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हड़प्पा सभ्यता में हुई थी प्रजातांत्रिक व्यवस्था की शुरुआत : बसंत शिंदे
Sun, 25 Oct 2026 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 25 Oct 2026 01:26 AM IST
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नारनौंद। डेक्कन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात पुरातत्वविद डॉ. बसंत शिंदे ने कहा कि सरस्वती-सिंधु सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। इस सभ्यता के करीब 8,000 वर्ष पुराने होने के प्रमाण मिले हैं। नगरीय जीवन के शुरुआती विकास से लेकर सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक परंपराओं तक, इस सभ्यता का मानव इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि हड़प्पा सभ्यता के लोगों की जीवनशैली और परंपराओं से जुड़े अनेक पहलू आज भी हमारे समाज में दिखाई देते हैं। डॉ. बसंत शिंदे शनिवार को अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान राखीगढ़ी में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरस्वती-सिंधु सभ्यता के अध्ययन से भारतीय उपमहाद्वीप के प्राचीन इतिहास, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आती हैं। राखीगढ़ी जैसे पुरातात्विक स्थल इस समृद्ध विरासत को समझने में विशेष महत्व रखते हैं।
उन्होंने कहा कि हड़प्पा सभ्यता में सामुदायिक स्तर पर निर्णय लेने और सामाजिक व्यवस्था संचालित करने की परंपराएं विकसित थीं। गांवों में ग्रामीण विकास तथा सामूहिक हितों से जुड़े कार्यों के लिए कुछ लोगों का चयन किया जाता था और वे मिलकर गांव की दिशा तय करने में भूमिका निभाते थे।
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उनके अनुसार, इस प्रकार की व्यवस्थाओं को प्रजातांत्रिक सोच के शुरुआती स्वरूप के रूप में समझा जा सकता है। उन्होंने हड़प्पा सभ्यता के सामाजिक संगठन को प्राचीन समाज की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। डॉ. शिंदे ने कहा कि हड़प्पा सभ्यता के लोग शारीरिक बनावट में आज के लोगों जैसे ही दिखाई देते थे। उन्होंने प्राचीन डीएनए से संबंधित अध्ययनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे अतीत की आबादी और वर्तमान भारतीय जनसमूहों के बीच संबंधों को समझने में मदद मिलती है। उन्होंने आर्यों की उत्पत्ति और भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन आबादी से जुड़े विषयों पर भी अपनी बात रखी और कहा कि भारतीय इतिहास को समझने के लिए पुरातात्विक साक्ष्यों और वैज्ञानिक अध्ययनों का महत्व बहुत अधिक है।
उन्होंने हड़प्पा सभ्यता की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि नमस्ते करने की परंपरा, योग और तंदूर जैसी जीवनशैली से जुड़ी परंपराओं के संदर्भ भी इस सभ्यता के अध्ययन में महत्वपूर्ण हैं। इन परंपराओं और प्राचीन जीवनशैली के बीच संबंधों को समझना हमारी सांस्कृतिक निरंतरता को जानने का एक रोचक माध्यम है।
उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी में हुए उत्खनन और अन्य पुरातात्विक अनुसंधानों से प्राचीन समाज के रहन-सहन, तकनीकी ज्ञान और सांस्कृतिक विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। डॉ. शिंदे ने कहा कि राखीगढ़ी की विशेषता केवल इसका पुरातात्विक महत्व ही नहीं बल्कि यह भी है कि यहां से प्राप्त साक्ष्य मानव सभ्यता के विकास की कहानी को समझने में सहायता करते हैं। इस क्षेत्र में हुए अनुसंधानों से सरस्वती-सिंधु सभ्यता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश पड़ा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से राखीगढ़ी में विश्वस्तरीय संग्रहालय विकसित किया जा रहा है। यह संग्रहालय लोगों को प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और पुरातात्विक खोजों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों और पर्यटकों को राखीगढ़ी की ऐतिहासिक महत्ता को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। इस अवसर पर पुरातत्वविद कुलदीप अग्निहोत्री व मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती भी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि हड़प्पा सभ्यता में सामुदायिक स्तर पर निर्णय लेने और सामाजिक व्यवस्था संचालित करने की परंपराएं विकसित थीं। गांवों में ग्रामीण विकास तथा सामूहिक हितों से जुड़े कार्यों के लिए कुछ लोगों का चयन किया जाता था और वे मिलकर गांव की दिशा तय करने में भूमिका निभाते थे।
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उनके अनुसार, इस प्रकार की व्यवस्थाओं को प्रजातांत्रिक सोच के शुरुआती स्वरूप के रूप में समझा जा सकता है। उन्होंने हड़प्पा सभ्यता के सामाजिक संगठन को प्राचीन समाज की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। डॉ. शिंदे ने कहा कि हड़प्पा सभ्यता के लोग शारीरिक बनावट में आज के लोगों जैसे ही दिखाई देते थे। उन्होंने प्राचीन डीएनए से संबंधित अध्ययनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे अतीत की आबादी और वर्तमान भारतीय जनसमूहों के बीच संबंधों को समझने में मदद मिलती है। उन्होंने आर्यों की उत्पत्ति और भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन आबादी से जुड़े विषयों पर भी अपनी बात रखी और कहा कि भारतीय इतिहास को समझने के लिए पुरातात्विक साक्ष्यों और वैज्ञानिक अध्ययनों का महत्व बहुत अधिक है।
उन्होंने हड़प्पा सभ्यता की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि नमस्ते करने की परंपरा, योग और तंदूर जैसी जीवनशैली से जुड़ी परंपराओं के संदर्भ भी इस सभ्यता के अध्ययन में महत्वपूर्ण हैं। इन परंपराओं और प्राचीन जीवनशैली के बीच संबंधों को समझना हमारी सांस्कृतिक निरंतरता को जानने का एक रोचक माध्यम है।
उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी में हुए उत्खनन और अन्य पुरातात्विक अनुसंधानों से प्राचीन समाज के रहन-सहन, तकनीकी ज्ञान और सांस्कृतिक विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। डॉ. शिंदे ने कहा कि राखीगढ़ी की विशेषता केवल इसका पुरातात्विक महत्व ही नहीं बल्कि यह भी है कि यहां से प्राप्त साक्ष्य मानव सभ्यता के विकास की कहानी को समझने में सहायता करते हैं। इस क्षेत्र में हुए अनुसंधानों से सरस्वती-सिंधु सभ्यता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश पड़ा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से राखीगढ़ी में विश्वस्तरीय संग्रहालय विकसित किया जा रहा है। यह संग्रहालय लोगों को प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और पुरातात्विक खोजों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों और पर्यटकों को राखीगढ़ी की ऐतिहासिक महत्ता को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। इस अवसर पर पुरातत्वविद कुलदीप अग्निहोत्री व मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती भी मौजूद रहे।
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