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Hisar News: जूतियों ने हांसी को देशभर में दी अलग पहचान

Sun, 17 May 2026 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Sun, 17 May 2026 01:32 AM IST
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The shoes gave Hansi a distinct identity across the country.
हांसी में बनीं जूतियां। 
हांसी। हांसी की प्रसिद्धि केवल मात्र ऐतिहासिक किले व पेड़े से नहीं है। वर्तमान में हांसी की बनी जूती देशभर में प्रसिद्ध है। राजस्थान से काम ढूंढने की चाह में 70 वर्ष पहले हांसी आए जीनगर समाज के लोगों ने जूती के कारोबार को बढ़ाया और मेहनत करके जूतियां बनाने का काम शुरू कर किया। हर दिन हांसी से करीब 50 हजार जूतियां देश के अलग-अलग कोने में जाती हैं।
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अभी बड़सी गेट के बाहर व बस स्टैंड के पीछे के क्षेत्र को मोची मोहल्ला व अमर मार्केट कहा जाता है। यहीं पर जूतियों का कारोबार होता है। जूती बनाने वाले लोग भी परिवार सहित यहां पर रहते हैं। हांसी में जूतियों को बनाने से लेकर कारोबार तक मूल रूप से राजस्थान के जयपुर, जोधपुर व अन्य शहरों के साथ-साथ पटियाला, आगरा, कानपुर के लोग करते हैं।
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इन परिवारों की तीन से चार पीढ़ियां यहां जूतियां बनाने के काम में लगी हुई हैं। सबसे ज्यादा राजस्थान के जीनगर समाज के लोग यहां जूतियां बनाते हैं। यह समाज मुख्यत: अपनी कारीगरी को लेकर प्रसिद्ध हैं। राजस्थान से वर्ष 1950 से 2000 के बीच में यह लोग परिवार सहित यहां आए। उस समय यहां पर चमड़े के जूते व जूतियां बनाने का काम था। उन्होंने भी यहां आकर जूतियां बनानी शुरू की और इसमें अपनी कारीगरी दिखाई।
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यहां कारोबार को बढ़ता देख राजस्थान से कई परिवार यहां आकर बसे और इस काम में लग गए। धीरे-धीरे शहर की पहचान भी जूतियों को लेकर बनने लगी। फिलहाल यहां राजस्थान से आए परिवारों की तीसरी व चौथी पीढ़ी काम में लगी हुई है। अब जूतियों के मामले में हांसी की दूसरे राज्यों में अलग पहचान है।

हांसी में प्रति महीने 8 से 10 लाख जूतियां बनती हैं। यहां की बनी जूतियां पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, गुजरात, महाराष्ट्र व दक्षिण के राज्यों में भी जाती हैं। जूतियों के कारोबार से करीब 600 परिवार जुड़े हुए हैं। जूतियां बनाने का काम विशेष तौर से अगस्त से मई तक रहता है।


लेडीज सूटों के ट्रेंड के हिसाब से बनती हैं जूतियां
हमारे समाज के लोग करीब 50 वर्ष पहले यहां आए थे। मेरे मामा 40 वर्ष पहले आए, फिर हम 26 वर्ष पूर्व आए। यहां जूतियों का कारोबार शुरू किया। पहले बड़सी गेट के समीप छोटे-छोट खोखे होते थे जिनमें लोग जूती बनाने का काम करते थे। तब सिलाई से चमड़े की जूती बनती थी। अब रेक्सिन की जूती बनती है। कई प्रदेशों में हांसी से बनी जूतियां जाती हैं। लेडिज सूटों के ट्रेंड के हिसाब से जूती बनाई जाती है। - राजू चायल, जूती कारोबारी।
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