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पॉक्सो एक्ट के दस साल : सजा के साथ दुरुपयोग भी बढ़ा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Nov 2022 11:33 AM IST
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Ten years of POCSO Act: abuse increased along with punishment
हिसार। इस साल 14 नवंबर को पॉक्सो एक्ट (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012) दस साल का हो गया। हर साल इस एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। बच्चों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज होने वाले अपराधों की तुलना में इस अधिनियम में सजा का अनुपात भी बढ़ा है। वहीं, इस कानून का दुरुपयोग भी बढ़ा है। इस साल 31 अक्तूबर तक इस अधिनियम के तहत हिसार जिले में 111 एफआईआर दर्ज हो चुकी है। वहीं, पिछले साल इनकी संख्या 145 थी। इससे पूर्व वर्ष 2020 में 99, वर्ष 2019 में 87 और वर्ष 2018 में 68 मामले दर्ज किए गए थे।
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वरिष्ठ महिला अधिवक्ता रीटा नागपाल ने बताया कि पॉक्सो एक्ट के मामलों का निपटान सामान्य आपराधिक मामलों की अपेक्षा तेजी से हो रहा है, लेकिन साथ में दुरुपयोग भी बढ़ रहा है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता सुनीता श्योकंद ने बताया कि यह कानून बच्चों के लिए काफी प्रभावी है और तेजी से मामलों का निपटान भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के तहत सजा का अनुपात भी अन्य आपराधिक मामलों की बजाय कुछ ज्यादा है। साथ ही कहा कि उनके सामने इस कानून के तहत दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं।
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केस नंबर 1
-हिसार के एक सेक्टर निवासी व्यक्ति की पत्नी किसी कार्य से दूसरे शहर में गई हुई थीं। घर में जब उसकी बेटियां शरारत कर रही थीं तो उन्होंने उनको डांट दिया। इसके बाद बड़ी बेटी ने अपनी छोटी बहन को झूठी शिकायत करने के लिए उकसाया और उसने अपने पिता के खिलाफ झूठी शिकायत दे दी। हालांकि जब मामला अदालत के संज्ञान में आया तो मामले को खारिज कर दिया गया।
केस नंबर 2
हाल ही में पुलिस ने एक नाबालिग लड़की की शिकायत पर उसके पड़ोसी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है, जबकि यह सामान्य विवाद था। शिकायतकर्ता को इस मामले में यह नहीं पता कि विवाद का पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड है और उसने झूठी शिकायत देकर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया है। यह मामला अभी खारिज नहीं हुआ है, लेकिन जांच के बाद इस तरह के मामले अक्सर खारिज हो जाते हैं।
यह है एक्ट की प्रमुख खासियत
-इस एक्ट के तहत जांच की प्रक्रिया चाइल्ड-फ्रेंडली होती है। केस दर्ज करने के एक साल के अंदर फैसला करने का लक्ष्य होता है।
-इस एक्ट के तहत विशेष न्यायालय गठित किए गए हैं, जो कि संवेदनशील तरीके से आपराधिक मामलों की सुनवाई करते हैं।
-इस एक्ट में प्रावधान है कि मीडिया जब ऐसे मामलों पर रिपोर्ट बनाती है तो उनको पीड़ित की पहचान किसी भी तरह से उजागर ना हो, इसका पूरा ध्यान रखना होता है। अन्यथा समाचार-पत्र व न्यूज चैनल के संपादक तक को सजा हो सकती है।

मेडिकल जांच के लिए विशेष प्रावधान
इस अधिनियम में पीड़िता की चिकित्सा जांच के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। पॉक्सो नियमों के नियम 5(3) में स्पष्ट प्रावधान है कि बच्चे को आपातकालीन चिकित्सा देखभाल प्रदान करने से पूर्व अस्पताल व चिकित्सक को पीड़ित बच्चे से किसी भी प्रकार के कानूनी व अन्य दस्तावेज नहीं मांगने चाहिए। इसके अलावा सेक्शन 27 के तहत मेडिकल जांच भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164-ए के अनुसार करने और लड़की की चिकित्सा जांच महिला चिकित्सक से करवाने का प्रावधान है। इसके अलावा चिकित्सा जांच लड़की के परिजनों या अन्य की मौजूदगी में होगी, जिस पर वह विश्वास करती है।
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पॉक्सो एक्ट के अंर्तगत अंकित अभियोग
2018 - 68
2019 - 87
2020 - 99
2021 - 145
2022 - 111 (31 अक्तूबर, 2022 तक)
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