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Hisar News: कुलपति से मिलने का समय नहीं मिला तो दरवाजे पर चिपकाया ज्ञापन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 12:52 AM IST
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Unable to secure a meeting with the Vice-Chancellor, a memorandum was pasted on the door.
शोधार्थी निधि और पीएचडी शुल्क कटौती के लिए धरना देते जीजेयू हिसार के छात्रनेता।
हिसार। गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) में यूनिवर्सिटी रिसर्च फेलोशिप (यूआरएफ) बहाल करने और बढ़ी पीएचडी फीस वापस लेने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कुलपति कार्यालय के बाहर धरना दिया।
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ज्ञापन लेने के लिए कोई प्रशासनिक प्रतिनिधि नहीं पहुंचा तो कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन कुलपति के दरवाजे पर चिपका दिया। एबीवीपी ने वीरवार को थाली-चम्मच बजाकर प्रशासन को जगाने का अभियान चलाने का एलान किया है।
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एबीवीपी के जीजेयू शाखाध्यक्ष कमलदीप अत्री ने कहा कि वह स्वयं शोधार्थी हैं और मांगें पूरी होने तक संगठन शोधार्थियों के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि पिछले छह साल से यूआरएफ नहीं दी जा रही है। इससे पहले विद्यार्थियों को हर विषय में उन दो शोधार्थियों को 15 हजार रुपये यूआरएफ दी जाती थी जिन्हें कोई अन्य फेलोशिप नहीं मिल रही हो। उन्होंने इसे डेट ऑफ एडमिशन से शुरू करने और वर्ष 2020 का प्रॉस्पेक्टस लागू करने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि पीएचडी की फीस 9500 से बढ़ाकर 22700 रुपये कर दी गई है, जिसे वापस लिया जाए। छह महीने पहले शोधार्थियों की तत्कालीन कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई से मुलाकात हुई थी। तब उन्होंने छह महीने में फीस कम करने पर सहमति दी थी। इसके बावजूद अब तक फीस कम नहीं की गई। इस संबंध में पहले भी कई कमेटियां बन चुकी हैं लेकिन निर्णय नहीं हुआ।
एबीवीपी ने कहा कि प्रदेश की एमडीयू, सीडीएलयू और हकेंवि जैसी अन्य यूनिवर्सिटी में पीएचडी की फीस जीजेयू की तुलना में एक तिहाई से आधी है। शोधार्थियों से 70 से 90 हजार रुपये तक फीस लेने के बाद भी उन्हें बैठने के लिए कक्ष की सुविधा नहीं मिल रही है।

इकाई मंत्री निकुंज शर्मा ने कहा कि छात्रहित संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस दौरान करण यादव, दीपांशु, मोहित, मनीष, गर्वित और हरदीप अत्री सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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