फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Tourists will know the secrets of Harappan civilization in Rakhigarhi

Hisar News: राखीगढ़ी में पर्यटक जानेंगे हड़प्पाकालीन सभ्यता के रहस्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Sep 2023 11:28 PM IST
विज्ञापन
Tourists will know the secrets of Harappan civilization in Rakhigarhi
नारनौंद (हिसार)। दुनिया के सबसे बड़े हड़प्पाकालीन स्थल में रूप में सुविख्यात राखीगढ़ी को अब आइकोनिक साइट यानी प्रतिष्ठित स्थल के रूप में देखा जाने लगा है। पर्यटक यहां अगले साल से इस हड़प्पाकालीन स्थल पर तब के अवशेषों का दीदार कर अतीत की गहराइयों में गोते लगा सकते हैं। इसके लिए एएसआई के साथ मिलकर हरियाणा सरकार करोड़ों की लागत से तीन एकड़ में इस पुरातात्विक स्थल पर भव्य संग्रहालय बनवा रही है। बता दें कि राखीगढ़ी हिसार मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर है।
विज्ञापन

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संयुक्त महानिदेशक डॉ. संजय मंजुल का कहना है कि राखीगढ़ी को आइकॉनिक साइट के रूप में विकसित किया जाए और यहां पर आने वाले पर्यटकों को कुछ अलग से देखने को मिले। इसलिए खोदाई की जाने वाले साइट को डेढ़-दो साल में आम लोगों के लिए खोला जाएगा। अवशेषों को संरक्षित रखने के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 के बजट में देश में पांच प्रतिष्ठित स्थल बनाने की घोषणा की थी, उनमें राखीगढ़ी भी शामिल है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल 10 सितंबर 2022 को राखीगढ़ी गए थे। इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए थे। संवाद
विज्ञापन



राखीगढ़ी में अब तक पांच बार खोदाई हो चुकी
इतिहासकार डॉ. महेंद्र सिंह बताते हैं कि राखीगढ़ी के टीलों में अभी बहुत सारे रहस्य दबे हुए हैं, जिनका खुलासा अगले महीने खोदाई के दौरान हो सकता है। राखीगढ़ी में मिले 5 हजार साल पुराने कंकाल की डीएनए रिपोर्ट से यह भी खुलासा हो चुका है कि आर्य भारत के ही मूल निवासी थे, न कि बाहर से आए थे। इस प्राचीनतम महानगर की पांच बार की खोदाई में कई रहस्यों से पर्दा उठने के बाद अब इसे हड़प्पाकालीन लोगों की जीवन पद्धति के चक्र को समझने के लिए राखीगढ़ी में अब तक पांच बार खोदाई हो चुकी है। खेती से लेकर शहरीकरण तक के रहस्यों को जानने के लिए अक्तूबर माह में छठी बार इस स्थल की खोदाई शुरू करने की तैयारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन




हड़प्पा इंजीनियरिंग से मेल खाती है आज की सिविल इंजीनियरिंग

शुरू में मकान कच्ची ईंटों की दीवारों से बनाए जाते थे लेकिन बाद में धीरे-धीरे पक्की ईंटों से मकान बनने शुरू हो गए थे। लेकिन उस समय मे भी गंदे पानी की निकासी के लिए पक्की ईंटों की नालियों के सबूत यहां पर मिले हैं। नाली की दूसरी तरफ मकानों के बीच गली भी मिली है। साइट नंबर तीन पर एक 18 फुट लंबी चौड़ी पक्की ईंटों की दीवार माैजूद है। दीवार को बनाने के लिए मिट्टी की गारा का प्रयोग किया गया है। लेकिन हजारों वर्ष बीत जाने के बाद भी आज भी यह दीवार चूने जैसी मजबूती की तरह खड़ी हुई है।


इंडस्ट्री के रूप में राखीगढ़ी था हब

राखीगढ़ी में खोदाई के दौरान फैक्ट्रियों के अवशेष मिले हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब पांच हजार साल पहले भी राखीगढ़ी के अंदर फैक्ट्रियों से तैयार सामान का दूसरे देशों तक व्यापार होता था। खोदाई के दौरान यहां पर बनाए जाने वाले सामान को तैयार करने के लिए अनेक प्रकार की भट्ठियों के भी अवशेष मिले हैं। जिससे यह साबित होता है कि राखीगढ़ी एक बड़े महानगर के साथ-साथ फैक्ट्रियों का हब भी था। दूसरे देश तक सामान को ले जाने के लिए हाथी, घोड़ों व अन्य पशुओं का प्रयोग किया जाता था।



विश्व पर्यटन दिवस के उपलक्ष्य में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम रखा है। पुरातत्व विभाग की राखीगढ़ी समेत सभी साइटों की साफ सफाई रखने का विशेष अभियान चलाया गया है। साइटों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र की भी सफाई की जाएगी।
- अनिल तिवारी, उप अधीक्षक, पुरातत्व विभाग, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article