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सूनी नही रहेगी वतन के रखवालों की कलाई
Updated Sun, 06 Aug 2017 01:24 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
वो गलेशियर, रेगिस्तान जंगलों में दिन-रात अपनी नींद खोते हैं तभी हम चैन की नींद सोते हैं। वतन के ऐसे रखवालों के लिए गांव बिसाहन की बेटियों ने शरहद पर राखियां भेजी हैं ताकि रक्षाबंधन के दिन किसी वीर की कलाई सूनी न रहे।
पूर्व आर्मी चीफ जनरल दलबीर सुहाग के गांव बिसाहन की महिलाओं ने यह राखियां गांव में बनाई हैं और उन्हें शरहद पर वीरों की सूनी कलाई पर बंधने के लिए भेज दिया है। बहनों ने खुद अपने भाइयों के लिए राखी बनाई हैं और उसे पोस्ट के माध्यम से अपने भाई के पास भेजा है। इतनी ही नहीं बहनों का ये धागा उनके भाई के लिए रक्षा का सूत्र है। शरहद पर जहां जवान देश की सुरक्षा करते तो वही उनकी बहने अपने भाइयों की रक्षा के लिए रक्षाबंधन से पहले ही राखियां बनाने में जुट जाती है।
यहां बता दें कि पूर्व आर्मी चीफ दलबीर सुहाग के गांव बिसाहन में हर दूसरे घर से एक फौजी देश की सीमा पर सरहद की रक्षा करने के लिए गया हुआ है। इसी गांव से सेना में 54 अधिकारी लेफ्टिनेंट से लेकर कर्नल तक लगे हुए है।
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ये कहना है बहनों का
गांव बिसाहन की महिला कला, संजू, सुषमा व बेटी साधना व कीर्ति का कहना है कि उन्होंने राखी बनाए जाने के दौरान मंगलगीत गाकर शरहद पर तैनात अपने सैनिक भाइयों की लंबी आयु की प्रार्थना भगवान से की है, ताकि वह सरहद पर देश की रक्षा कर सकें। महिला कलां का कहना है कि रक्षा बंधन के इस पर्व पर वो अपने भाई को हद से ज्यादा मिस करती हैं, लेकिन हमारे भाई की भी मजबूरी है। हम अपने भाई के लिए पूजा पाठ करके राखी को रख देते है और जब उनका भाई उनके घर आता है तब उनके भाई को राखी बांधते हैं। वही, संजू का कहना है कि रक्षा बंधन एक बहन का भाई के प्यार का पर्व होता है। बहन के पास भाई नहीं होता तो उसकी बहुत याद आती है वो सोचती है कास मेरा भाई उसके पास होता, लेकिन हम फिर भी अपने भाई के लिए राखी तैयार करते हैं और उनके पास भेजते हैं।
- पूर्व आर्मी चीफ के गांव बिसाहन की बेटियों ने बनाई राखियां
- मंगल गीत गाकर सरहद पर तैनात वीरों को भेजी राखी
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झज्जर।
वो गलेशियर, रेगिस्तान जंगलों में दिन-रात अपनी नींद खोते हैं तभी हम चैन की नींद सोते हैं। वतन के ऐसे रखवालों के लिए गांव बिसाहन की बेटियों ने शरहद पर राखियां भेजी हैं ताकि रक्षाबंधन के दिन किसी वीर की कलाई सूनी न रहे।
पूर्व आर्मी चीफ जनरल दलबीर सुहाग के गांव बिसाहन की महिलाओं ने यह राखियां गांव में बनाई हैं और उन्हें शरहद पर वीरों की सूनी कलाई पर बंधने के लिए भेज दिया है। बहनों ने खुद अपने भाइयों के लिए राखी बनाई हैं और उसे पोस्ट के माध्यम से अपने भाई के पास भेजा है। इतनी ही नहीं बहनों का ये धागा उनके भाई के लिए रक्षा का सूत्र है। शरहद पर जहां जवान देश की सुरक्षा करते तो वही उनकी बहने अपने भाइयों की रक्षा के लिए रक्षाबंधन से पहले ही राखियां बनाने में जुट जाती है।
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यहां बता दें कि पूर्व आर्मी चीफ दलबीर सुहाग के गांव बिसाहन में हर दूसरे घर से एक फौजी देश की सीमा पर सरहद की रक्षा करने के लिए गया हुआ है। इसी गांव से सेना में 54 अधिकारी लेफ्टिनेंट से लेकर कर्नल तक लगे हुए है।
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ये कहना है बहनों का
गांव बिसाहन की महिला कला, संजू, सुषमा व बेटी साधना व कीर्ति का कहना है कि उन्होंने राखी बनाए जाने के दौरान मंगलगीत गाकर शरहद पर तैनात अपने सैनिक भाइयों की लंबी आयु की प्रार्थना भगवान से की है, ताकि वह सरहद पर देश की रक्षा कर सकें। महिला कलां का कहना है कि रक्षा बंधन के इस पर्व पर वो अपने भाई को हद से ज्यादा मिस करती हैं, लेकिन हमारे भाई की भी मजबूरी है। हम अपने भाई के लिए पूजा पाठ करके राखी को रख देते है और जब उनका भाई उनके घर आता है तब उनके भाई को राखी बांधते हैं। वही, संजू का कहना है कि रक्षा बंधन एक बहन का भाई के प्यार का पर्व होता है। बहन के पास भाई नहीं होता तो उसकी बहुत याद आती है वो सोचती है कास मेरा भाई उसके पास होता, लेकिन हम फिर भी अपने भाई के लिए राखी तैयार करते हैं और उनके पास भेजते हैं।
- पूर्व आर्मी चीफ के गांव बिसाहन की बेटियों ने बनाई राखियां
- मंगल गीत गाकर सरहद पर तैनात वीरों को भेजी राखी