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Haryana: घरेलू हिंसा से बेघर हुईं महिलाओं को मिला 'सखी' का सहारा, करनाल और फरीदाबाद में सबसे अधिक मामले

Sat, 19 Aug 2023 10:33 AM IST
नवीन दलाल दीपिका लोहचब, हिसार (हरियाणा)
दीपिका लोहचब, हिसार (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Sat, 19 Aug 2023 10:33 AM IST
सार

हरियाणा में घरेलू हिंसा के सबसे अधिक मामले फरीदाबाद और करनाल में सामने आए हैं। ऐसे में बेघर हुईं (भटकीं) महिलाओं को दोबारा सहारा दिलाने में सखी सेंटर मददगार बने। सखी सेंटर में आने के बाद महिलाओं को रहने-खाने की सुविधा मिलती है।

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Women rendered homeless due to domestic violence in Haryana got support of Sakhi
हिसार लघु सचिवालय परिसर में बना सखी सेंटर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में एक कहावत काफी प्रचलित है दारू और ताश घर का करै नाश। नशे के कारण घर तो बर्बाद हो ही रहे हैं साथ में शरीर भी खोखला होता है। नशे के कारण घरेलू हिंसा के मामले बढ़ने से कई घर उजड़ गए हैं तो कई परिवार टूटने की कागार पर पहुंच चुके हैं। ऐसे में घरेलू हिंसा की वजह से बेघर हुईं (भटकीं) महिलाओं को दोबारा सहारा दिलाने में सखी सेंटर मददगार बने।

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महीने में करीब 25 से 30 महिलाएं मदद के लिए पहुंच रही
सखी सेंटर में आने के बाद महिलाओं को रहने-खाने की सुविधा मिलती है। सखी में उनकी काउंसिलिंग करवाई जाती है और कानूनी लड़ाई के लिए वकील मुहैया करवाया जाता है। प्रदेश की बात करें तो घरेलू हिंसा के सबसे अधिक मामले फरीदाबाद और करनाल में सामने आए हैं। वहीं, घरेलू हिंसा के मामले में हिसार 10वें पायदान पर है। हिसार के सखी सेंटर पर हर माह करीब 25 से 30 महिलाएं मदद के लिए पहुंच रही हैं।
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अधिकारी के अनुसार
महिला संरक्षण अधिकारी बबीता चौधरी का कहना है कि आए दिन घरेलू हिंसा के मामले आ रहे हैं। ज्यादातर मामले 18 से 35 साल की महिलाओं के आते हैं। सखी सेंटर में आने वाली पीड़ित महिलाओं की जब काउंसिलिंग करवाई जाती है तो वे बताती हैं कि उनके पति नशे आदी है। जब पति को नशा करने से रोकती हैं तो मारपीट करता है। कई बार घर से बाहर निकाल देता है। नशा करने के कारण पति कोई काम धंधा नहीं करता। नशे और बेरोजगारी की चक्की में पीसते-पीसते जान निकलने को रहती है।

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5 दिन तक रह सकते हैं सखी सेंटर में

बबीता चौधरी ने बताया कि लघु सचिवालय परिसर में सखी सेंटर बनाया गया है। यहां पर पीड़िता 5 दिन तक रह सकती है। इन 5 दिनों के अंदर पीड़िता की काउंसिलिंग और मेडिकल जांच करवाई जाती है। लीगल वकील के जरिये कानूनी सलाह दी जाती है और इन 5 दिनों में पीड़िता के कहे अनुसार पुलिस द्वारा कार्रवाई की जाती है। दोनों पक्षों को बुलाया जाता है। सखी सेंटर का प्रयास रहता है कि महिला का घर दोबारा से बस जाए। अधिकतर केस में घर बसाने में कामयाबी हुए हैं। अगर पीड़िता दोनों पक्षों में किसी के साथ नहीं रहना चाहती तो उसे मोक्ष आश्रम भेज दिया जाता है।

कई बार महिलाओं को ससुरालियों द्वारा घर से निकाल दिया जाता है या दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है। इसके अलावा परिजनों से नाराज होकर किशोरी या युवती भी घर छोड़कर चली जाती हैं। ऐसे में उनके साथ आपराधिक घटना होने की आशंका रहती है। महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने में यह व्यवस्था बेहतर साबित होगी।

प्रदेश में जनवरी से जून तक घरेलू हिंसा के मामले पर एक नजर

फरीदाबाद      562
करनाल          377
रेवाड़ी            338
गुरुग्राम          283
महेंद्रगढ़         263
मेवात            204
झज्जर            201
पलवल          199
पानीपत         198
हिसार           187
यमुनानगर     168
रोहतक         161
पंचकूला        160
अंबाला          159
फतेहाबाद      158
जींद              151
चरखीदादरी    148
कुरूक्षेत्र         148
सिरसा           138
कैथल            136
सोनीपत         136
भिवानी          113

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