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Hisar News: सफाई की गाड़ी बेपटरी... बाजारों में डस्टबिन तक नही

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 12:21 AM IST
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The cleaning vehicle is derailed... there are not even dustbins in the markets
हांसी खस्ता हाल में पड़ा हुआ टिप्पर।
हांसी। शहर में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। नगर परिषद के पास न तो कचरा उठाने के लिए पर्याप्त गाड़ियां बची हैं और न ही शहर के बाजारों में कचरा डालने के लिए डस्टबिन। सेक्टर छह में रखे डस्टबिन जर्जर हो चुके हैं।
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करीब छह साल पहले घर-घर कचरा उठान योजना के तहत लाखों रुपये खर्च कर खरीदे गए टिपरों में अब केवल 16 ही चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश प्रतिदिन मरम्मत के लिए मिस्त्री के पास भेजे जाते हैं। बुधवार को 10 नए टिपर चलाए गए हैं जिससे नगर परिषद के पास कुल 26 टिपर होंगे जबकि शहर में 27 वार्ड हैं। इससे पूरे शहर में घरों से कचरा उठान संभव नहीं लग रहा है।
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स्वच्छ भारत अभियान के दावे बेमानी
शहर के हालात सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के नारे काे झुठला रहे हैं। मुख्य बाजार लाल सड़क, उमरा गेट, बड़सी गेट, भगत सिंह रोड, एसडी कॉलेज मार्केट और विश्वकर्मा चौक में कोई सार्वजनिक डस्टबिन नहीं है। इससे दुकानदार और ग्राहक कचरा सड़क पर फेंकने को मजबूर हैं। घरों में जब टिपर नहीं पहुंचता तो लोग रात के अंधेरे में मुख्य सड़कों के किनारे कचरा डाल देते हैं जिससे शहर पूरी तरह ओपन डंपिंग यार्ड बन गया है।
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टेंडर के बावजूद नहीं सुधर रही हालत
नगर परिषद ने हाल ही में तीन महीने की सफाई का नया अल्पकालिक ठेका दिया है। 70 लाख रुपये की रोड स्वीपिंग मशीन खरीदने का प्रस्ताव पास किया है। अब जनता सवाल उठा रही है कि जब प्रशासन लाखों के टिपरों को नहीं संभाल सका और शहर में डस्टबिन तक नहीं लगा पाया, तो नई मशीन से सफाई कैसे संभव होगी। बिना डस्टबिन और बिना चालू वाहनों के, केवल सड़कों पर झाड़ू लगाने से गंदगी का समाधान नहीं होगा।
जिला बनने के बाद भी शहर में सफाई की हालत नहीं सुधर रही है। जिला बनने के हिसाब से शहर में सफाई नहीं है। बहुत खराब स्थिति है। इसमें सुधार होना चाहिए।- अनूप जैन, प्रधान, दड़ा बाजार एसोसिएशन।


घरों से कचरा उठान के लिए टिपर नियमित नहीं आते हैं जबकि ऐसा नियमित होना चाहिए। अन्यथा लोग कचरा खुले में फेंक देते हैं। बाजारों में कचरा डालने के लिए टिपर होने चाहिए।- संजय शर्मा, व्यापारी, सिसाय पुल।
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