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Hisar News: पैरामेडिकल कोर्स की पुस्तकों के लिए बजट का इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 31 Aug 2024 01:43 AM IST
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Waiting for budget for paramedical course books
हिसार। नए सत्र से सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू की गई है। अब एनईपी के तहत ही विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाई जाएगी। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) में बीएससी लाइफ साइंस, बीबीए-एमबीए, बीएससी एविएशन, बीएससी-एमएससी इंटीग्रेटेड योग साइंस सहित पैरा मेडिकल के कोर्स शुरू किए गए थे।
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इनमें पैरा मेडिकल के नए पाठ्यक्रमों की कुछ पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। ऐसे में कुछ कोर्सों में पुस्तकें न आने के कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं विवि प्रशासन का कहना है कि नए कोर्सों की पुस्तकें खरीदने के लिए सभी विभागों को पत्र लिखा गया है। जल्द ही पुस्तकें खरीद ली जाएंगी। इस साल अभी तक 20 लाख रुपये की किताबें खरीदी जा चुकी हैं। जीजेयू की लाइब्रेरी में 10 लाख ऑनलाइन पुस्तकें हैं, जिनमें से 7 लाख नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी की है और 3 लाख जीजेयू की है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए 1 लाख 31 हजार से ज्यादा पुस्तकें प्रिंटिड रखी हुई हैं।
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गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के लाइब्रेरियन डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि उनके पास केमिस्ट्री, कॉमर्स, मास कम्युनिकेशन, कंप्यूटर साइंस, फूड टेक्नोलॉजी, हिंदी, जूलॉजी विभाग से रिकमेंडेशन आ चुकी हैं। अब पहले से लाइब्रेरी में मौजूद पुस्तकों से मिलान करके जो किताबें रहेंगी उन्हें खरीदा जाएगा। इसके अलावा पैरामेडिकल कोर्स की पुस्तकों के लिए रिकमेंडेशन आ चुकी है। इसको लेकर विभाग को 3.5 लाख से 5 लाख का बजट बताया है, जैसे ही बजट आता है पुस्तकें खरीद ली जाएंगी। वहीं प्रिंटिंग एंड पैकेजिंग की रिकमेंडेशन अभी नहीं आई हैं।
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दूसरी तरफ कॉलेजों में विद्यार्थियों को पुस्तकों को लेकर ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। एनईपी लागू होने से विषय भी बढ़ गए हैं। ऐसे में उनकी पुस्तकें नहीं मिल रही है और कक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं। नए कोर्स आने के बाद से पुस्तकों को लेकर कोई बैठक नहीं हुई है न ही सरकार की तरफ से कोई ग्रांट आया है। गवर्नमेंट पीजी कॉलेज की लाइब्रेरी में मौजूदा समय में 90 हजार पुस्तकें रखी हुई हैं।


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अब तक हमारे पास विषय के अनुसार 20-30 प्रतिशत ही पुस्तकों आई हैं। विद्यार्थी हर रोज पुस्तकें पूछने के लिए आते हैं। साइंस संकाय की तो 90 प्रतिशत पुस्तकें नहीं आई हैं। किसी भी पब्लिशर की पुस्तकें बाजार में नहीं आ रही है।-

राजेश जिंदल, जिंदल बुक सेंटर।
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विवि में जो नए सत्र से जो कोर्स शुरू किए गए हैं उनमें से कुछ पुस्तकें पहले से ही लाइब्रेरी में मौजूद हैं। बाकि सभी विभागों को पुस्तकों के लिए रिकमेंडेशन लाइब्रेरियन के पास भेजने के लिए कहा गया है। पुस्तकों को लेकर जो भी मांग होगी उनको पूरा किया जाएगा। विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। -
प्रो. विनोद छोकर, कुलसचिव, जीजेयू।
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