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एसटीपी टैंक में चार की मौत का मामला: चार घंटे तक तक नहीं निकाले जा सके शव, गुस्साए ग्रामीणों ने की नारेबाजी

Wed, 20 Apr 2022 02:38 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, उकलाना/ हिसार (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, उकलाना/ हिसार (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 20 Apr 2022 02:38 AM IST
सार

मामले में डीसी डॉ. प्रियंका सोनी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी ने चार जान ले ली। 

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Villagers raised slogans for not removing the dead body from the STP tank for four hours in Hisar
राजेश व महेंद्र का फाइल फोटो, घटना स्थल पर जांच करती पुलिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के हिसार जिले के उकलाना क्षेत्र में एसटीपी के टैंक में मंगलवार की सुबह करीब 5.30 बजे जहरीली गैस से चार लोगों की मौत के चार घंटे बाद तक उनके शवों को नहीं निकाला जा सका। मौके पर संसाधनों की कमी को लेकर राहत-बचाव का काम शुरू नहीं हो सका। चार घंटे बाद तक न तो एनडीआरएफ की टीम पहुंची न ही जिला मुख्यालय की टीम पहुंची। गुस्साए लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर अपना गुस्सा जाहिर किया।

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गांव बुढ़ाखेड़ा के स्वर्ग आश्रम के पास बना हुआ यह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। यहां से गुजरने वालों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने कई बार एसटीपी को यहां से स्थानांतरित कर अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग उठाई थी। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के टैंक में उतरे कर्मियों के पास सुरक्षा- बचाव के कोई संसाधन नहीं उपलब्ध नहीं थे। 
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टैंक करीब 40 फुट गहरा था, जिसमें चार से पांच फुट गहराई में कीचड़ जमा हुआ था। सुरेंद्र व राहुल को ठेकेदार ने अनुबंधित कर्मी के तौर पर रखा हुआ था। महेंद्र व राजेश वहां से गुजर रहे थे। सुरेंद्र व राहुल को बचाने के चक्कर में इन दोनों की मौत हो गई।
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घटना की जानकारी मिलते ही अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है। एनडीआरएफ की टीम को सूचना भेजी गई है। एसडीएम बरवाला की अध्यक्षता में जांच कमेटी बना दी गई है। इस मामले की न्यायिक जांच होगी।  -प्रियंका सोनी, डीसी, हिसार।


मास्क, ऑक्सीजन सिलिंडर, सुरक्षा किट.... 
लाल बहादुर खोवाल एडवोकेट ने कहा कि वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की तीन जजों की खंडपीठ ने कहा था कि देश में हर महीने 4 से 5 सफाई कर्मचारियों की मौत इसलिए होती है क्योंकि सीवरेज व मेनहोल में घुसने से पहले मास्क, ऑक्सीजन सिलिंडर व सुरक्षा किट के बिना सफाई कर्मचारियों को गैस चैंबर में उतार दिया जाता है। हरियाणा में 2019 तक इसी वजह से 51 मौतें हो चुकी हैं। मैनुअल स्कैवेंजर्स और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013 के रूप में रोजगार का निषेध की उल्लंघन भी की गई है। बुढाखेड़ा की इस घटना में लापरवाही हुई है। दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।


 

सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में 4 युवाओं की मौत का कारण प्रशासन की लापरवाही रही है। उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट आदेश है कि सीवर सफाई के लिए केवल मशीनों का ही इस्तेमाल हो। वर्कर को सीवर की सफाई के लिये नीचे नही उतारा जाएगा। मगर आदेशों की धज्जियां उड़ाते हूए जानबूझ कर 4 युवाओं को सफाई के लिए नीचे उतारा गया। सेफ्टी टैंक में जहरीली गैस बहुत ज्यादा होने की वजह से 4 परिवारों के चिराग बुझ गए। इस दुखद हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्लू डी मेकेनिकल वर्कर यूनियन मांग करती है कि दोषियों के खिलाफ दफा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही मृतकों के परिवार को 50-50 लाख रुपये मुआवजा व परिवरों में 1-1 स्थायी रोजगार दिलवाया जाए। -नरेश गौतम, जिला प्रधान, मैकेनिकल वर्कर यूनियन

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