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बच्चों ने कहा था कि आज आंदोलन में न जाए जाते समय बोला गोमाता के लिए शहीद भी हो गए तो कोई बात नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 09 Jul 2022 11:21 PM IST
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The children had said that today, while not going to the movement, they said that even if they became martyrs for the cow, it does not matter.
मृतक धर्मपाल सहारण का फाइल फोटो। - फोटो : Hisar
हिसार। गोशाला के लिए 86 दिन से धर्मपाल आंदोलन में जा रहे थे। शुक्रवार सुबह करीब 11.30 बजे वह आंदोलन में शामिल होने के लिए घर से निकल रहे थे। उस समय बच्चों ने कहा था कि आज आंदोलन में मत जाना। उन्होंने बच्चों से पलट कर कहा कि गोमाता के लिए शहीद हो गए तो कोई बात नहीं। शाम को दुखद समाचार मिला। सुनकर पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई। यह बात मृतक धर्मपाल की पत्नी संतोष ने बताई। घर के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव की महिलाएं और रिश्तेदार परिवार के सदस्यों को सांत्वना देने के लिए पहुंच रहे हैं।
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उनके सहारे चल रहा था घर का गुजारा
मृतक धर्मपाल की पत्नी संतोष का कहना है कि एक एकड़ जमीन आती है। उसमें से कुछ जगह पर मकान बना हुआ है। पति के सहारे ही घर का गुजारा चल रहा था। बेटा संदीप खेतीबाड़ी में उनका हाथ बटाता है। अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी बेटे संदीप पर आ गई है। उसने बताया कि दो साल पहले मेरे घुटनों का ऑपरेशन हुआ था। उस पर काफी खर्चा आया था। अब गठिया की दवाइयां चल रही है। एक महीने में सात हजार की दवा आती है अब दवाइयां कौन लेकर आए। इस उम्र में भी मेहनत मजदूरी कर घर का गुजारा चला रहे थे।
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कभी भैंस बेची तो कभी खेत हिस्से पर लिए
परिवार के सदस्यों ने बताया कि करीब दो साल पहले ही गांव से दो किलोमीटर खेत में मकान बनाया था। जमीन नाममात्र की होने के कारण धर्मपाल कभी भैंस बेचकर तो कभी जमीन हिस्से पर लेकर परिवार का गुजारा चला रहा था। बच्चों को पढ़ाने और बेटी की शादी करने के लिए धर्मपाल ने काफी मेहनत की। कुछ समय खेदड़ प्लांट में भी काम किया। परिजनों ने बताया कि उनके जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक धर्मपाल के एक बेटा और एक बेटी है।
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गांव में पसरा सन्नाटा
धर्मपाल की मौत का समाचार जैसे ही गांव में फैला तो सन्नाटा पसर गया। पूरा गांव धर्मपाल की मौत से सदमे है। शोकसभा में गांव के अलावा धरने पर आए लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
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