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Hisar News: आभा से जुड़ा आरसीएच पोर्टल, मातृ-शिशु का इलाज और पहचान आसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Sep 2025 02:29 AM IST
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The RCH portal linked to Abha makes it easier to treat and identify maternal and child health.
हिसार। मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) कार्यक्रम चलाया है। इसके तहत आरसीएच पोर्टल का नया वर्जन 2.0 लाॅन्च कर इसे आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) आईडी से जोड़ा गया है। इससे देशभर में कहीं भी मातृ-शिशु की पहचान तत्काल हो सकेगी।
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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत डिजिटल स्वास्थ्य आईडी आभा कहलाती है, जिसमें 14 अंकों की विशिष्ट संख्या से लोग अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से स्टोर और शेयर कर सकते हैं। इसके तहत हर एएनएम (स्वास्थ्यकर्मी) गर्भवती का पंजीकरण कर मातृ-शिशु की आरसीएच आईडी जारी कर रहीं हैं।
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इस आईडी के आधार पर हर गर्भवती को किसी भी सरकारी अस्पताल में मुफ्त अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलेगी। इसी जांच रिपोर्ट आधार पर उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान की जाएगी। यह आईडी हर विवाहिता के लिए बनाई जाएगी और जैसे ही गर्भावस्था की पुष्टि होगी, लाभार्थी को उनके मोबाइल नंबर पर एक एसएमएस भेजा जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के नोडल अधिकारी डॉ. तरुण ने बताया कि आरसीएच पोर्टल के पहले वर्जन में सिर्फ गर्भवती का डिजिटल डाटा था, लेकिन अब वर्जन 2.0 लॉन्च होने से हर गर्भवती का इलाज एक ही आईडी से पूरे देश में किया जा सकेगा।
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इसके अलावा, विभागीय कंप्यूटर ऑपरेटर्स को पहले चरण का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। जिले में गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों की जांच के लिए चार मोबाइल हेल्थ यूनिट (एमएचयू) संचालित की जा रही हैं, जो हिसार, हांसी, बरवाला और सीसवाल क्षेत्रों में प्रत्येक माह 24 दिन काम करती हैं।
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जिले में प्रसव की स्थिति
पिछले साल जिले में कुल 33,429 प्रसव हुए थे, जबकि इस साल आठ महीने में ही 32,109 प्रसव हो चुके हैं। इनमें से 2,900 प्रसव दूसरे राज्यों की महिलाओं के हुए, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों की 6,911 गर्भवती महिलाओं ने हिसार जिले के अस्पतालों में प्रसव कराया था। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए विभाग ने सहेली कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत पहली बेटी के जन्म के बाद दूसरी बार गर्भवती महिला की देखभाल की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ महिला एवं बाल कल्याण विभाग के कर्मचारियों को दी जा रही है।

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जिले में प्रसव और बच्चों के जन्म का आंकड़ा हर सप्ताह सिविल रजिस्ट्रेशन पोर्टल (सीआरएस) पर अपडेट किया जा रहा है। पिछले माह 18 से 24 अगस्त तक जिले में 325 बालक और 319 बालिकाएं जन्मीं। इसके बावजूद जिले में 31 अगस्त तक प्रति हजार बालकों के सापेक्ष बालिका जन्म का औसत 903 रहा। - डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन, हिसार।
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