{"_id":"615ddbba8ebc3efaa6443d9c","slug":"there-is-no-place-to-keep-animals-left-in-the-cow-sanctuary-now-the-help-of-cow-shelters-should-be-taken-hisar-news-hsr6137514183","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोअभयारण्य में नहीं बची पशु रखने की जगह, अब गोशालाओं की ली जाए मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोअभयारण्य में नहीं बची पशु रखने की जगह, अब गोशालाओं की ली जाए मदद
विज्ञापन
बेसहारा पशुओं को नगर निगम कर्मचारियों ने पकड़ा।
- फोटो : Hisar
हिसार। शहर से पशु पकड़ने के लिए अब नगर निगम ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि अब उनके पास और पशु रखने की क्षमता नहीं है। पशु रखने के लिए गोशालाओं की मदद ली जाए।
जिला प्रशासन ने मंगलवार को बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए विभिन्न विभागों के साथ बैठक की। अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) स्वप्रिल रविंद्रा पाटिल ने की। निगम अधिकारियों की बात सुन एडीसी ने पशुपालन विभाग से सभी गोशालाओं की बैठक बुलाने को कहा। हालांकि बैठक में सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आए। उधर, बैठक में गोसेवा आयोग के सदस्य भी नहीं पहुंचे। बता दें कि शहर में बेसहारा पशुओं की संख्या काफी बढ़ चुकी है। पिछले दिनों पशुओं के कारण कई हादसे भी हुए थे। इन हादसों में एक बुजुर्ग को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी।
बैठक में एडीसी ने कहा कि शहर में बेसहारा पशुओं की संख्या काफी बढ़ चुकी है। इनकी संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। निगम प्रशासन क्या कर रहा है। इस पर निगम के अधिकारी ने कहा कि वह हर माह 400-450 पशु पकड़ रहे हैं। उनके पास एक ही गाड़ी है। मगर अब गोअभयारण्य में भी जगह नहीं बची है। यहां 500-600 पशु और रखे जा सकते हैं। अब तो पशु रखने के लिए गोशालाओं की मदद लेनी पड़ेगी।
विज्ञापन
गांव से शहर में छोड़े जा रहे पशु
निगम अधिकारी ने कहा कि शहर से कितने भी पशु पकड़ लो, जब तक गांव से शहर में पशु आने बंद नहीं होंगे, तब तक समस्या का समाधान नहीं होगा। इस पर एडीसी ने कहा कि नाकों पर कमेटी के कर्मचारी तैनात कर दो। निगम अधिकारी बोले कि नाकों पर तैनात पुलिस कर्मचारी इसे रोक सकते हैं। एडीसी ने कहा कि पुलिस कर्मचारी पशुओं को कैसे रोक सकते हैं। एडीसी ने कहा कि नाकों पर कैटल कैचर लगवा दो। इस पर निगम अधिकारी ने कहा कि यह इस समस्या का समाधान नहीं है।
निगम : हर गांव में गोशाला खुले, डीडीपीओ बोले- एक्ट में नहीं है
बैठक में एडीसी ने समस्या के समाधान को लेकर सुझाव मांगे तो निगम अधिकारी ने कहा कि प्रत्येक गांव में गोशाला खोली जाए ताकि उस गांव के पशु उस गोशाला में रखे जा सके। वैसे भी ज्यादातर गांवों के पास पंचायती जमीन है, जिस पर गोशाला बनाई जा सकती है। डीडीपीओ बोले कि गांवों में गोशाला खोलने का कोई प्रावधान विभाग के एक्ट में नहीं है। यह सुनकर पशुपालन विभाग ने एक्ट की कॉपी एडीसी को दिखाई। इसके बाद डीडीपीओ ने कहा कि विभाग के पास बजट नहीं है।
नहीं निकला समाधान तो बोले- पशुओं के सींगों पर रिफ्लेक्टर लगा दो
बैठक में जब समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला तो एडीसी ने कहा कि पशुओं पर कोई ऐसा रंग लगा दो, जिससे वह दूर से नजर। इससे कम से कम हादसे तो कम होंगे। यह सुनकर अधिकारियों ने कहा कि पशुओं के सींगों पर रिफ्लेक्टर लगाए जा सकते हैं। बैठक में पशुपालन, पंचायत, नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
जिला प्रशासन ने मंगलवार को बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए विभिन्न विभागों के साथ बैठक की। अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) स्वप्रिल रविंद्रा पाटिल ने की। निगम अधिकारियों की बात सुन एडीसी ने पशुपालन विभाग से सभी गोशालाओं की बैठक बुलाने को कहा। हालांकि बैठक में सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आए। उधर, बैठक में गोसेवा आयोग के सदस्य भी नहीं पहुंचे। बता दें कि शहर में बेसहारा पशुओं की संख्या काफी बढ़ चुकी है। पिछले दिनों पशुओं के कारण कई हादसे भी हुए थे। इन हादसों में एक बुजुर्ग को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी।
विज्ञापन
बैठक में एडीसी ने कहा कि शहर में बेसहारा पशुओं की संख्या काफी बढ़ चुकी है। इनकी संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। निगम प्रशासन क्या कर रहा है। इस पर निगम के अधिकारी ने कहा कि वह हर माह 400-450 पशु पकड़ रहे हैं। उनके पास एक ही गाड़ी है। मगर अब गोअभयारण्य में भी जगह नहीं बची है। यहां 500-600 पशु और रखे जा सकते हैं। अब तो पशु रखने के लिए गोशालाओं की मदद लेनी पड़ेगी।
विज्ञापन
गांव से शहर में छोड़े जा रहे पशु
निगम अधिकारी ने कहा कि शहर से कितने भी पशु पकड़ लो, जब तक गांव से शहर में पशु आने बंद नहीं होंगे, तब तक समस्या का समाधान नहीं होगा। इस पर एडीसी ने कहा कि नाकों पर कमेटी के कर्मचारी तैनात कर दो। निगम अधिकारी बोले कि नाकों पर तैनात पुलिस कर्मचारी इसे रोक सकते हैं। एडीसी ने कहा कि पुलिस कर्मचारी पशुओं को कैसे रोक सकते हैं। एडीसी ने कहा कि नाकों पर कैटल कैचर लगवा दो। इस पर निगम अधिकारी ने कहा कि यह इस समस्या का समाधान नहीं है।
निगम : हर गांव में गोशाला खुले, डीडीपीओ बोले- एक्ट में नहीं है
बैठक में एडीसी ने समस्या के समाधान को लेकर सुझाव मांगे तो निगम अधिकारी ने कहा कि प्रत्येक गांव में गोशाला खोली जाए ताकि उस गांव के पशु उस गोशाला में रखे जा सके। वैसे भी ज्यादातर गांवों के पास पंचायती जमीन है, जिस पर गोशाला बनाई जा सकती है। डीडीपीओ बोले कि गांवों में गोशाला खोलने का कोई प्रावधान विभाग के एक्ट में नहीं है। यह सुनकर पशुपालन विभाग ने एक्ट की कॉपी एडीसी को दिखाई। इसके बाद डीडीपीओ ने कहा कि विभाग के पास बजट नहीं है।
नहीं निकला समाधान तो बोले- पशुओं के सींगों पर रिफ्लेक्टर लगा दो
बैठक में जब समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला तो एडीसी ने कहा कि पशुओं पर कोई ऐसा रंग लगा दो, जिससे वह दूर से नजर। इससे कम से कम हादसे तो कम होंगे। यह सुनकर अधिकारियों ने कहा कि पशुओं के सींगों पर रिफ्लेक्टर लगाए जा सकते हैं। बैठक में पशुपालन, पंचायत, नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे।