{"_id":"5c3e32aebdec22735741405c","slug":"11547580078-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला बनने के बाद पहली बार शुरू हुआ प्रॉपर्टी सर्वे, पांच हजार तक बढ़ेगी टैक्स अदा करने वाली इकाईयों की संख्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला बनने के बाद पहली बार शुरू हुआ प्रॉपर्टी सर्वे, पांच हजार तक बढ़ेगी टैक्स अदा करने वाली इकाईयों की संख्या
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जिला मुख्यालय का दर्जा मिलने के 25 माह बाद शहर में पहली बार नगर परिषद ने प्रॉपर्टी सर्वे शुरू करवा दिया है। यह सर्वे मैनुअली कराया जा रहा है जोकि मार्च तक पूरा होगा। इसके बाद प्रॉपर्टी टैक्स अदा करने वाली इकाईयों की संख्या पांच हजार तक बढ़ने की संभावना है। इससे जहां नगर परिषद की आय बढ़ेगी तो वहीं शहर के बढ़े दायरे का रिकॉर्ड भी कागजों में चढ़ जाएगा। पिछले सर्वे के रिकॉर्ड में हुई चूक को भी आमजन इस सर्वे में दुरुस्त करवा सकता है। इससे पहले ड्रोन से सर्वे हो चुका है।
इसकी पुष्टि चेयरमैन संजय छपारिया और ईओ विजयपाल गत 10 जनवरी को सदन की बैठक में कर चुके हैं। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया था कि प्रॉपर्टी टैक्स संबंधी जितने भी विवादास्पद केस हैं वो सभी सर्वे के बाद सुलझ जाएंगे।
सर्वे करने भिवानी से एक टीम दादरी भेजी गई है। गत सोमवार से ही टीम ने शहर की प्रॉपर्टी इकाईयों का सर्वे शुरू कर दिया है। इसकी शुरूआत घिकाड़ा रोड से की गई है। नप सूत्रों की मानें तो फरवरी माह के अंत तक या मार्च के पहले सप्ताह तक सर्वे पूरा हो जाएगा। आमजन भी सर्वे के दौरान जमीन की मौजूदा स्थिति के मुताबिक नप के रिकॉर्ड में फेरबदल करवा सकेगा। शहर में 100 से अधिक केस ऐसे भी हैं जिनकी प्रॉपर्टी तो रेजीडेंशियल कैटेगरी में प्रयोग हो रही है जबकि टैक्स कॉमर्शियल कैटेगरी के तहत भेजा जा रहा है। पांच साल के लंबे इंतजार के बाद ऐसे परिवारों को सर्वे कार्य पूरा होने के बाद राहत मिलेगी।
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इस समय नगर परिषद शहर में फैमिली यूनिक आईडी बनाने के लिए भी सर्वे कर रही है। इसके तहत टीमें डाटा जुटाने में लगी हैं। सर्वे के बाद प्रॉपर्टी का ब्योरा ऑनलाइन देख सकेंगे।
अभी 22 हजार इकाईयां टैक्स के दायरे में
शहर में इस समय 22 हजार इकाईयां प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में शामिल हैं। इन्हें चार श्रेणी में बांटा गया है। कॉमर्शियल श्रेणी में करीब छह हजार इकाईयां हैं जबकि रेजीडेंशियल में 13500 इकाईयां हैं। संस्थान श्रेणी में 300 इकाईयां हैं। 2011-12 के आंकड़ों के मुताबिक शहर में करीब 40 सरकारी इमारतें
सर्वे के बाद ये होंगे फायदे
- हर मकान, गली व मोहल्ले को नंबर अलॉट होगा।
- हर परिवार को सर्वे के बाद मिलेगी यूनिक आईडी।
- आमजन व नप का प्रॉपर्टी डाटा हो जाएगा अपडेट।
- नप कर पाएगी बकाया प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली।
आमजन पर 40 लाख तो सरकारी विभागों पर दो करोड़ टैक्स बकाया
प्रॉपर्टी टैक्स भरने में आमजन ही नहीं सरकारी विभाग भी लापरवाह हैं। शहरवासियों पर 40 लाख का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है जबकि सरकारी विभागों पर दो करोड़ का टैक्स बकाया है। वहीं, शहर की अलग-अलग संस्थाओं पर करीब 90 लाख का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है।
वर्जन::
ड्रोन से तस्वीर लेने के बाद मैनुअली भी प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे शहर में शुरू हो चुका है। टीमें शहर के वार्डों में जाकर डाटा जुटा रही हैं। सर्वे के बाद प्रॉपर्टी इकाईयों की संख्या 22 से बढ़कर 27 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है। आमजन से अपील है कि वे दुरुस्त रिकॉर्ड नोट कराएं ताकि सही रिकॉर्ड मेनटेन हो सके।
संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद
इसकी पुष्टि चेयरमैन संजय छपारिया और ईओ विजयपाल गत 10 जनवरी को सदन की बैठक में कर चुके हैं। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया था कि प्रॉपर्टी टैक्स संबंधी जितने भी विवादास्पद केस हैं वो सभी सर्वे के बाद सुलझ जाएंगे।
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सर्वे करने भिवानी से एक टीम दादरी भेजी गई है। गत सोमवार से ही टीम ने शहर की प्रॉपर्टी इकाईयों का सर्वे शुरू कर दिया है। इसकी शुरूआत घिकाड़ा रोड से की गई है। नप सूत्रों की मानें तो फरवरी माह के अंत तक या मार्च के पहले सप्ताह तक सर्वे पूरा हो जाएगा। आमजन भी सर्वे के दौरान जमीन की मौजूदा स्थिति के मुताबिक नप के रिकॉर्ड में फेरबदल करवा सकेगा। शहर में 100 से अधिक केस ऐसे भी हैं जिनकी प्रॉपर्टी तो रेजीडेंशियल कैटेगरी में प्रयोग हो रही है जबकि टैक्स कॉमर्शियल कैटेगरी के तहत भेजा जा रहा है। पांच साल के लंबे इंतजार के बाद ऐसे परिवारों को सर्वे कार्य पूरा होने के बाद राहत मिलेगी।
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इस समय नगर परिषद शहर में फैमिली यूनिक आईडी बनाने के लिए भी सर्वे कर रही है। इसके तहत टीमें डाटा जुटाने में लगी हैं। सर्वे के बाद प्रॉपर्टी का ब्योरा ऑनलाइन देख सकेंगे।
अभी 22 हजार इकाईयां टैक्स के दायरे में
शहर में इस समय 22 हजार इकाईयां प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में शामिल हैं। इन्हें चार श्रेणी में बांटा गया है। कॉमर्शियल श्रेणी में करीब छह हजार इकाईयां हैं जबकि रेजीडेंशियल में 13500 इकाईयां हैं। संस्थान श्रेणी में 300 इकाईयां हैं। 2011-12 के आंकड़ों के मुताबिक शहर में करीब 40 सरकारी इमारतें
सर्वे के बाद ये होंगे फायदे
- हर मकान, गली व मोहल्ले को नंबर अलॉट होगा।
- हर परिवार को सर्वे के बाद मिलेगी यूनिक आईडी।
- आमजन व नप का प्रॉपर्टी डाटा हो जाएगा अपडेट।
- नप कर पाएगी बकाया प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली।
आमजन पर 40 लाख तो सरकारी विभागों पर दो करोड़ टैक्स बकाया
प्रॉपर्टी टैक्स भरने में आमजन ही नहीं सरकारी विभाग भी लापरवाह हैं। शहरवासियों पर 40 लाख का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है जबकि सरकारी विभागों पर दो करोड़ का टैक्स बकाया है। वहीं, शहर की अलग-अलग संस्थाओं पर करीब 90 लाख का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है।
वर्जन::
ड्रोन से तस्वीर लेने के बाद मैनुअली भी प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे शहर में शुरू हो चुका है। टीमें शहर के वार्डों में जाकर डाटा जुटा रही हैं। सर्वे के बाद प्रॉपर्टी इकाईयों की संख्या 22 से बढ़कर 27 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है। आमजन से अपील है कि वे दुरुस्त रिकॉर्ड नोट कराएं ताकि सही रिकॉर्ड मेनटेन हो सके।
संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद