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Hisar News: बोर्ड परिणाम सुधारने के लिए तीन श्रेणियों में बांटे जाएंगे स्कूल
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हिसार। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (एचबीएसई) की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का परिणाम सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने योजना तैयार की है। इसके तहत परीक्षा परिणाम के आधार पर स्कूलों को तीन श्रेणियों में बांटकर शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे।
विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक स्कूलों का परिणाम शत-प्रतिशत करना है। योजना के तहत एक जनवरी से बोर्ड परीक्षाओं तक विद्यार्थियों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षाओं में पढ़ाई, विद्यार्थियों की प्रगति और उपलब्ध संसाधनों की नियमित समीक्षा होगी, ताकि कमियों को समय रहते दूर किया जा सके।
परिणाम के आधार पर तय होंगी तीन श्रेणियां
पहली श्रेणी: 50 से 80 प्रतिशत परिणाम वाले स्कूलों की मासिक समीक्षा होगी। कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं और मार्गदर्शन की व्यवस्था की जाएगी।
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दूसरी श्रेणी: 80 प्रतिशत से अधिक परिणाम वाले स्कूलों की प्रभावी शिक्षण रणनीतियों और अच्छे प्रयासों को दूसरे विद्यालयों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि उनके परिणाम भी बेहतर हो सकें।
तीसरी श्रेणी: 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले स्कूलों को विशेष निगरानी में रखा जाएगा। शैक्षणिक कमियों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त पढ़ाई, मार्गदर्शन व विशेष शिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।
ब्लॉक स्तर पर भी बनेगी कार्ययोजना
प्रत्येक ब्लॉक के सबसे कमजोर तीन स्कूलों की पहचान कर उनके परिणाम सुधारने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी। शिक्षकों को विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार पढ़ाने और कमजोर विषयों पर अधिक समय देने के निर्देश दिए जाएंगे। बीईओ राकेश चराया ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं तक स्कूलों में पढ़ाई की नियमित निगरानी की जाएगी। प्रयास है कि कमजोर विद्यार्थियों को समय रहते अतिरिक्त सहायता मिले और परीक्षा परिणाम बेहतर हों।
विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक स्कूलों का परिणाम शत-प्रतिशत करना है। योजना के तहत एक जनवरी से बोर्ड परीक्षाओं तक विद्यार्थियों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षाओं में पढ़ाई, विद्यार्थियों की प्रगति और उपलब्ध संसाधनों की नियमित समीक्षा होगी, ताकि कमियों को समय रहते दूर किया जा सके।
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परिणाम के आधार पर तय होंगी तीन श्रेणियां
पहली श्रेणी: 50 से 80 प्रतिशत परिणाम वाले स्कूलों की मासिक समीक्षा होगी। कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं और मार्गदर्शन की व्यवस्था की जाएगी।
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दूसरी श्रेणी: 80 प्रतिशत से अधिक परिणाम वाले स्कूलों की प्रभावी शिक्षण रणनीतियों और अच्छे प्रयासों को दूसरे विद्यालयों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि उनके परिणाम भी बेहतर हो सकें।
तीसरी श्रेणी: 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले स्कूलों को विशेष निगरानी में रखा जाएगा। शैक्षणिक कमियों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त पढ़ाई, मार्गदर्शन व विशेष शिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।
ब्लॉक स्तर पर भी बनेगी कार्ययोजना
प्रत्येक ब्लॉक के सबसे कमजोर तीन स्कूलों की पहचान कर उनके परिणाम सुधारने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी। शिक्षकों को विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार पढ़ाने और कमजोर विषयों पर अधिक समय देने के निर्देश दिए जाएंगे। बीईओ राकेश चराया ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं तक स्कूलों में पढ़ाई की नियमित निगरानी की जाएगी। प्रयास है कि कमजोर विद्यार्थियों को समय रहते अतिरिक्त सहायता मिले और परीक्षा परिणाम बेहतर हों।