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ट्रांसफर के खेले में उलझे 2.37 करोड़, नहीं बना पार्क
Updated Tue, 03 Oct 2017 01:19 AM IST
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ट्रांसफर के खेले में उलझे 2.37 करोड़, नहीं बना पार्क
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
पूर्व सीएम स्वर्गीय मास्टर हुक्म सिंह की स्मृति में बनाए जाने वाले स्मारक का निर्माण पीडब्ल्यूडी और नगर परिषद को फाइल ट्रांसफर करने तक ही सिमटता नजर आ रहा है। अब सरकार ने इस स्मारक का निर्माण नगर परिषद की बजाय पीडब्ल्यूडी से कराने के आदेश जारी किए हैं। बाकायदा नगर परिषद और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भी मिल चुके हैं। इन दोनों विभागों के बीच स्मारक निर्माण को लेकर ट्रांसफर का खेल बीते तीन सालों से चल रहा है। सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा तीन साल पहले स्मारक निर्माण की घोषणा करने के बावजूद अब तक जिला प्रशासन धरातल पर काम शुरू नहीं करवा पाया है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जल्द ही सीएम मनोहर लाल खट्टर अपनी घोषणाओं की रिव्यू मीटिंग लेने के लिए दादरी पहुंच सकते हैं। फिलहाल उनके दादरी आने की तारीख निर्धारित नहीं हुई है। ऐसे में सीएम के सामने तीन सालों से इस मामले में चल रही ढिलाई का मसला उठा तो अधिकारियों पर गाज तक गिर सकती है।
सूबे की बागडोर संभाल चुके चरखी दादरी निवासी मास्टर हुक्म सिंह का देहांत 27 फरवरी 2015 को हुआ था। उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने खुद प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल खट्टर पहुंचे थे। उन्होंने पूर्व सीएम हुक्म सिंह की स्मृति में शहर में एक स्मारक का निर्माण कराने की घोषणा की थी। इस घोषणा पर ढाई साल बीतने के बावजूद धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया। सबसे पहले पीडब्ल्यूडी विभाग को इसके निर्माण की जिम्मेवारी सौंपी गई थी लेकिन किन्हीं कारणों से इस प्रोजेक्ट को बाद में नगर परिषद को सौंप दिया गया। नगर परिषद के अधिकारियों ने दिसंबर 2016 तक तीन इस्टीमेट तैयार कर हेड ऑफिस भेजे थे लेकिन किसी न किसी कारण से हर बार इन पर ऑब्जेक्शन लगाया गया। कभी इस्टीमेट कम होने का कारण बताया गया तो कभी इस्टीमेट में और इजाफा करने के निर्देश दिए गए। गत मार्च माह में तो शहर के इकलौते रोज गार्डन का नाम बदलकर ही यह घोषणा पूरी करने का प्रयास किया गया। इस पर जोरदार विरोध हुआ तो सरकार ने स्मारक का निर्माण कराने के निर्देश भी नगर परिषद को जारी कर दिए। इन आदेशों को करीब छह-सात माह का समय हो चुका है लेकिन अब तक धरातल पर काम शुरू नहीं किया गया। 20 सितंबर को शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय से नगर परिषद को पत्र क्रमांक 9875 जारी हुआ है, इसमें अब स्मारक निर्माण का कार्य पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं। यह पत्र प्राप्त होने के बाद नगर परिषद के अधिकारियों ने बीते करीब छह माह पहले खाते में आए बजट को पीडब्लयूडी को सौंपने की तैयारियां कर ली है। इस सप्ताह यह राशि भी फाइल के साथ-साथ पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर की जा सकती है। ऐसे में अभी तो दूर-दूर तक इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होता नजर नहीं आ रहा। वहीं, प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो स्वर्गीय मास्टर हुक्म सिंह के परिजन भी इस स्मारक का निर्माण पीडब्ल्यूडी से कराने की इच्छा भी जिला उपायुक्त के सामने जाहिर कर चुके हैं।
रोज गार्डन में हुक्म सिंह पार्क का बोर्ड लगाने पर हुआ था बवाल
सीएम मनोहर लाल की घोषणा के तहत स्मारक निर्माण की बजाय नगर परिषद ने गत 9 मार्च को शहर के रोज गार्डन में ही हुक्म सिंह पार्क का बोर्ड लगा दिया था। इस बोर्ड का आगे न तो कहीं स्वर्गीय लिखा गया और न ही पूर्व सीएम। नगर परिषद की इस बेरुखी के साथ-साथ सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना भी हुई थी। अमर उजाला ने 10 मार्च के संस्करण में ‘पार्क बना नहीं, रोज गार्डन बन गया हुक्म सिंह पार्क’ नामक शीर्षक से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। राजनीतिक दलों की आलोचना के बाद सरकार ने नगर परिषद को पूर्व सीएम के स्मारक निर्माण के आदेश जारी कर राशि भी खाते में डाल दी थी।
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नप के खाते में छह माह पड़ी रही 2.37 करोड़ की राशि
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने रोज गार्डन का नाम बदलने का कड़ा विरोध किया था। कांग्रेस ने रोज गार्डन के बाहर धरना थी दिया था लेकिन उस समय जाट आंदोलन के चलते यह धरना एक दिन में ही सिमट कर रह गया था। वहीं, सरकार ने अपनी चूक सुधारने की मंशा से नगर परिषद के खाते में 2.37 करोड़ की राशि भी डाली थी जोकि करीब छह माह तक नप के खाते में पड़ी रही। अब नगर परिषद अधिकारी इस राशि को पीडब्ल्यूडी को सौंपने की तैयारियां कर रहे हैं।
यूं करवाने की थी स्मारक निर्माण की प्लानिंग
पीडब्ल्यूडी के बाद जो नगर परिषद अधिकारियों ने स्मारक निर्माण की प्लानिंग की थी उसके तहत यहां पार्क, मीटिंग हॉल, लाइब्रेरी सहित स्मारक भी बनवाना था। हालांकि इस प्रोजेक्ट की ड्राइंग पर समय -समय पर आबजेक्शन लगते रहे हैं। जिनको अमर उजाला ने 12 जनवरी 2016 और 10 दिसंबर 2016 सहित अन्य संस्करणों में प्रमुखता से उठाया था।
कब-कब हुआ प्रोजेक्ट ट्रांसफर, क्यों लगे ऑब्जेक्शन
सरकार के आदेशों पर सबसे पहले पीडब्ल्यूडी ने सदर थाना के बैक साइड खाड़ी वाली जगह पर 2.07 करोड़ की अनुमानित लागत की ड्राइंग तैयार की थी। इसके बाद इस ड्राइंग में फेरबदल करने का तर्क देते हुए यह प्रोजेक्ट नगर परिषद को सौंपा गया। इसके बाद नगर परिषद ने करीब सात करोड़ की अनुमानित राशि की ड्राइंग तैयार कर सरकार को भेजी थी। इस बार ड्राइंग पर लागत राशि ज्यादा होने के चलते इस पर ऑब्जेशन लगा दिया गया और नप ने इसकी ड्राइंग तीसरी दफा तैयार कर चीफ आर्किटेक्ट को भेज दी थी। इसके बाद से ही यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा था।
वर्जन::
हमारे पास इस संबंध में उच्चाधिकारियों का पत्र आ चुका है। अब स्वर्गीय हुक्म सिंह स्मारक का निर्माण पीडब्ल्यूडी कराएगी। हमारे खाते में आए करीब 2.37 करोड़ की राशि जल्द ही पीडब्ल्यूडी को सौंप देंगे। - संजय यादव, सचिव नगर परिषद
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
पूर्व सीएम स्वर्गीय मास्टर हुक्म सिंह की स्मृति में बनाए जाने वाले स्मारक का निर्माण पीडब्ल्यूडी और नगर परिषद को फाइल ट्रांसफर करने तक ही सिमटता नजर आ रहा है। अब सरकार ने इस स्मारक का निर्माण नगर परिषद की बजाय पीडब्ल्यूडी से कराने के आदेश जारी किए हैं। बाकायदा नगर परिषद और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भी मिल चुके हैं। इन दोनों विभागों के बीच स्मारक निर्माण को लेकर ट्रांसफर का खेल बीते तीन सालों से चल रहा है। सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा तीन साल पहले स्मारक निर्माण की घोषणा करने के बावजूद अब तक जिला प्रशासन धरातल पर काम शुरू नहीं करवा पाया है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जल्द ही सीएम मनोहर लाल खट्टर अपनी घोषणाओं की रिव्यू मीटिंग लेने के लिए दादरी पहुंच सकते हैं। फिलहाल उनके दादरी आने की तारीख निर्धारित नहीं हुई है। ऐसे में सीएम के सामने तीन सालों से इस मामले में चल रही ढिलाई का मसला उठा तो अधिकारियों पर गाज तक गिर सकती है।
सूबे की बागडोर संभाल चुके चरखी दादरी निवासी मास्टर हुक्म सिंह का देहांत 27 फरवरी 2015 को हुआ था। उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने खुद प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल खट्टर पहुंचे थे। उन्होंने पूर्व सीएम हुक्म सिंह की स्मृति में शहर में एक स्मारक का निर्माण कराने की घोषणा की थी। इस घोषणा पर ढाई साल बीतने के बावजूद धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया। सबसे पहले पीडब्ल्यूडी विभाग को इसके निर्माण की जिम्मेवारी सौंपी गई थी लेकिन किन्हीं कारणों से इस प्रोजेक्ट को बाद में नगर परिषद को सौंप दिया गया। नगर परिषद के अधिकारियों ने दिसंबर 2016 तक तीन इस्टीमेट तैयार कर हेड ऑफिस भेजे थे लेकिन किसी न किसी कारण से हर बार इन पर ऑब्जेक्शन लगाया गया। कभी इस्टीमेट कम होने का कारण बताया गया तो कभी इस्टीमेट में और इजाफा करने के निर्देश दिए गए। गत मार्च माह में तो शहर के इकलौते रोज गार्डन का नाम बदलकर ही यह घोषणा पूरी करने का प्रयास किया गया। इस पर जोरदार विरोध हुआ तो सरकार ने स्मारक का निर्माण कराने के निर्देश भी नगर परिषद को जारी कर दिए। इन आदेशों को करीब छह-सात माह का समय हो चुका है लेकिन अब तक धरातल पर काम शुरू नहीं किया गया। 20 सितंबर को शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय से नगर परिषद को पत्र क्रमांक 9875 जारी हुआ है, इसमें अब स्मारक निर्माण का कार्य पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं। यह पत्र प्राप्त होने के बाद नगर परिषद के अधिकारियों ने बीते करीब छह माह पहले खाते में आए बजट को पीडब्लयूडी को सौंपने की तैयारियां कर ली है। इस सप्ताह यह राशि भी फाइल के साथ-साथ पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर की जा सकती है। ऐसे में अभी तो दूर-दूर तक इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होता नजर नहीं आ रहा। वहीं, प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो स्वर्गीय मास्टर हुक्म सिंह के परिजन भी इस स्मारक का निर्माण पीडब्ल्यूडी से कराने की इच्छा भी जिला उपायुक्त के सामने जाहिर कर चुके हैं।
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रोज गार्डन में हुक्म सिंह पार्क का बोर्ड लगाने पर हुआ था बवाल
सीएम मनोहर लाल की घोषणा के तहत स्मारक निर्माण की बजाय नगर परिषद ने गत 9 मार्च को शहर के रोज गार्डन में ही हुक्म सिंह पार्क का बोर्ड लगा दिया था। इस बोर्ड का आगे न तो कहीं स्वर्गीय लिखा गया और न ही पूर्व सीएम। नगर परिषद की इस बेरुखी के साथ-साथ सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना भी हुई थी। अमर उजाला ने 10 मार्च के संस्करण में ‘पार्क बना नहीं, रोज गार्डन बन गया हुक्म सिंह पार्क’ नामक शीर्षक से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। राजनीतिक दलों की आलोचना के बाद सरकार ने नगर परिषद को पूर्व सीएम के स्मारक निर्माण के आदेश जारी कर राशि भी खाते में डाल दी थी।
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नप के खाते में छह माह पड़ी रही 2.37 करोड़ की राशि
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने रोज गार्डन का नाम बदलने का कड़ा विरोध किया था। कांग्रेस ने रोज गार्डन के बाहर धरना थी दिया था लेकिन उस समय जाट आंदोलन के चलते यह धरना एक दिन में ही सिमट कर रह गया था। वहीं, सरकार ने अपनी चूक सुधारने की मंशा से नगर परिषद के खाते में 2.37 करोड़ की राशि भी डाली थी जोकि करीब छह माह तक नप के खाते में पड़ी रही। अब नगर परिषद अधिकारी इस राशि को पीडब्ल्यूडी को सौंपने की तैयारियां कर रहे हैं।
यूं करवाने की थी स्मारक निर्माण की प्लानिंग
पीडब्ल्यूडी के बाद जो नगर परिषद अधिकारियों ने स्मारक निर्माण की प्लानिंग की थी उसके तहत यहां पार्क, मीटिंग हॉल, लाइब्रेरी सहित स्मारक भी बनवाना था। हालांकि इस प्रोजेक्ट की ड्राइंग पर समय -समय पर आबजेक्शन लगते रहे हैं। जिनको अमर उजाला ने 12 जनवरी 2016 और 10 दिसंबर 2016 सहित अन्य संस्करणों में प्रमुखता से उठाया था।
कब-कब हुआ प्रोजेक्ट ट्रांसफर, क्यों लगे ऑब्जेक्शन
सरकार के आदेशों पर सबसे पहले पीडब्ल्यूडी ने सदर थाना के बैक साइड खाड़ी वाली जगह पर 2.07 करोड़ की अनुमानित लागत की ड्राइंग तैयार की थी। इसके बाद इस ड्राइंग में फेरबदल करने का तर्क देते हुए यह प्रोजेक्ट नगर परिषद को सौंपा गया। इसके बाद नगर परिषद ने करीब सात करोड़ की अनुमानित राशि की ड्राइंग तैयार कर सरकार को भेजी थी। इस बार ड्राइंग पर लागत राशि ज्यादा होने के चलते इस पर ऑब्जेशन लगा दिया गया और नप ने इसकी ड्राइंग तीसरी दफा तैयार कर चीफ आर्किटेक्ट को भेज दी थी। इसके बाद से ही यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा था।
वर्जन::
हमारे पास इस संबंध में उच्चाधिकारियों का पत्र आ चुका है। अब स्वर्गीय हुक्म सिंह स्मारक का निर्माण पीडब्ल्यूडी कराएगी। हमारे खाते में आए करीब 2.37 करोड़ की राशि जल्द ही पीडब्ल्यूडी को सौंप देंगे। - संजय यादव, सचिव नगर परिषद