{"_id":"65da4499505cb585400a84e4","slug":"youth-are-becoming-victims-of-fraud-hisar-news-c-21-hsr1013-328605-2024-02-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: जिले में 200 इमिग्रेशन सेंटर, केवल तीन के पास लाइसेंस, युवा हो रहे ठगी का शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: जिले में 200 इमिग्रेशन सेंटर, केवल तीन के पास लाइसेंस, युवा हो रहे ठगी का शिकार
Sun, 25 Feb 2024 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 25 Feb 2024 01:03 AM IST
विज्ञापन
हर साल 2000 के करीब युवा डोंकी के जरिये जान हथेली पे लेकर जा रहे विदेश
विदेश मंत्रालय से लेना होता है लाइसेंस
बिना लाइसेंस के सेंटर चलाने वाले लाखों रुपये लेकर युवाओं स्टडी और वर्क वीजा के नाम पर भेज रहे विदेश
सुरेश सहारण
हिसार। युवाओं को विदेश में स्टडी और वर्क वीजा दिलवाने के बहाने बिना लाइसेंस इमिग्रेशन सेंटर चलाने वाले लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर रहे हैं। हर साल युवाओं को डाेंकी के जरिये विदेश भेज रहे हैं। ऐेसे में युवा अपनी जान हथेली पर रख कर जोखिम भरा सफर तय करते हैं। कुछ तो रास्ते में ही अपनी जान गंवा बैठते हैं। विदेश मंत्रालय की साइड पर जिले में सिर्फ तीन इमिग्रेशन सेंटरों का ही लाइसेंस है। जिले में 200 के करीब इमिग्रेशन सेंटर चल रहे हैं। इन सेंटरों के माध्यम से युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से विज्ञापन भी चला रहे हैैं। जहां ये सेंटर चल रहे हैं उनके बाहर भी बड़े-बड़े अक्षरों में विदेश भेजने के स्लोग्न छपे हुए हैं। इन सबके बावजूद भी बिना लाइसेंस के इमिग्रेशन सेंटर चला रहे संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। हर रोज काफी संख्या में युवा विदेश जाने के नाम पर इनके जाल में फंस कर लाखों रुपयों का ठगी का शिकार हो रहे हैं।
विदेश मंत्रालय देता है लाइसेंस
इमिग्रेशन सेंटर चलाने के लिए विदेश मंत्रालय से लाइसेंस लेना होता है। इसके लिए सेंटर चलाने वाले को अप्लाई करना पड़ता है। अप्लाई करते समय विदेश मंत्रालय के पास 50 लाख रुपये की सिक्योरिटी जमा करवानी होती है। जो कि 8 साल के लिए वैध होती है। सिक्योरिटी जमा करवाने के बाद विदेश मंत्रालय द्वारा आरए यानि स्क्रूटिंग एजेंट का लाइसेंस जारी किया जाता है। जिसको लाइसेंस जारी किया जाता है वहीं एजेंट युवाओं को विदेश में स्टडी और वर्क वीजा अप्लाई करवा सकता है। विदेश मंत्रालय की साइड पर जिले के मात्र तीन इमिग्रेशन सेंटर ही लाइसेंस लिए हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि 200 के करीब इमिग्रेशन सेंटर जिले में चल रहे हैं। बिना इमिग्रेशन लाइसेंस के कोई भी सेंटर किसी को विदेश नहीं भेज सकता।
बिना लाइसेंस के चल रहे इमिग्रेशन सेंटर
विदेश मंत्रालय से लाइसेंस लेकर इमिग्रेशन सेंटर चला रहे आईटीआई के पूर्व प्राचार्य राजकपूर ने बताया कि जिले में तीन इमिग्रेशन सेंटर है जिनके पास लाइसेंस है। बाकि सेंटर बिना लाइसेंस के चल रहे हैं। ये सेंटर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ रहे हैं। इस बारे में हाईकोर्ट में भी केस डाला हुआ है। जनवरी माह में प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा गाइड लाइन जारी की गई थी।
विज्ञापन
ये दस्तावेज वैध नहीं
प्रॉपराइटर
पार्टनरशिप
एलएलपी
प्राइवेट लिमिटेड
लिमिटेड
केस नंबर 1 : इमिग्रेशन संचालक को किया था गिरफ्तार
ऑस्ट्रेलिया में वर्क वीजा भेजने के नाम पर 5 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में अग्रोहा पुलिस ने सिरसा निवासी मनोज को 17 फरवरी को गिरफ्तार किया था। जांच अधिकारी एएसआई रामजी लाल ने बताया था कि आरोपी मनोज पुरानी अदालत परिसर सिरसा में इमिग्रेशन ऑफिस चलाता है। आरोपी मनोज ने जगाण गांव के रहने वाले अमन को ऑस्ट्रेलिया में वर्क वीजा पर भेजने के नाम पर 5 लाख रुपये लिए। उसे ऑस्ट्रेलिया भेजने की जगह आर्मेनिया भेज दिया। वहां पर अमन 40 दिन रहा और वापस देश लौट आया। गांव आने के बाद अमन ने जब मनोज के पास 5 लाख रुपये वापस लेने के लिए फोन किया तो उसने फोन उठाना बंद कर दिया। इस संबंध में 7 सितंबर 2023 को मनोज के खिलाफ केस दर्ज किया था।
इमिग्रेशन सेंटर लाइसेंस के बिना चल रहे हैं या उनके पास लाइसेंस है इसके बारे में जिला उपायुक्त कार्यालय से जानकारी मिलेगी। कोई शिकायत आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।- मोहित हांडा, पुलिस अधीक्षक, हिसार
विज्ञापन
विदेश मंत्रालय से लेना होता है लाइसेंस
बिना लाइसेंस के सेंटर चलाने वाले लाखों रुपये लेकर युवाओं स्टडी और वर्क वीजा के नाम पर भेज रहे विदेश
सुरेश सहारण
हिसार। युवाओं को विदेश में स्टडी और वर्क वीजा दिलवाने के बहाने बिना लाइसेंस इमिग्रेशन सेंटर चलाने वाले लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर रहे हैं। हर साल युवाओं को डाेंकी के जरिये विदेश भेज रहे हैं। ऐेसे में युवा अपनी जान हथेली पर रख कर जोखिम भरा सफर तय करते हैं। कुछ तो रास्ते में ही अपनी जान गंवा बैठते हैं। विदेश मंत्रालय की साइड पर जिले में सिर्फ तीन इमिग्रेशन सेंटरों का ही लाइसेंस है। जिले में 200 के करीब इमिग्रेशन सेंटर चल रहे हैं। इन सेंटरों के माध्यम से युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से विज्ञापन भी चला रहे हैैं। जहां ये सेंटर चल रहे हैं उनके बाहर भी बड़े-बड़े अक्षरों में विदेश भेजने के स्लोग्न छपे हुए हैं। इन सबके बावजूद भी बिना लाइसेंस के इमिग्रेशन सेंटर चला रहे संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। हर रोज काफी संख्या में युवा विदेश जाने के नाम पर इनके जाल में फंस कर लाखों रुपयों का ठगी का शिकार हो रहे हैं।
विदेश मंत्रालय देता है लाइसेंस
इमिग्रेशन सेंटर चलाने के लिए विदेश मंत्रालय से लाइसेंस लेना होता है। इसके लिए सेंटर चलाने वाले को अप्लाई करना पड़ता है। अप्लाई करते समय विदेश मंत्रालय के पास 50 लाख रुपये की सिक्योरिटी जमा करवानी होती है। जो कि 8 साल के लिए वैध होती है। सिक्योरिटी जमा करवाने के बाद विदेश मंत्रालय द्वारा आरए यानि स्क्रूटिंग एजेंट का लाइसेंस जारी किया जाता है। जिसको लाइसेंस जारी किया जाता है वहीं एजेंट युवाओं को विदेश में स्टडी और वर्क वीजा अप्लाई करवा सकता है। विदेश मंत्रालय की साइड पर जिले के मात्र तीन इमिग्रेशन सेंटर ही लाइसेंस लिए हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि 200 के करीब इमिग्रेशन सेंटर जिले में चल रहे हैं। बिना इमिग्रेशन लाइसेंस के कोई भी सेंटर किसी को विदेश नहीं भेज सकता।
विज्ञापन
बिना लाइसेंस के चल रहे इमिग्रेशन सेंटर
विदेश मंत्रालय से लाइसेंस लेकर इमिग्रेशन सेंटर चला रहे आईटीआई के पूर्व प्राचार्य राजकपूर ने बताया कि जिले में तीन इमिग्रेशन सेंटर है जिनके पास लाइसेंस है। बाकि सेंटर बिना लाइसेंस के चल रहे हैं। ये सेंटर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ रहे हैं। इस बारे में हाईकोर्ट में भी केस डाला हुआ है। जनवरी माह में प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा गाइड लाइन जारी की गई थी।
विज्ञापन
ये दस्तावेज वैध नहीं
प्रॉपराइटर
पार्टनरशिप
एलएलपी
प्राइवेट लिमिटेड
लिमिटेड
केस नंबर 1 : इमिग्रेशन संचालक को किया था गिरफ्तार
ऑस्ट्रेलिया में वर्क वीजा भेजने के नाम पर 5 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में अग्रोहा पुलिस ने सिरसा निवासी मनोज को 17 फरवरी को गिरफ्तार किया था। जांच अधिकारी एएसआई रामजी लाल ने बताया था कि आरोपी मनोज पुरानी अदालत परिसर सिरसा में इमिग्रेशन ऑफिस चलाता है। आरोपी मनोज ने जगाण गांव के रहने वाले अमन को ऑस्ट्रेलिया में वर्क वीजा पर भेजने के नाम पर 5 लाख रुपये लिए। उसे ऑस्ट्रेलिया भेजने की जगह आर्मेनिया भेज दिया। वहां पर अमन 40 दिन रहा और वापस देश लौट आया। गांव आने के बाद अमन ने जब मनोज के पास 5 लाख रुपये वापस लेने के लिए फोन किया तो उसने फोन उठाना बंद कर दिया। इस संबंध में 7 सितंबर 2023 को मनोज के खिलाफ केस दर्ज किया था।
इमिग्रेशन सेंटर लाइसेंस के बिना चल रहे हैं या उनके पास लाइसेंस है इसके बारे में जिला उपायुक्त कार्यालय से जानकारी मिलेगी। कोई शिकायत आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।- मोहित हांडा, पुलिस अधीक्षक, हिसार