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हरियाणा: किसानों के सहारे अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में इनेलो, किसान आंदोलन के तहत बनेगी अगली रणनीति
Tue, 09 Nov 2021 09:41 AM IST
प्रमोद कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: प्रमोद कुमार
Updated Tue, 09 Nov 2021 09:41 AM IST
सार
भाजपा, कांग्रेस, जजपा पर जुबानी हमले बढ़ाने की तैयारी इनेलो ने कर ली है। इनेलो अब किसानों में पैठ बनाकर अपना पुराना वोटबैंक जोड़ने की कवायद में है। इसके तहत किसान आंदोलन को ध्यान में रखते हुए ही अगली रणनीति बनाई जाएगी। इनेलो अब अपना खोया जनाधार पाने की पूरी कोशिश कर रही है।
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अभय चौटाला
- फोटो : फाइल
विस्तार
हरियाणा में चश्मा अपना खोया रुतबा ढूंढ रहा है। जनवरी के अंतिम सप्ताह से नवंबर के पहले हफ्ते तक विधानसभा में इनेलो का एक भी विधायक नहीं रहा था। उपचुनाव में जीत हासिल कर इनेलो प्रधान महासचिव अभय चौटाला ने फिर विधानसभा की दहलीज लांघी है। पार्टी अब किसानों के सहारे प्रदेश में अपनी पैठ मजबूत करना चाह रही है। आने वाले समय में पार्टी की रणनीति किसान आंदोलन को केंद्र बिंदु में रखकर ही बनेगी। भाजपा, कांग्रेस, जजपा पर जुबानी हमले बढ़ाने की तैयारी चल रही है। किसानों की आय न बढ़ने को लेकर इनेलो भाजपा के साथ ही कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराएगी।
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अभय चौटाला ने संकेत दे दिए हैं कि इनेलो अब ताऊ देवीलाल की तरह किसान हित की लड़ाई लड़ेगा। ऐसे में किसान जत्थेबंदियों के साथ उनकी जुगलबंदी आने वाले दिनों में बढ़ सकती है। 2004 तक प्रदेश की सत्ता में धाक रखने वाला इनेलो अब एक सीट तक प्रदेश में सिमटा हुआ है। उसके वोट बैंक में भाजपा और जजपा के अलावा कांग्रेस ने भी सेंध लगाई है। ऐसे में पार्टी सुप्रीमो ओपी चौटाला के साथ ही अभय चौटाला पर इनेलो की जड़ें फिर से मजबूत करने का दारोमदार है। बीते लोकसभा व विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा।
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उससे सबक लेते हुए न केवल अगली रणनीति बनानी होगी, बल्कि विरोधियों से लोहा लेने के लिए संगठन को गांव-गांव तक खड़ा कर युवाओं को साथ जोड़ना होगा। अभय का भूपेंद्र हुड्डा को भाजपा के इशारों पर चलने वाला बताने से साफ है कि इनेलो के निशाने पर नेता प्रतिपक्ष भी रहेंगे। अभय का कहना है कि हुड्डा ने ऐलनाबाद में प्रचार के दौरान गोपाल कांडा को अपना मित्र व पुराना साथी बताया। जिससे उन्होंने गोविंद कांडा को वोट देने का सीधा संकेत दिया। बावजूद इसके वह बड़े अंतर से जीतने में कामयाब रहे और विरोधियों को मुंह की खानी पड़ी।