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मां के जैसी है कामधेनु : सपना
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झज्जर। गोकुल धाम गोसेवा महातीर्थ में चार साल से कामधेनु गाय आकर्षण का केंद्र बनी है। पौराणिक कथाओं में वर्णित मनोकामना पूर्ण करने वाली इस कामधेनु ने अब एक दिव्य बछिया को जन्म दिया है। कामधेनु रूप में इस गाय को गोकुल धाम में अधिष्ठात्री का दर्जा दिया गया है। बछिया के जन्म के बाद गोकुल धाम परिवार में खुशी की लहर है। गोकुल धाम की इस अधिष्ठात्री के मां बनने पर न केवल यहां के लोगों में खुशी है बल्कि वर्ल्ड फेम बन चुकी हरियाणवी डांसर व सिंगर सपना चौधरी की भी खुशी का ठिकाना नहीं है। सपना ने झज्जर पहुंचकर कामधेनु गो माता के दर्शन किए और उसे दुलार किया। सपना चौधरी परिवार के साथ झज्जर पहुंची और कामधेनु गोमाता को चारा खिलाकर पुण्य कमाया। इस मौके पर सपना चौधरी ने कहा कि कामधेनु के साथ समय बिताना ऐसा लगता है, जैसे वह अपनी सगी मां के साथ बैठकर बातें करती है। सपना चौधरी ने कहा कि अब खुद इस गाय माता ने जब एक दिव्य बछिया को जन्म दिया है तो इससे बढ़कर खुशी गोभक्तों को नहीं हो सकती।
2013 से संचालित है गोकुल धाम
बता दें कि वर्ष 2013 से गुरुग्राम रोड पर दादरी तोए के पास गोकुल धाम गोसेवा महातीर्थ संचालित किया जा रहा है। इसकी एक शाखा गुरुग्राम रोड झज्जर बाईपास पर बनी है। चार साल पहले कामधेनु गौ का अवतार यही गोकुल धाम में हुआ था। हर साल कामधेनु गो का जन्मोत्सव हवन यज्ञ और हलवे का केक काटकर मनाया जाता है। कामधेनु गाय दुर्लभ होती है और यह पूरे भारत में और कहीं नहीं है। अब कामधेनु गो मां की बेटी को देखने के लिए गोकुल धाम में गोप्रेमी पहुंच रहे हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ था तब 14 रत्न जो समुद्र में से निकले थे उनमें एक रत्न कामधेनु गाय भी थी। जिसे कामधेनु इसलिए भी कहा जाता है कि जहां भी इस गाय का वास होता है वहां कभी भी किसी चीज की कोई कमी नहीं आती है।
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2013 से संचालित है गोकुल धाम
बता दें कि वर्ष 2013 से गुरुग्राम रोड पर दादरी तोए के पास गोकुल धाम गोसेवा महातीर्थ संचालित किया जा रहा है। इसकी एक शाखा गुरुग्राम रोड झज्जर बाईपास पर बनी है। चार साल पहले कामधेनु गौ का अवतार यही गोकुल धाम में हुआ था। हर साल कामधेनु गो का जन्मोत्सव हवन यज्ञ और हलवे का केक काटकर मनाया जाता है। कामधेनु गाय दुर्लभ होती है और यह पूरे भारत में और कहीं नहीं है। अब कामधेनु गो मां की बेटी को देखने के लिए गोकुल धाम में गोप्रेमी पहुंच रहे हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ था तब 14 रत्न जो समुद्र में से निकले थे उनमें एक रत्न कामधेनु गाय भी थी। जिसे कामधेनु इसलिए भी कहा जाता है कि जहां भी इस गाय का वास होता है वहां कभी भी किसी चीज की कोई कमी नहीं आती है।
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