहनों को रोकने के लिए झज्जर में 16 स्थानों पर लगाए नाके
- रोक के बाद झज्जर मेें थमे हजारों वाहनों के पहिए, भोजन और पानी की बढ़ी परेशानी
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झज्जर।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के वातावरण में घुले धुएं के जहर को कम करने के लिए एनजीटी की मुहिम हरियाणा और खासकर एनसीआर के किसानों, मजदूरों व भारी वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। दिल्ली को स्वच्छ हवा देने के लिए बरती जा रही सख्ती से एनसीआर के लोगों को प्रदूषण की चिंता सताने लगी है। इस सख्ती से जहां अकेले झज्जर के ही बादली क्षेत्र में चलने वाले सैकड़ों भट्ठों की चिमनियां पिछले एक सप्ताह से ठंडी पड़ी हैं वहीं दूसरे प्रदेशों से रोजी-रोटी के लिए डेरा डाले हजारों मजदूरों को भी अगले कई दिनों तक रोजी-रोटी का जुगाड़ कहीं नजर नहीं आ रहा।
भारी वाहनों का दिल्ली में प्रवेश रोकने के बाद प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ा है। यदि झज्जर की बात की जाए तो अकेले झज्जर जिले में ही दिल्ली सीमा व अन्य स्थानों पर करीब 16 नाके लगाकर वाहनों को दिल्ली में जाने से रोका जा रहा है। यह कवायद अब ट्रक चालकों के लिए भी परेशानी पैदा कर रही है। कारण कि दूसरे राज्यों से आने-जाने वाले ट्रक, ट्रॉलों व अन्य बड़े वाहनों को दिल्ली के बाहरी क्षेत्र से गुजरने वाले दूसरे वैकल्पिक मार्ग से आना-जाना पड़ रहा है। इस वजह से उन्हें 30 से 80 किलोमीटर तक की दूरी ज्यादा तय करनी पड़ रही है। ऐसा होने से एनसीआर क्षेत्र में भारी वाहनों के जहरीले धुएं से प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ना शुरू हो गया है। अकेले झज्जर में ही दूसरे राज्यों से आने वाले एक हजार से भी अधिक ट्रक और ट्रॉले लंबी कतारों में खड़े हैं। तीन दिन से दिल्ली में प्रवेश रोके जाने से बहुत से ट्रक चालकों और क्लीनरों के लिए भोजन व पानी की परेशानी बढ़ गई है। उधर, प्रशासन द्वारा किसानों के खिलाफ खेतों में पराली जलाने की सूरत में मामला दर्ज किए जाने के कडे़ आदेशों से किसान चिंतित हैं। उन्हें अज्ञात कारणों से भी खेतों में लगने वाली आग की वजह से मामला दर्ज होने का डर सताने लगा है।
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वाहन चालकों और क्लीनरों ने डाला सड़कों पर डेरा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जाने से रोके जाने के कारण झज्जर के मुख्य मार्गों पर हजारों ट्रकों की कतारें लगी हैं। जिससे चालक-क्लीनर परेशान हैं। चालक प्रदीप ने बताया कि उन्हें परसों दिल्ली पहुंचना था। लेकिन झज्जर में रोक दिया गया, पहले राजस्थान में रोका गया था। तीन दिन से रोके जाने के कारण उसका जेब खर्च खत्म हो गया है।
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चालक सुनील कुमार ने बताया कि वह मुंबई से केमिकल लेकर आया है और दिल्ली के स्वरूप नगर जाना है। लेकिन शुक्रवार से ट्रकों को झज्जर में ही रोका गया है। ढाबा मालिक उन्हें ढाबा परिसर में वाहन खड़ा नहीं करने दे रहे। ऐसे में सड़कों के किनारे ही दिन-रात व्यतीत रहे हैं।
मोहम्मद तमन्ना ने बताया कि वह झाड़ली से सीमेंट लेकर दिल्ली के लिए चला था। लेकिन दो दिन से ट्रक झज्जर में ही है। रंजन सिंह चालक का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा उनके ट्राले को झज्जर में तीन दिन पहले रोका था और सड़क किनारे ही अन्य काफी वाहन भी कतार में खड़े हैं। न रोटी का प्रबंध है और न पानी का। वे दिन-रात सो भी नहीं पा रहे। चालकों ने बताया कि पुलिस दिल्ली में प्रवेश करने नहीं दे रही है और दूसरे राज्यों में जाने के लिए एनसीआर से गुजरने वाले जो दूसरे मार्ग पुलिस बता रही है वे 30 से 80 किलोमीटर तक लंबे हैं। इस तरह एनसीआर में प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ेगा और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ेगी।
- दिल्ली जाने वाले वाहनों को रोकने के लिए झज्जर में 16 स्थानों पर लगाए नाके
- रोक के बाद झज्जर मेें थमे हजारों वाहनों के पहिए, भोजन और पानी की बढ़ी परेशानी