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तरुण ने पैर में चोट लगने पर फुटबाल छोड़ बैडमिंटन को चुना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Aug 2021 12:53 AM IST
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Tarun chose badminton after leaving football due to a foot injury.
पैरा ओलंपिक के खिलाड़ी तरूण ढिल्लों - फाइल फोटो - फोटो : Hisar
पैर गंवाने पर फुटबाल छोड़ बैडमिंटन को चुना, अब तरुण पैरालंपिक में दिखाएगा रैकेट का जोर
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फोटो : 62
- मूलरूप से सातरोड़ कलां का रहने वाला पैरा खिलाड़ी लखनऊ में ले रहा प्रशिक्षण
- 2 सितंबर से टोक्यो पैरालंपिक में शुरू होगा सफर
- 10 साल की उम्र में फुटबाल खेलते समय लगी थी पैर में चोट, संक्रमण बढ़ने पर करने पड़े थे दो ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
हिसार। 16 साल पहले गली में दोस्तों के साथ फुटबाल खेलते समय सातरोड़ कलां के तरुण ढिल्लों पैर में चोट लगी। संक्रमण बढ़ने पर चिकित्सकों ने ऑपरेशन कराना पड़ा। एक के बाद एक दो ऑपरेशन होने से एक साल तक बिस्तर पर रहा। इस दौरान खेल से दूरी बनी रही लेकिन सातरोड़ कलां के तरुण ढिल्लों ने हिम्मत नहीं हारी।
एक पैर से दिव्यांग होने के कारण फुटबाल छोड़ बैडमिंटन को चुना। अब तरुण टोक्यो में आयोजित पैरालंपिक में अपनी रैकेट का जोर दिखाएगा। पैरालंपिक में उसका सफर 2 सितंबर से शुरू होगा।
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तरुण ढिल्लों पिछले पांच साल से करनाल के कर्ण स्टेडियम में अभ्यास कर रहे हैं, लेकिन तीन माह से वह पैरालंपिक की तैयारी के लिए लखनऊ के साई सेंटर में ट्रेनिंग ले रहे हैं। तरुण ने बताया कि उनका यह पहला पैरालंपिक है। इसको लेकर तैयारी पूरी है। उम्मीद है कि इस पैरालंपिक में गोल्ड मेडल हासिल करूंगा।
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पिता से मिली थी खेलने की प्रेरणा
पैरा खिलाड़ी तरुण ढिल्लों ने बताया कि उन्हें खेलने की प्रेरणा उनके स्वर्गीय पिता सतीश कुमार से मिली थी। उन्होंने बताया कि पिता क्रिकेट खेलते थे, मेरे अंदर भी खेलने का जुनून पैदा हो गया और मैंने बैडमिंटन को अपना करिअर चुना। बैडमिंटन ऐसा गेम है, जिसमें खुद की मेहनत का परिणाम मिलता है। हालांकि वह कई बार डबल्स में भी खेलते हैं। तरुण ने बताया कि वर्ष 2013 में बीमारी के चलते पिता का निधन हो गया था। वहीं माता सलोचना देवी गृहिणी हैं।
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