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आईएएस के लक्ष्य के लिए सुधीर ने नहीं ज्वायन की चार सरकारी नौकरी
Updated Sun, 29 Apr 2018 01:32 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
सेक्टर-6 बहादुरगढ़ के निवासी सुधीर गहलावत ने यूपीएससी परीक्षा-2017 में प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुधीर व उनके परिजनों को बधाई देने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। सुधीर ने अपने लक्ष्य को पाने के लिए चार सरकारी नौकरियां ज्वाइन नहीं की थी। मूलत: सोनीपत के गांव रिढ़ाऊ के सुधीर बहादुरगढ़ के सेक्टर-6 में रहते हैं। पिता जसमेर सिंह दिल्ली पुलिस में और मां कुशल गृहिणी हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे सुधीर के आईएएस में जाने की खबर से उल्लास का माहौल है।
सुधीर ने प्राथमिक शिक्षा सैनिक स्कूल से और 12वीं की बहादुरगढ़ के बाल भारती स्कूल से उत्तीर्ण की थी। दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से 2014 में बीएससी फिजिक्स (ऑनर्स) से की। अब वह आईएएस बनकर देश के विकास में अपना योगदान देना चाहता है। विज्ञान से स्नातक सुधीर ने समाज शास्त्र के साथ दो बार परीक्षा दी। पहले प्रयास में साक्षात्कार में मात खा गए। फिर दिल्ली से पांच महीने कोचिंग ली। घर में ही रोजाना 10-12 घंटे पढ़ाई की।
संयुक्त परिवार बना ताकत
सुधीर का कहना है कि हम संयुक्त परिवार में रहते हैं। दादी होशियारी देवी, मां सुनीता, पिता जसमेर, चाचा आनंद, चाची स्नेहलता, चचेरे बहन-भाई हर्ष, वैशाली और बहन नीतिका और भाई शेखर से परिवार में 10 का दम है। सुधीर की डेंटिस्ट बहन डॉ. नीतिका ने बताया कि वह आठ से दस घंटे रोजाना पढ़ाई करता था। बड़े भाई शेखर ने बीटेक की है।
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मोबाइल से दूरी बना पाई 42वीं रैंक
सुधीर का कहना है कि मेरा टॉप 100 में आने का सपना था, लेकिन अब टॉप 50 में अपना नाम देखकर भी खुशी है। आज का युवा मोबाइल रोग से ग्रस्त है। मैंने इससे निरंतर दूरी बनाकर रखी और आज परिणाम सबके सामने है। इससे पहले प्रतियोगी परीक्षाओं में चार बार सफल हुआ, लेकिन लक्ष्य आईएएस बनने का था, इसलिए चारों में से कोई भी जॉब ज्वाइन नहीं की।
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बहादुरगढ़।
सेक्टर-6 बहादुरगढ़ के निवासी सुधीर गहलावत ने यूपीएससी परीक्षा-2017 में प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुधीर व उनके परिजनों को बधाई देने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। सुधीर ने अपने लक्ष्य को पाने के लिए चार सरकारी नौकरियां ज्वाइन नहीं की थी। मूलत: सोनीपत के गांव रिढ़ाऊ के सुधीर बहादुरगढ़ के सेक्टर-6 में रहते हैं। पिता जसमेर सिंह दिल्ली पुलिस में और मां कुशल गृहिणी हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे सुधीर के आईएएस में जाने की खबर से उल्लास का माहौल है।
सुधीर ने प्राथमिक शिक्षा सैनिक स्कूल से और 12वीं की बहादुरगढ़ के बाल भारती स्कूल से उत्तीर्ण की थी। दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से 2014 में बीएससी फिजिक्स (ऑनर्स) से की। अब वह आईएएस बनकर देश के विकास में अपना योगदान देना चाहता है। विज्ञान से स्नातक सुधीर ने समाज शास्त्र के साथ दो बार परीक्षा दी। पहले प्रयास में साक्षात्कार में मात खा गए। फिर दिल्ली से पांच महीने कोचिंग ली। घर में ही रोजाना 10-12 घंटे पढ़ाई की।
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संयुक्त परिवार बना ताकत
सुधीर का कहना है कि हम संयुक्त परिवार में रहते हैं। दादी होशियारी देवी, मां सुनीता, पिता जसमेर, चाचा आनंद, चाची स्नेहलता, चचेरे बहन-भाई हर्ष, वैशाली और बहन नीतिका और भाई शेखर से परिवार में 10 का दम है। सुधीर की डेंटिस्ट बहन डॉ. नीतिका ने बताया कि वह आठ से दस घंटे रोजाना पढ़ाई करता था। बड़े भाई शेखर ने बीटेक की है।
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मोबाइल से दूरी बना पाई 42वीं रैंक
सुधीर का कहना है कि मेरा टॉप 100 में आने का सपना था, लेकिन अब टॉप 50 में अपना नाम देखकर भी खुशी है। आज का युवा मोबाइल रोग से ग्रस्त है। मैंने इससे निरंतर दूरी बनाकर रखी और आज परिणाम सबके सामने है। इससे पहले प्रतियोगी परीक्षाओं में चार बार सफल हुआ, लेकिन लक्ष्य आईएएस बनने का था, इसलिए चारों में से कोई भी जॉब ज्वाइन नहीं की।