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Hisar News: प्राकृतिक खेती से नहीं कोई नुकसान, लागत कम होगी और मिट्टी सेहतमंद बनी रहेगी
Fri, 06 Jun 2025 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Fri, 06 Jun 2025 12:36 AM IST
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प्रकृतिक खेती सम्मेलन में मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुजरात के राज्यपाल आचार्य दे
हिसार। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती करना समय की मांग है। अत्यधिक रसायन युक्त अनाज-फल और सब्जियां खाने से मानव में हिंसक प्रवृत्ति और आक्रामकता बढ़ रही है। प्राकृतिक खेती करने से कोई नुकसान नहीं है। इससे खेती की लागत कम होगी और मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है। वे वीरवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के इंदिरा गांधी सभागार में आयोजित प्राकृतिक खेती सम्मेलन में किसानों को संबोधित कर रहे थे।
विशिष्ट अतिथि के तौर पर पहुंचे राज्यपाल देवव्रत ने कहा कि देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों के एक सर्वे में पाया गया कि जहां डीएपी व यूरिया का खेती में अधिक इस्तेमाल किया जाता है, वहां अन्य क्षेत्रों की तुलना में कैंसर के तीन गुणा अधिक रोगी मिले। अत्यधिक रासायनिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी बंजर हो रही है। यूनेस्को की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी गति से रासायनिक खादों का इस्तेमाल होता रहा तो अगले 40 साल में खेती योग्य सारी जमीन बंजर हो जाएगी। पिछले साल केंद्र सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपये का यूरिया- डीएपी आयात किया था। इससे पता चलता है कि खेती रसायनों पर कितनी निर्भर हो चुकी है और अधिक पैदावार के लालच में किसान इनका अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहा है।
गुजरात के हर गांव में प्राकृतिक खेती
राज्यपाल ने कहा, गुजरात में 9 लाख और आंध्रप्रदेश में 10 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। गुजरात के 18 हजार गांवों में से एक भी ऐसा नहीं है, जहां प्राकृतिक खेती न होती हो। विश्व की पहली प्राकृतिक खेती यूनिवर्सिटी गुजरात में खोली गई है। यूपी में भी जल्द ही ऐसी यूनिवर्सिटी खोलने की तैयारी है।
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प्राकृतिक खेती जल संरक्षण में भी सहायक
राज्यपाल देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्यवर्धक फसल पैदावार का माध्यम है, बल्कि जल संरक्षण में भी सहायक है। इससे पोषणयुक्त खाद्यान्न मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू किए गए ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इसके तहत केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि देश के एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए। इस मिशन के अंतर्गत वर्ष 2025 -26 के लिए 1481 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
आत्मनिर्भर हुए हैं पर बड़ी कीमत चुकानी पड़ी हैसीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि खाद्यान्न पैदावार में देश आत्मनिर्भर तो बना है, लेकिन इसके लिए हमें बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। रासायनिक खादों के उपयोग से भूमि, जल और वायु दूषित हो रही है। हमारी आने वाली पीढि़यां स्वस्थ रहे, इसके लिए हमें प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ना होगा। सीएम ने बताया कि विकसित कृषि संकल्प अभियान का शुभारंभ 29 मई को कुरुक्षेत्र से किया गया है और 12 जून तक चलेगा।
सीएम ने दो पुस्तकों का विमोचन किया
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्यपाल आचार्य देवव्रत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। सीएम ने किसानों से आह्वान किया कि सभी मिलकर हरियाणा को प्राकृतिक खेती का नया मॉडल बनाने का संकल्प लें। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से तैयार दो पुस्तकों का विमोचन किया।
गाय घर के अंदर थी तब बीमारियां घर से बाहर थीं: राणा
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि पहले जब गाय घर के अंदर होती थी तो बीमारियां घर से बाहर थीं। गाय सड़कों पर आ गई तो बीमारियां घर के अंदर आ गई हैं। गाय को दोबारा से घर के अंदर ले लो, बीमारियां खुद घर से बाहर हो जाएंगी। इस सम्मेलन से किसान प्रेरणा लेकर जाएं कि वे प्राकृतिक खेती करेंगे। सम्मेलन में पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा, हिसार की विधायक सावित्री जिंदल, हांसी विधायक विनोद भ्याना, नलवा विधायक रणधीर पनिहार, पूर्व मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजा शेखर वुंडर, एचएयू के कुलपति प्रो. डॉ बीआर कांबोज, मेयर प्रवीण पोपली व पद्मश्री किसान हरिओम भी मौजूद रहे।
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विशिष्ट अतिथि के तौर पर पहुंचे राज्यपाल देवव्रत ने कहा कि देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों के एक सर्वे में पाया गया कि जहां डीएपी व यूरिया का खेती में अधिक इस्तेमाल किया जाता है, वहां अन्य क्षेत्रों की तुलना में कैंसर के तीन गुणा अधिक रोगी मिले। अत्यधिक रासायनिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी बंजर हो रही है। यूनेस्को की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी गति से रासायनिक खादों का इस्तेमाल होता रहा तो अगले 40 साल में खेती योग्य सारी जमीन बंजर हो जाएगी। पिछले साल केंद्र सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपये का यूरिया- डीएपी आयात किया था। इससे पता चलता है कि खेती रसायनों पर कितनी निर्भर हो चुकी है और अधिक पैदावार के लालच में किसान इनका अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहा है।
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गुजरात के हर गांव में प्राकृतिक खेती
राज्यपाल ने कहा, गुजरात में 9 लाख और आंध्रप्रदेश में 10 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। गुजरात के 18 हजार गांवों में से एक भी ऐसा नहीं है, जहां प्राकृतिक खेती न होती हो। विश्व की पहली प्राकृतिक खेती यूनिवर्सिटी गुजरात में खोली गई है। यूपी में भी जल्द ही ऐसी यूनिवर्सिटी खोलने की तैयारी है।
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प्राकृतिक खेती जल संरक्षण में भी सहायक
राज्यपाल देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्यवर्धक फसल पैदावार का माध्यम है, बल्कि जल संरक्षण में भी सहायक है। इससे पोषणयुक्त खाद्यान्न मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू किए गए ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इसके तहत केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि देश के एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए। इस मिशन के अंतर्गत वर्ष 2025 -26 के लिए 1481 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
आत्मनिर्भर हुए हैं पर बड़ी कीमत चुकानी पड़ी हैसीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि खाद्यान्न पैदावार में देश आत्मनिर्भर तो बना है, लेकिन इसके लिए हमें बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। रासायनिक खादों के उपयोग से भूमि, जल और वायु दूषित हो रही है। हमारी आने वाली पीढि़यां स्वस्थ रहे, इसके लिए हमें प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ना होगा। सीएम ने बताया कि विकसित कृषि संकल्प अभियान का शुभारंभ 29 मई को कुरुक्षेत्र से किया गया है और 12 जून तक चलेगा।
सीएम ने दो पुस्तकों का विमोचन किया
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्यपाल आचार्य देवव्रत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। सीएम ने किसानों से आह्वान किया कि सभी मिलकर हरियाणा को प्राकृतिक खेती का नया मॉडल बनाने का संकल्प लें। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से तैयार दो पुस्तकों का विमोचन किया।
गाय घर के अंदर थी तब बीमारियां घर से बाहर थीं: राणा
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि पहले जब गाय घर के अंदर होती थी तो बीमारियां घर से बाहर थीं। गाय सड़कों पर आ गई तो बीमारियां घर के अंदर आ गई हैं। गाय को दोबारा से घर के अंदर ले लो, बीमारियां खुद घर से बाहर हो जाएंगी। इस सम्मेलन से किसान प्रेरणा लेकर जाएं कि वे प्राकृतिक खेती करेंगे। सम्मेलन में पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा, हिसार की विधायक सावित्री जिंदल, हांसी विधायक विनोद भ्याना, नलवा विधायक रणधीर पनिहार, पूर्व मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजा शेखर वुंडर, एचएयू के कुलपति प्रो. डॉ बीआर कांबोज, मेयर प्रवीण पोपली व पद्मश्री किसान हरिओम भी मौजूद रहे।