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Hisar News: सात महीने तक दबाए रखी चेतावनी की चिट्ठी, नहर में घुलता रहा जहर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 01:07 AM IST
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Warning letter suppressed for seven months; poison kept seeping into the canal.
हिसार। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हांसी ड्रेन और बालसमंद नहर में दूषित पानी बहने की शिकायत पर सात महीने पहले ही सिंचाई और जनस्वास्थ्य विभाग को चेताया था लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। नवंबर 2025 में लिए गए पानी के सैंपल की जांच में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा अधिक मिली थी।
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इसके बाद दिसंबर में बोर्ड ने दोनों विभागों के अधिकारियों को पत्र भेजकर गंदे पानी की निकासी रोकने और व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद लंबे समय तक दूषित पानी बहता रहा।
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अधिकारियों के अनुसार नवंबर 2025 में हांसी ड्रेन और जनस्वास्थ्य विभाग के 7.5 एमएलडी क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से पानी के सैंपल लिए गए थे। उस समय एसटीपी का अत्यधिक दूषित और अनट्रीटेड पानी सीधे हांसी ड्रेन में बहाया जा रहा था। प्रयोगशाला जांच में पानी में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा कई गुना अधिक मिली।
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24 सितंबर को सामने आया था वीडियो

बालसमंद माइनर में मोटरें चलाकर ड्रेन का गंदा पानी डालने का वीडियो 24 सितंबर को सामने आया था। इसके बाद मदद संस्था के अध्यक्ष संजीव भोजराज ने उपायुक्त महेंद्र पाल को शिकायत देकर जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद से दोबारा गंदा पानी माइनर में नहीं डाला गया है।

क्या है फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मुख्य रूप से मलमूत्र में पाया जाता है। पानी में इसकी अधिक मात्रा सीवरेज के दूषित पानी के मिलने का संकेत है। ऐसा पानी फसलों की सिंचाई या पेयजल में मिलने पर हैजा, टाइफाइड, पीलिया और पेट के गंभीर संक्रामक रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति

जांच रिपोर्ट में बैक्टीरिया की अधिक मात्रा मिलने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिसंबर 2025 में सिंचाई और जनस्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा था। इसमें ड्रेन और बालसमंद नहर में गिर रहे गंदे पानी को रोकने तथा एसटीपी का संचालन दुरुस्त करने की हिदायत दी गई थी। सात महीने बाद मामला फिर सामने आने पर बोर्ड अब दोबारा दोनों विभागों को पत्र भेजने की तैयारी में है।

ड्रेन-माइनर सिंचाई विभाग के, जवाबदेही भी उसी की

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, हांसी ड्रेन और इससे जुड़े माइनर व नहरों का स्वामित्व और रखरखाव सिंचाई विभाग के अधीन है। ऐसे में नहर के पानी को दूषित होने से बचाना और ड्रेन में बहाए जा रहे सीवरेज के पानी पर रोक लगाना सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी है। सात महीने पहले पत्र मिलने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह सवाल बना हुआ है।


हमने नवंबर 2025 में सैंपल लिए थे, जिसमें फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया ज्यादा मिला था। दिसंबर में ही सिंचाई व जनस्वास्थ्य विभाग को सुधार के लिए पत्र लिखा गया था। ड्रेन व माइनर की देखरेख सिंचाई विभाग का काम है। स्थिति में सुधार के लिए दोबारा सख्त पत्र भेजा जाएगा।

- कपिल सिंह, एसडीओ, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हिसार
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