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हॉपर पहुंचा रहा है धान की फसल को नुकसान

Tue, 24 Oct 2017 12:54 AM IST
Updated Tue, 24 Oct 2017 12:54 AM IST
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हॉपर पहुंचा रहा है धान की फसल को नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
धान की फसल में इन दिनों व्हाइट बैक प्लांट (हॉपर कीट) का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। हॉपर क्षेत्र में धान की फसल में नुकसान भी पहुंचा रहा है। हॉपर क्षेत्र में धान की फसल में नुकसान भी पहुंचा रहा है। हॉपर का प्रकोप खेतों तक सीमित नहीं रहता है, यह कीट रात के समय ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में ट्यूब व बल्ब की रोशनी में झुंड में मंडराने लगता है। इस कीट ने क्षेत्र के लोगों की भी परेशानी बढ़ा दी है। बहादुरगढ़ के खेतों में किसानों ने लगभग 7 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाई है।
बहादुरगढ़ क्षेत्र में कुछ वर्ष पहले हॉपर ने धान कीपुसल पर जमकर कहर बरपाया था। इस कीट ने धान की फसल को तबाह कर दिया था। इस समय धान की फसल पक रही है। जैसे-जैसे धान की फसल पकने लगी है, वैसे-वैसे इस बार भी हॉपर ने क्षेत्र में पैर पसार लिए हैं। हॉपर का प्रकोप केवल धान के खेत तक सीमित नहीं रहता है। हॉपर के कीट रात होते ही सड़क पर लगी ट्यूब या बल्ब की रोशनी पर झुंड में मंडराना शुरू हो जाते हैं। कीट रात के समय मकान के अंदर जलने वाली लाइटों तक पहुंच जाते हैं। जिस कारण क्षेत्र के लोग परेशान हैं। तीन-चार दिन से कीट का प्रकोप इतना अधिक बढ़ गया है कि लोग रोशनी में आराम से बैठकर खाना भी नहीं खा पाते हैं।
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कैसे पहुंचता है धान की फसल को नुकसान
हलके सफेदरंग की धारी वाला यह कीट मच्छर जैसा होता है। धान की फसल में यह कीट तेजी से हमला बोलता है। हॉपर धान की फसल के तने का रस चूस लेता है और उसके बाद पूरे खेत की फसल झुलसी हुई नजर आती है। इस समय धान की फसल की बाली पक रही हैं, लेकिन हॉपर के हमला करने के बाद बाली में धान अच्छी तरह से नहंी पक पाएगा और फसल बर्बाद हो जाती है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
कृषि विभाग के एसडीओ सुनील कौशिक ने कहा कि रात के समय ठंड और दिन के समय गर्मी बनने से अकसर यह कीट पनपना शुरू हो जाता है। वातावरण में आद्र्रता बढने से भी यह कीट पनपने लग जाता है। जिस खेत में धान की फसल अधिक गहरी होती है, उसमें हवा पार न होने से यह कीट अधिक पनपता है। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में धान की फसल उगी है उस पूरे क्षेत्र के किसानों को फसल में डीडीपी या नुआन को रेत में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा 250 एमएल डाइक्लोरवास को 20 किलोग्राम रेत में मिलाकर प्रति एकड़ बिखेर दें। ध्यान रहे जब दवा बिखेरें तब धान के खेत में पर्याप्त नमी जरूरी है। किसान 300-350 एमएल ब्यूफ्रोजिन दवाई का 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव भी कर सकते हैं।
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