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Hisar News: बच्चों को अकेला नहीं छोड़ा पर वे सदा के लिए छोड़ गए

Tue, 24 Dec 2024 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Tue, 24 Dec 2024 12:55 AM IST
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They did not leave the children alone, but they left them forever
हिसार। भगवानदास और मुरारीलाल के परिवार के लिए रविवार रात काल बनकर आई। भट्ठे के पास ही बनी झुग्गियों में रात में बच्चों को अकेला छोड़ने के बजाय वे अपने साथ ही भट्ठे पर ले आए पर नियति को कुछ और मंजूर था।
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करीब तीन घंटे पहले बच्चों को सुलाकर आए थे पर वे हमेशा के लिए सो गए। भगवान दास के तीनों बच्चे काल का ग्रास बन गए, जबकि मुरारीलाल की तीन माह की बच्ची मौत हो गई। दो और बेटियां जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। दोनों की पत्नियों के रो-रोकर आंखे पथरा गईं हैं। भगवानदास की तो दुनिया ही उजड़ गई। दोनों परिवार आपस में रिश्तेदार हैं।
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जिला नागरिक अस्पताल पहुंचे मुरारीलाल ने बताया कि हादसे के बाद मलबा हटाने के लिए लोग भट्ठे पर ही खड़ी जेसीबी की तरफ दौड़े, लेकिन चालक नहीं था। करीब 20 मिनट बाद वह आया तब बचाव कार्य शुरू हो सका। जेसीबी चालक समय पर आ जाता तो चारों बच्चों की जान बच सकती थी। देरी होने के कारण मलबा हटाने में काफी समय लग गया। मलबा हटाने तक भांजे सूरज, विवेक और बेटी नंदनी की सांसें थम चुकी थीं।
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15 दिन पहले परिवार सहित आया था भगवान दास :
बदायूं जिले के बैरमईबुजरम निवासी भगवान दास ने बताया कि वह 15 दिन पहले तीन बच्चों और पत्नी के साथ यहां मजदूरी करने आया था। रविवार रात भी ईंट भट्ठे पर काम चल रहा था।

झुग्गी में अकेला छोड़ने की बजाय पत्नी दोनों बेटों और बेटी को भट्ठे पर ही ले आई थी। तीनों को चिमनी की दीवार के साथ चारपाई पर सुलाया हुआ था। पास में ही दूसरी चारपाई पर साले मुरारीलाल की तीनों बेटियां सो रही थीं।


एक बेटी की मौत, दो उपचाराधीन

मुरारीलाल ने बताया कि वह दो माह पहले तीन बेटियों और पत्नी कमलेश के साथ ईंट भट्ठे पर काम करने आया था। तीन माह की बेटी निशा की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। गौरी और हिमांशी की हालत गंभीर है। दोनों के सिर और चेहरे पर गहरी चोटें लगी हैं। जलालपुर का ही रहने वाला राजेश भी मलबे के नीचे दबने से घायल है। नागरिक अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में एक बेड पर घायल बेटियों के साथ बैठी कमलेश का रो-रोकर बुरा हाल था। उसकी आंखें सूज चुकी थीं। उसने बताया कि काश सभी बच्चों को झुग्गी में ही सुला देते तो यह दिन न देखना पड़ता।
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