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Hisar News: गेहूं की डब्ल्यूएच-1402 से प्रति एकड़ 8 लाख लीटर पानी की होगी बचत
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एचएयू में आयोजित दो दिवसीय कृषि अधिकारी कार्यशाला में रबी फसलों की पुस्तिका का विमोचन करते क
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से विकसित की गई गेहूं की नई किस्म डब्ल्यूएच-1402 को केवल दो सिंचाई में ही तैयार किया जा सकता है। इससे किसान प्रति एकड़ लगभग 8 लाख लीटर पानी बचा सकते हैं। फरवरी-मार्च में बढ़ते तापमान को सहन करने वाली पछेती किस्म डब्ल्यूएच-1309 भी विकसित की गई है जो बदलते मौसम के अनुकूल बेहतर पैदावार दे सकती है।
कांबोज शुक्रवार को मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय कृषि अधिकारी कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 80 प्रतिशत किसानों के पास एक हेक्टेयर से कम भूमि है। इसलिए कम संसाधनों में अधिक पैदावार देने वाली किस्मों को अपनाना जरूरी है। विश्वविद्यालय अब तक विविध फसलों की 309 किस्में विकसित कर चुका है और जलवायु परिवर्तन, घटते जलस्तर, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट तथा बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखकर शोध कर रहा है कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि दलहनी और तिलहनी फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है। हरियाणा ठन के बाद किसानों की मेहनत से खाद्यान्न की पैदावार सात गुना बढ़ी है। उन्होंने प्राकृतिक व जैविक खेती को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
सरकार को 700 करोड़ की बचत
कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. रामप्रताप सिहाग ने बताया कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल से डीएपी और यूरिया को लिंक करने पर करीब 700 करोड़ रुपये की बचत हुई है। विभाग ने किसानों को एक करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड भी जारी किए हैं जिनके आधार पर खेती करने की सलाह दी गई है। विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रमेश कुमार यादव ने रबी फसलों की समग्र सिफारिशों के नए संस्करण का विमोचन किया। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों की जानकारी दी।
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कांबोज शुक्रवार को मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय कृषि अधिकारी कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 80 प्रतिशत किसानों के पास एक हेक्टेयर से कम भूमि है। इसलिए कम संसाधनों में अधिक पैदावार देने वाली किस्मों को अपनाना जरूरी है। विश्वविद्यालय अब तक विविध फसलों की 309 किस्में विकसित कर चुका है और जलवायु परिवर्तन, घटते जलस्तर, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट तथा बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखकर शोध कर रहा है कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि दलहनी और तिलहनी फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है। हरियाणा ठन के बाद किसानों की मेहनत से खाद्यान्न की पैदावार सात गुना बढ़ी है। उन्होंने प्राकृतिक व जैविक खेती को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
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सरकार को 700 करोड़ की बचत
कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. रामप्रताप सिहाग ने बताया कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल से डीएपी और यूरिया को लिंक करने पर करीब 700 करोड़ रुपये की बचत हुई है। विभाग ने किसानों को एक करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड भी जारी किए हैं जिनके आधार पर खेती करने की सलाह दी गई है। विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रमेश कुमार यादव ने रबी फसलों की समग्र सिफारिशों के नए संस्करण का विमोचन किया। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों की जानकारी दी।
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