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पर्युषण पर्व का क्षमा दिवस के साथ हुआ समापन
Updated Mon, 28 Aug 2017 01:00 AM IST
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क्षमा दिवस के साथ पर्युषण पर्व का समापन
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
जैन समाज के आठ दिवसीय पर्युषण पर्व का रविवार को क्षमा दिवस के साथ समापन हो गया। जैन समाज प्रवक्ता धीरज जैन ने बताया कि रविवार को अंतिम दिन क्षमा दिवस पर जैन समाज के लोग एक- दूसरे से गले मिले। इस दौरान अहिंसा अपनाने और शांति की कामना की गई। इस दौरान भंडारे का भी आयोजन किया गया।
धीरज जैन ने बताया कि मानव जीवन में गलतियां होती रहती हैं, लेकिन सबसे बड़ा वही है जो क्षमा के भाव को धारण कर घृणा, द्वेष व क्रोध पर नियंत्रण करते हुए दूसरों को माफ कर देता है। शास्त्रों में कहा भी गया है कि क्षमा तो वीरों का सबसे बड़ा आभूषण है। किसी भी गलती पर किसी को सजा देने की जगह उसे माफ करते हुए सुधरने का अवसर अवश्य ही प्रदान करना चाहिए। युवाओं को अहिंसा परमों धर्म के मार्ग का अनुसरण करते हुए क्षमा भाव को अपने जीवन में शामिल कर लेना चाहिए। इस दौरान आयोजित सह भोज में जैन समाज व आसपास के श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
जैन समाज के आठ दिवसीय पर्युषण पर्व का रविवार को क्षमा दिवस के साथ समापन हो गया। जैन समाज प्रवक्ता धीरज जैन ने बताया कि रविवार को अंतिम दिन क्षमा दिवस पर जैन समाज के लोग एक- दूसरे से गले मिले। इस दौरान अहिंसा अपनाने और शांति की कामना की गई। इस दौरान भंडारे का भी आयोजन किया गया।
धीरज जैन ने बताया कि मानव जीवन में गलतियां होती रहती हैं, लेकिन सबसे बड़ा वही है जो क्षमा के भाव को धारण कर घृणा, द्वेष व क्रोध पर नियंत्रण करते हुए दूसरों को माफ कर देता है। शास्त्रों में कहा भी गया है कि क्षमा तो वीरों का सबसे बड़ा आभूषण है। किसी भी गलती पर किसी को सजा देने की जगह उसे माफ करते हुए सुधरने का अवसर अवश्य ही प्रदान करना चाहिए। युवाओं को अहिंसा परमों धर्म के मार्ग का अनुसरण करते हुए क्षमा भाव को अपने जीवन में शामिल कर लेना चाहिए। इस दौरान आयोजित सह भोज में जैन समाज व आसपास के श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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