{"_id":"5c195360bdec2256f3219687","slug":"11545163616-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रात तो दूर दिन में भी नहीं चलती बेरी-बहादुरगढ़ रूट पर रोडवेज की बसें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रात तो दूर दिन में भी नहीं चलती बेरी-बहादुरगढ़ रूट पर रोडवेज की बसें
विज्ञापन
विज्ञापन
बहादुरगढ़। बेरी-बहादुरगढ़ रूट पर रोडवेज की सेवाएं ठप पड़ी हैं। रात तो दूर इस रूट पर दिन के समय भी रोडवेज की बसें नहीं चल रहीं। बसें न चलने के कारण इस रूट पर पड़ने वाले सात गांवों के यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोग सर्दी के इस मौसम में निजी बसों की छत पर बैठकर सफर करने को मजबूर हैं। लोगों ने परिवहन निगम से रूट पर रोडवेज बसों का संचालन करने की मांग की है।
अक्तूबर माह के मध्य में शुरू हुई रोडवेज की हड़ताल के बाद इस रूट पर सेवा प्रभावित हो गई थी। हड़ताल खत्म होने के कुछेक दिन बाद बस चली जरूर, लेकिन जब सरकार की ओर से ओवर टाइम खत्म किया गया तो रूट पर रात्रि बस सेवा समाप्त हो गई। इसी दौरान दिन के समय भी रूट पर चलने वाली तीनों रोडवेज बस की सेवाएं वापस ले ली गई। इसका असर सराय, टांडाहेड़ी, मांडोठी, मातन, छारा, महराणा आदि गांवों के लोगों पर पड़ा। पिछले करीब एक-डेढ़ महीने से इन गांवों के लोग बेहद परेशान हैं। इन गांवों के काफी लोग बहादुरगढ़ व बेरी कामकाज के सिलसिले में आते-जाते हैं। रोडवेज बस न चलने से इन लोगों को निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। महराणा गांव के निवासी नीरज ने कहा है कि वह पीडीएम कॉलेज में पढ़ता है। जब से इस रूट पर रोडवेज की बस चलनी बंद हुई हैं तब से बेहद दिक्कत हो रही है। वे लोग निजी बस में चढ़ तो जाते हैं, लेकिन सफर करना मुश्किल हो जाता है। 30 मिनट का सफर एक घंटे में पूरा होता है। निजी बस खचाखच भरकर चलती है, कई बार तो उन्हें बस की छत पर चढ़कर व खिड़कियों पर लटककर सफर करना पड़ता है। इस संबंध में उसने दो बार परिवहन निगम के कार्यालय में ईमेल के जरिये शिकायत भेजी थी, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया। परिवहन निगम इस ओर ध्यान दे और बस सेवा शुरू करे ताकि लोगों को राहत मिल सके।
एसएस से करेंगे बात : डीआई
इस संबंध में उनके पास लिखित में कोई शिकायत या मांगपत्र नहीं आया है। टाइम टेबल सेट नहीं है, इसलिए यह दिक्कत हो रही है। वह बुधवार को इस संबंध में एसएस से बात करेंगे। हालांकि वाया सांपला होकर उनकी बसें बेरी जा रही हैं।
विज्ञापन
-जगबीर, डीआई, बहादुरगढ़ बस अड्डा
अक्तूबर माह के मध्य में शुरू हुई रोडवेज की हड़ताल के बाद इस रूट पर सेवा प्रभावित हो गई थी। हड़ताल खत्म होने के कुछेक दिन बाद बस चली जरूर, लेकिन जब सरकार की ओर से ओवर टाइम खत्म किया गया तो रूट पर रात्रि बस सेवा समाप्त हो गई। इसी दौरान दिन के समय भी रूट पर चलने वाली तीनों रोडवेज बस की सेवाएं वापस ले ली गई। इसका असर सराय, टांडाहेड़ी, मांडोठी, मातन, छारा, महराणा आदि गांवों के लोगों पर पड़ा। पिछले करीब एक-डेढ़ महीने से इन गांवों के लोग बेहद परेशान हैं। इन गांवों के काफी लोग बहादुरगढ़ व बेरी कामकाज के सिलसिले में आते-जाते हैं। रोडवेज बस न चलने से इन लोगों को निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। महराणा गांव के निवासी नीरज ने कहा है कि वह पीडीएम कॉलेज में पढ़ता है। जब से इस रूट पर रोडवेज की बस चलनी बंद हुई हैं तब से बेहद दिक्कत हो रही है। वे लोग निजी बस में चढ़ तो जाते हैं, लेकिन सफर करना मुश्किल हो जाता है। 30 मिनट का सफर एक घंटे में पूरा होता है। निजी बस खचाखच भरकर चलती है, कई बार तो उन्हें बस की छत पर चढ़कर व खिड़कियों पर लटककर सफर करना पड़ता है। इस संबंध में उसने दो बार परिवहन निगम के कार्यालय में ईमेल के जरिये शिकायत भेजी थी, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया। परिवहन निगम इस ओर ध्यान दे और बस सेवा शुरू करे ताकि लोगों को राहत मिल सके।
विज्ञापन
एसएस से करेंगे बात : डीआई
इस संबंध में उनके पास लिखित में कोई शिकायत या मांगपत्र नहीं आया है। टाइम टेबल सेट नहीं है, इसलिए यह दिक्कत हो रही है। वह बुधवार को इस संबंध में एसएस से बात करेंगे। हालांकि वाया सांपला होकर उनकी बसें बेरी जा रही हैं।
विज्ञापन
-जगबीर, डीआई, बहादुरगढ़ बस अड्डा