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मेट्रो का इंतजार हो सकता है लंबा, यार्ड की जमीन का अधिग्रहण रद्द
Updated Thu, 28 Sep 2017 01:11 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
मुंडका-बहादुरगढ़ रूट पर मेट्रो रेल चलने का इंतजार अब और लंबा हो सकता है। जी हां, सेक्टर-9 बाईपास के पास मेट्रो यार्ड के लिए ली गई जमीन का अधिग्रहण रद्द हो गया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जमीन को रिलीज किए जाने के बाद जहां भू-मालिकों ने खुशी जताई है, वहीं डीएमआरसी की परेशानी बढ़ गई है।
दरअसल, जमीन का अधिग्रहण दो कानूनों के तहत करने से ही ये हालात पैदा हुए हैं। सेक्टर-9 में बनने वाले मेट्रो यार्ड के लिए सेक्टर-9 बाईपास के पास 50 से अधिक दुकानदारों की करीब चार हजार गज जमीन का अधिग्रहण किया गया था। जमीन अधिग्रहण के लिए 30 दिसंबर 2013 को सेक्शन-4 लगाया गया। जबकि एक जनवरी 2014 से नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू हो गया था। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया नए कानून के तहत की गई, मगर मुआवजा पुराने कानून के तहत ही तय कर दिया। वर्ष 2016 में अवार्ड सुनाना गया। मुआवजा राशि कम होने के कारण 2016 में ही दुकानदारों ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
अधिग्रहण करना गलत : कोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बैंच में शामिल जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस गुरविंद्र सिंह गिल ने अधिग्रहण प्रक्रिया को चुनौती देने वाले मामले का बुधवार को निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट की डबल बैंच ने मामले का निपटारा करते हुए फैसला सुनाया कि जब नया अधिग्रहण अधिनियम लागू हो गया हो और ऐसे में पुराने अधिनियम के आधार पर जमीन का अधिग्रहण करना पूरी तरह गलत है।
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भगा दिए थे अधिकारी
वर्ष 2016 में जमीन का अवार्ड सुनाया गया था। अवार्ड का दुकानदारों ने विरोध किया था और अधिकारियों को मौके से भगा दिया था। दुकानदारों का आरोप था कि राजमार्ग के साथ लगती इस वाणिज्यिक जमीन का अधिग्रहण हुडा की ओर से खेतों के आधार पर 5847 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से किया गया, जबकि इस जमीन का मौजूदा सर्कल रेट उस समय 55 हजार 500 रुपये था। ऐसे में दुकानदार सर्कल रेट की मांग कर रहे थे, जबकि हुडा की ओर से दुकानदारों का विरोध किए जाने के बाद भी इसी रेट मुआवजा दिया जा रहा था। बाद में इसका कड़ा विरोध होता रहा और प्रशासन ने जमीन पर कब्जा भी ले लिया था। कई दुकानों को तुड़वाकर मेट्रो को जमीन का कब्जा भी सौंप दिया था लेकिन मेट्रो की ओर से यहां पर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया था।
...तो देर से बजेगी मेट्रो की सीटी
धीरे-धीरे सरक कर मेट्रो रेल चलने की डेडलाइन जून-2018 तक निर्धारित की गई थी। मगर अब यार्ड की जमीन का अधिग्रहण रद्द होने के बाद मेट्रो की सीटी बजने में और देरी हो सकती है। दरअसल, अब सरकार को नए सिरे से जमीन का अधिग्रहण करना पड़ सकता है और इस प्रक्रिया में लंबा समय लगेगा और यार्ड बनाने के लिए फिलहाल कोई दूसरा ऑप्शन है नहीं। अब कहीं हद मामला डीएमआरसी और दुकानदारों की आपसी बातचीत पर निर्भर है।
सरकार कर रही थी अन्याय, कोर्ट ने किया न्याय
मामले का निपटारा पक्ष में होने पर भू-मालिकों ने काफी खुशी जताई है। उन्हें करोड़ों रुपये का फायदा हुआ है। दीवाली से पहले ही बुधवार को उन्होंने मिठाई बांटकर अपनी दीवाली मनाई। भू-मालिक एडवोकेट आरबी यादव, दुकानदार श्यामलाल बंसल, भारत, वीके गुप्ता, बलजीत नांदल आदि का कहना है कि सरकार 55 हजार 500 रुपये के सर्कल रेट वाली जमीन को करीब छह हजार रुपये के रेट पर अधिग्रहण कर रही थी। उनके साथ सरकार तानाशाही रवैया अपनाते हुए अन्याय करने पर तुली थी। उन्होंने कोर्ट की शरण ली तो सच्चाई की जीत हुई।
करेंगे सहयोग, पर सीधे बात करे डीएमआरसी
दुकानदार आरबी यादव ने कहा कि कोई भी दुकानदार मेट्रो परियोजना में बाधा नहीं बनना चाहता। केस इसलिए डाला था क्योंकि सरकार ने उनके साथ गलत किया था। उन्हें डीएमआरसी से कोई शिकवा नहीं। डीएमआरसी अधिकारी यदि सीधे-सीधे उनसे बात करेंगे तो वे जमीन दे सकते हैं। बशर्तें जमीन का अधिग्रहण वर्तमान रेट के हिसाब से होगा। फिलहाल रेट दो लाख रुपये गज है।
एक और केस करेंगे
दुकानदारों ने कहा कि जमीन का कब्जा लेने के लिए उनकी दुकानों में तोड़-फोड़ की गई थी। इससे उन्हें काफी नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई का मुआवजा मांगा जाएगा। यदि मुआवजा नहीं मिला तो मेट्रो पर केस करेंगे।
मामला डिस्पॉज ऑफ : शर्मा
पीड़ित दुकानदारों के वकील एमएल शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट ने पूरे मामले को डिस्पॉज ऑफ कर दिया है। कोर्ट ने अधिग्रहण प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए इस मामले को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने मामले को खत्म करने का आधार नया अधिग्रहण अधिनियम आने के बाद भी पुराने अधिग्रहण अधिनियम के तहत दुकानदारों को नोटिस देने को बनाया है।
प्रति नहीं आई : राठी
इस बारे में जब हुडा के संपदा अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला हाईकोर्ट ने डिस्पॉज ऑफ किया है। इस बारे उनके पास कोई प्रति नहीं आई है। प्रति आने के बाद ही कुछ कह पाएंगे।
- पक्ष में फैसला आने से दुकानदार खुश, डीएमआरसी की टेंशन बढ़ी
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बहादुरगढ़।
मुंडका-बहादुरगढ़ रूट पर मेट्रो रेल चलने का इंतजार अब और लंबा हो सकता है। जी हां, सेक्टर-9 बाईपास के पास मेट्रो यार्ड के लिए ली गई जमीन का अधिग्रहण रद्द हो गया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जमीन को रिलीज किए जाने के बाद जहां भू-मालिकों ने खुशी जताई है, वहीं डीएमआरसी की परेशानी बढ़ गई है।
दरअसल, जमीन का अधिग्रहण दो कानूनों के तहत करने से ही ये हालात पैदा हुए हैं। सेक्टर-9 में बनने वाले मेट्रो यार्ड के लिए सेक्टर-9 बाईपास के पास 50 से अधिक दुकानदारों की करीब चार हजार गज जमीन का अधिग्रहण किया गया था। जमीन अधिग्रहण के लिए 30 दिसंबर 2013 को सेक्शन-4 लगाया गया। जबकि एक जनवरी 2014 से नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू हो गया था। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया नए कानून के तहत की गई, मगर मुआवजा पुराने कानून के तहत ही तय कर दिया। वर्ष 2016 में अवार्ड सुनाना गया। मुआवजा राशि कम होने के कारण 2016 में ही दुकानदारों ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
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अधिग्रहण करना गलत : कोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बैंच में शामिल जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस गुरविंद्र सिंह गिल ने अधिग्रहण प्रक्रिया को चुनौती देने वाले मामले का बुधवार को निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट की डबल बैंच ने मामले का निपटारा करते हुए फैसला सुनाया कि जब नया अधिग्रहण अधिनियम लागू हो गया हो और ऐसे में पुराने अधिनियम के आधार पर जमीन का अधिग्रहण करना पूरी तरह गलत है।
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भगा दिए थे अधिकारी
वर्ष 2016 में जमीन का अवार्ड सुनाया गया था। अवार्ड का दुकानदारों ने विरोध किया था और अधिकारियों को मौके से भगा दिया था। दुकानदारों का आरोप था कि राजमार्ग के साथ लगती इस वाणिज्यिक जमीन का अधिग्रहण हुडा की ओर से खेतों के आधार पर 5847 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से किया गया, जबकि इस जमीन का मौजूदा सर्कल रेट उस समय 55 हजार 500 रुपये था। ऐसे में दुकानदार सर्कल रेट की मांग कर रहे थे, जबकि हुडा की ओर से दुकानदारों का विरोध किए जाने के बाद भी इसी रेट मुआवजा दिया जा रहा था। बाद में इसका कड़ा विरोध होता रहा और प्रशासन ने जमीन पर कब्जा भी ले लिया था। कई दुकानों को तुड़वाकर मेट्रो को जमीन का कब्जा भी सौंप दिया था लेकिन मेट्रो की ओर से यहां पर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया था।
...तो देर से बजेगी मेट्रो की सीटी
धीरे-धीरे सरक कर मेट्रो रेल चलने की डेडलाइन जून-2018 तक निर्धारित की गई थी। मगर अब यार्ड की जमीन का अधिग्रहण रद्द होने के बाद मेट्रो की सीटी बजने में और देरी हो सकती है। दरअसल, अब सरकार को नए सिरे से जमीन का अधिग्रहण करना पड़ सकता है और इस प्रक्रिया में लंबा समय लगेगा और यार्ड बनाने के लिए फिलहाल कोई दूसरा ऑप्शन है नहीं। अब कहीं हद मामला डीएमआरसी और दुकानदारों की आपसी बातचीत पर निर्भर है।
सरकार कर रही थी अन्याय, कोर्ट ने किया न्याय
मामले का निपटारा पक्ष में होने पर भू-मालिकों ने काफी खुशी जताई है। उन्हें करोड़ों रुपये का फायदा हुआ है। दीवाली से पहले ही बुधवार को उन्होंने मिठाई बांटकर अपनी दीवाली मनाई। भू-मालिक एडवोकेट आरबी यादव, दुकानदार श्यामलाल बंसल, भारत, वीके गुप्ता, बलजीत नांदल आदि का कहना है कि सरकार 55 हजार 500 रुपये के सर्कल रेट वाली जमीन को करीब छह हजार रुपये के रेट पर अधिग्रहण कर रही थी। उनके साथ सरकार तानाशाही रवैया अपनाते हुए अन्याय करने पर तुली थी। उन्होंने कोर्ट की शरण ली तो सच्चाई की जीत हुई।
करेंगे सहयोग, पर सीधे बात करे डीएमआरसी
दुकानदार आरबी यादव ने कहा कि कोई भी दुकानदार मेट्रो परियोजना में बाधा नहीं बनना चाहता। केस इसलिए डाला था क्योंकि सरकार ने उनके साथ गलत किया था। उन्हें डीएमआरसी से कोई शिकवा नहीं। डीएमआरसी अधिकारी यदि सीधे-सीधे उनसे बात करेंगे तो वे जमीन दे सकते हैं। बशर्तें जमीन का अधिग्रहण वर्तमान रेट के हिसाब से होगा। फिलहाल रेट दो लाख रुपये गज है।
एक और केस करेंगे
दुकानदारों ने कहा कि जमीन का कब्जा लेने के लिए उनकी दुकानों में तोड़-फोड़ की गई थी। इससे उन्हें काफी नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई का मुआवजा मांगा जाएगा। यदि मुआवजा नहीं मिला तो मेट्रो पर केस करेंगे।
मामला डिस्पॉज ऑफ : शर्मा
पीड़ित दुकानदारों के वकील एमएल शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट ने पूरे मामले को डिस्पॉज ऑफ कर दिया है। कोर्ट ने अधिग्रहण प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए इस मामले को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने मामले को खत्म करने का आधार नया अधिग्रहण अधिनियम आने के बाद भी पुराने अधिग्रहण अधिनियम के तहत दुकानदारों को नोटिस देने को बनाया है।
प्रति नहीं आई : राठी
इस बारे में जब हुडा के संपदा अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला हाईकोर्ट ने डिस्पॉज ऑफ किया है। इस बारे उनके पास कोई प्रति नहीं आई है। प्रति आने के बाद ही कुछ कह पाएंगे।
- पक्ष में फैसला आने से दुकानदार खुश, डीएमआरसी की टेंशन बढ़ी