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Hisar News: अब दावों से नहीं, प्रमाणपत्र से परखी जाएगी थाली की शुद्धता
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हिसार। आपकी थाली में परोसा गया भोजन कितना शुद्ध है, इसकी जानकारी अब जांच रिपोर्ट और प्रमाणपत्र से मिल सकेगी। हिसार में प्रस्तावित ऑर्गेनिक फल-सब्जी मंडी में उत्पादों की जांच के लिए प्रयोगशाला बनाई जाएगी। यहां जैविक और प्राकृतिक खेती से तैयार अनाज, फल व सब्जियों की टेस्टिंग होगी।
रिपोर्ट में उत्पादों में रासायनिक कीटनाशकों और जहरीले पदार्थों के अवशेषों की मात्रा का पता चलेगा। इससे ग्राहकों को उत्पादों की शुद्धता के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन की शुद्धता को लेकर लोगों के मन में संशय बना रहता है। उन्हें चिंता रहती है कि सब्जियों, अनाज और दूध में रासायनिक कीटनाशकों व कृत्रिम खाद का कितना असर है। अभी प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती के उत्पादों की जांच के लिए ऐसी प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ग्राहकों को किसानों के दावों पर भरोसा करके ऊंचे दामों पर उत्पाद खरीदने पड़ते हैं।
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प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर रही है। इसमें कृत्रिम उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना फसल तैयार की जाती है। प्रदेश में करीब 2500 एकड़ में प्राकृतिक खेती हो रही है, जिसमें लगभग 200 एकड़ क्षेत्र हिसार जिले में है। अभी प्राकृतिक उत्पादों के लिए प्रमाणपत्र की सुविधा नहीं है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वर्ष 2025 में एचएयू में आयोजित कार्यक्रम में हिसार में ऑर्गेनिक मंडी बनाने की घोषणा की थी। इसमें प्रस्तावित प्रयोगशाला में जांच के बाद अनाज, फल और सब्जियों को बिक्री की मान्यता मिल सकेगी।
विश्व खाद्य दिवस भी खेत से थाली तक भोजन की सुरक्षा और पौष्टिकता सुनिश्चित करने के महत्व की याद दिलाता है। पौष्टिक आहार अपनाना, भोजन की बर्बादी रोकना, पर्यावरण के अनुकूल खानपान की आदतें विकसित करना और खाद्य सुरक्षा से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर ध्यान देना स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी है।
बिना कीटनाशकों के भी खेती की जा सकती है। हम डॉ. सुरेंद्र दलाल कीट साक्षरता मिशन के तहत लोगों को जागरूक कर रहे हैं। कपास की खेती को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया है। कीटनाशकों का उपयोग किए बिना भी सामान्य से अधिक उत्पादन मिल सकता है। कुछ कीटनाशक कंपनियां किसानों को डराकर अपना कारोबार कर रही हैं। कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से फसल के साथ पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है।
- डॉ. बलजीत भ्याण, संयोजक, जहरमुक्त खेती अभियान।
प्रदेश सरकार की ओर से हिसार में प्रस्तावित ऑर्गेनिक फल-सब्जी मंडी में प्रयोगशाला बनाई जाएगी। यहां जांच के बाद ही फल-सब्जियों को बिक्री की मान्यता दी जाएगी। प्रमाणपत्र देखकर ग्राहक इन उत्पादों को खरीद सकेंगे और उन्हें इनके रासायनिक अवशेषों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
- डॉ. आरपी सिहाग, अतिरिक्त निदेशक, कृषि विभाग, हरियाणा।
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रिपोर्ट में उत्पादों में रासायनिक कीटनाशकों और जहरीले पदार्थों के अवशेषों की मात्रा का पता चलेगा। इससे ग्राहकों को उत्पादों की शुद्धता के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
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अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन की शुद्धता को लेकर लोगों के मन में संशय बना रहता है। उन्हें चिंता रहती है कि सब्जियों, अनाज और दूध में रासायनिक कीटनाशकों व कृत्रिम खाद का कितना असर है। अभी प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती के उत्पादों की जांच के लिए ऐसी प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ग्राहकों को किसानों के दावों पर भरोसा करके ऊंचे दामों पर उत्पाद खरीदने पड़ते हैं।
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प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर रही है। इसमें कृत्रिम उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना फसल तैयार की जाती है। प्रदेश में करीब 2500 एकड़ में प्राकृतिक खेती हो रही है, जिसमें लगभग 200 एकड़ क्षेत्र हिसार जिले में है। अभी प्राकृतिक उत्पादों के लिए प्रमाणपत्र की सुविधा नहीं है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वर्ष 2025 में एचएयू में आयोजित कार्यक्रम में हिसार में ऑर्गेनिक मंडी बनाने की घोषणा की थी। इसमें प्रस्तावित प्रयोगशाला में जांच के बाद अनाज, फल और सब्जियों को बिक्री की मान्यता मिल सकेगी।
विश्व खाद्य दिवस भी खेत से थाली तक भोजन की सुरक्षा और पौष्टिकता सुनिश्चित करने के महत्व की याद दिलाता है। पौष्टिक आहार अपनाना, भोजन की बर्बादी रोकना, पर्यावरण के अनुकूल खानपान की आदतें विकसित करना और खाद्य सुरक्षा से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर ध्यान देना स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी है।
बिना कीटनाशकों के भी खेती की जा सकती है। हम डॉ. सुरेंद्र दलाल कीट साक्षरता मिशन के तहत लोगों को जागरूक कर रहे हैं। कपास की खेती को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया है। कीटनाशकों का उपयोग किए बिना भी सामान्य से अधिक उत्पादन मिल सकता है। कुछ कीटनाशक कंपनियां किसानों को डराकर अपना कारोबार कर रही हैं। कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से फसल के साथ पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है।
- डॉ. बलजीत भ्याण, संयोजक, जहरमुक्त खेती अभियान।
प्रदेश सरकार की ओर से हिसार में प्रस्तावित ऑर्गेनिक फल-सब्जी मंडी में प्रयोगशाला बनाई जाएगी। यहां जांच के बाद ही फल-सब्जियों को बिक्री की मान्यता दी जाएगी। प्रमाणपत्र देखकर ग्राहक इन उत्पादों को खरीद सकेंगे और उन्हें इनके रासायनिक अवशेषों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
- डॉ. आरपी सिहाग, अतिरिक्त निदेशक, कृषि विभाग, हरियाणा।