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तीन साल में 3832 बच्चे कोख में मारे गए

Tue, 07 Jan 2014 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल Updated Tue, 07 Jan 2014 12:43 AM IST
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In the year 3832, three children killed in the womb
तीन साल में जिले के अस्पताल में गर्भपात का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है। वजह चाहे जो भी रही हो, लेकिन इतने बड़े स्तर पर महिलाओं के गर्भपात संदेहास्पद हैं। साथ ही निजी अस्पतालों की भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं।
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जिले में वर्ष 2010 से 2013 तक 3832 महिलाओं के गर्भपात हुए। सरकार से स्वीकृत अस्पतालों में इतने गर्भपात निश्चित तौर पर जांच का विषय हैं। सरकारी अनुमति मिलने के बाद गर्भपात के नाम पर जिले के इन केंद्रों पर प्रतिदिन कई बच्चों का जन्म पहले ही कत्ल किया जाता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भपात करने की स्थिति सामान्य नहीं है। जब डिलीवरी के समय महिला की जान को खतरा हो या फिर बच्चा बच्चेदानी में ही दम तोड़ चुका हो, ऐसी स्थिति में गर्भपात करने की नौबत आती है।
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आरटीआई में खुलासा
आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा की ओर से आरटीआई के तहत जुटाई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2010 से 2013 के बीच जिले 41 गर्भपात केंद्रों पर 3 हजार 832 बच्चों का कोख में ही कत्ल कर दिया गया।

जिले में 69 केंद्राें को सरकार की ओर से गर्भपात जैसी स्थिति के लिए अधिकृत किया गया है। शर्मा ने बताया कि इन केंद्रों की जानकारी देने में स्वास्थ्य विभाग आनाकानी कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने आरटीआई में दी जानकारी में सरकारी अस्पतालों का आंकड़ा भी नहीं दिया है।


कहीं भ्रूण हत्या तो नहीं हो रही
एडवोकेट राजेश शर्मा ने कहा कि सरकारी मान्यता प्राप्त गर्भपात केंद्रों का यह आंकड़ा संदेहास्पद है। इनकी जांच होनी चाहिए। इतनी पड़ी संख्या में गर्भपात चौंकाने वाला है। कहीं ऐसा तो नहीं कि अस्पताल लाइसेंस का नाजायज फायदा उठाकर भ्रूण हत्या को अंजाम दे रहे हों।  



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