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युवा नजरिया: जम्मू-कश्मीर पहले की तुलना में आज भारत का हिस्सा, लोगों को मिला सहभागी लोकतंत्र का स्वाद

Fri, 22 Dec 2023 10:47 AM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Fri, 22 Dec 2023 10:47 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में राज्य मशीनरी लालफीताशाही और भ्रष्टाचार की गिरफ्त में थी। जनता की भलाई के लिए भेजे जा रहे पैसे का निहित स्वार्थी समूहों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा था। घाटी आज राज्य के प्रमुख विभागों और वित्तीय निकायों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की खबरों से गुलजार है।

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Yuva Najariya: Jammu and Kashmir part of India today compared to before, people got taste of democracy
प्रियंका और पवन कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अनुच्छेद 370 और 35ए की विदाई से जम्मू-कश्मीर पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है। वो भेद आज इतिहास बन गए हैं जिन्होंने देश में बनाए गए प्रत्येक नियम के लिए हमेशा प्रश्न किया कि यह जम्मू-कश्मीर पर लागू होता है या नहीं। आज जम्मू-कश्मीर अखंड भारत का हिस्सा है। जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य पंचायत चुनाव अंततः 2020 में हुए।

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यह भी पढ़ें- युवा नजरिया: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद वर्तमान में शांति की स्थिति, तेजी से हो रहा विकास  
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चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए और लोगों को सहभागी लोकतंत्र का स्वाद मिला। यह एक कदम जम्मू-कश्मीर में विकास प्रतिमान को आकार देने में सहायक सिद्ध हुआ। बेड़िया टूटने के बाद कश्मीर के लोगों ने खुद से पूछा कि जम्मू-कश्मीर में आरटीआई कानून क्यों नहीं होना चाहिए और आरक्षण का लाभ वहां के एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों को क्यों नहीं मिलना चाहिए। यह जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
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यह भी पढ़ें- युवा नजरिया: अनुच्छेद 370 निरस्त होने से समग्र रूप से एकत्रित हुआ भारत, कश्मीर के लोगों को मिली मदद

जम्मू-कश्मीर में राज्य मशीनरी लालफीताशाही और भ्रष्टाचार की गिरफ्त में थी। जनता की भलाई के लिए भेजे जा रहे पैसे का निहित स्वार्थी समूहों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा था। घाटी आज राज्य के प्रमुख विभागों और वित्तीय निकायों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की खबरों से गुलजार है। 370 और 35(ए) के हटने से घाटी में पर्यटन को गति मिली।

यह भी पढ़ें- युवा नजरिया: अनुच्छेद 370 के उन्मूलन ने जम्मू-कश्मीर को दिया नया दृष्टिकोण, सरकार की एक साहसी पहल

अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिए गए हैं चाहे वह केसर किसान हो या ट्राउट मछली पकड़ने वाले या बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण वातावरण के साथ लोगों के जीवन को सशक्त बना रहें है। भ्रष्टाचार और लीकेज में भारी कमी आने से संसाधन इच्छित लाभार्थियों तक पहुंच रहे हैं। अब आगे का रास्ता भी आशा से भरा हुआ लगता है। अमृत महोत्सव हमारे लिए जम्मू-कश्मीर में नई वास्तविकताओं को देखने का है। आने वाले वर्षों में, जम्मू-कश्मीर भारत की वृद्धि और विकास में और भी बड़ा योगदान देगा। -प्रियंका सौरभ, आर्य नगर, रिसर्च स्कॉलर इन पॉलिटिकल साइंस

अनुच्छेद 370 हटने से पहले सेना पर पथराव आम बात

अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा, जिसे 7 अक्तूबर 1949 को लागू किया गया था। इस अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान, अलग झंडा व अलग कानून आदि हुए। इससे राज्य को विशेष दर्जा मिला था। 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने इसे निरस्त कर दिया, जो कि ऐतिहासिक फैसला था। जब तक यह अनुच्छेद अस्तित्व में था, तब तक राज्य में अशांति फैली हुई थी। वहां के युवाओं द्वारा सेना पर पथराव  व भारत विरोधी नारे आम बात थी।

इस कारण राज्य में विकास कारणों का अभाव था। लेकिन अनुच्छेद के निरस्त होने के बाद, राज्य में प्रमुख बदलाव आए जैसे कि पथराव की घटनाओं में कमी आई व निवेश में बढ़ोतरी हुई। लाल चौक पर किसी ने तिरंगा फैराने के बारे में सोचा नहीं था, वहां अब देश का झंडा शान से लहरा रहा है। लोगों की सुचारू रूप से आवाजाही प्रमुख चीजें हैं जो बता रहीं हैं कि जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित हो रही है। जो युवा पहले सेना पर पथराव करते वही अब सेना में शामिल हो रहे हैं।

जो कश्मीरी पंडित अशांति के चलते राज्य छोड़कर चले गए थे वो अब वापस घाटी में लौट रहे हैं। वहीं आतंकवादी घटनाओं में भी कमी आई है। यह सब अनुच्छेद 370 के उन्मूलन के बाद ही संभव हो पाया है। जम्मू-कश्मीर में जी-20 की बैठक होना भी राज्य में शांति बहाली की ओर संकेत कर रहा है। इसलिए हम कह सकते हैं कि अनुच्छेद 370 को उन्मूलन जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली के लिए एक ठोस कदम है। -पवन कुमार, गांव सातरोड़ खुर्द, हिसार

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