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टेलरिंग से रंगमंच और अब सिनेमा में लगाई छलांग
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
Updated Mon, 25 Jan 2016 01:28 AM IST
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हौसले बुलंद हों तो किसी बंधन की दीवार इतनी मजबूत नहीं होती कि उसे तोड़ा न जा सके। यहीं सब करके दिखाया है हांसी के मुनीष भाटिया घायल ने। पेशे से टेलरिंग का कार्य करने वाले मुनीष ने बुलंदी का वो आयाम हासिल किया है जो किसी के लिए भी नजीर बन सकता है। रंगमंच से उड़ान भरते हुए मुनीष अब शब्दों से भी लोगों को अपना कायल बना चुके हैं। हरियाणवी गीत जेल करावेगी रे छोरी गीत के लेखक आर्य नगर निवासी मुनीश भाटिया घायल अब किसी के लिए अनजान चेहरा नहीं है।
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उन्हें हाल ही में असम की राजधानी गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई तथा एक अन्य कार्यक्रम में असम विधानसभा के स्पीकर प्रणब कुमार गगोई ने उन्हें सम्मानित कर काबिलियत का इनाम दिया है। अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के जिला संयोजक मुनीष भाटिया कहते है कि उन्हें ये मुकाम हासिल करने में 35 साल लग गए।
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ये उनका पहला गीत था जिससे उन्हें प्रदेश भर में ख्याति मिली। भाटिया ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि हालांकि वे कई टीवी सीरियल में बतौर अभिनेता कैमरे के सामने आ चुके हैं, लेकिन गीत के बोल लिख कर जितनी जल्दी उन्हें प्रसिद्धि मिली उसका अनुमान उन्हें भी नहीं था।
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भाटिया ने बताया कि उन्हें निर्माता अलका मित्तल व निदेशक बलदेव राजपूत की बॉलीवुड फिल्म ए राम में अभिनेता हिसार निवासी यशपाल शर्मा के साथ काम करने का अवसर भी मिला है। इस फिल्म की शूटिंग अभी चल रही है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म डाबडा गांव रेप कांड पर आधारित है।
भाटिया ने अपने कैरियर की शुरुआत रामलीला रंगमंच से की थी, जहां उन्होंने हास्य से लेकर करुण रस तक अनेक किरदार सफलतापूर्वक निभाए। बचपन से उनमें हरियाणवी गीतों को आगे बढ़ाने एवं अभिनय की लगन थी। उन्होंने कभी अपने जीवन में पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एक के बाद एक उपलब्धि हासिल करते चले गए। बता दें कि भाटिया की हांसी में पुराना बस स्टैंड रोड पर टेलर की दुकान है।
2006 में हरियाणवी लिखना शुरू किया
मुनीष भाटिया घायल बताते है कि उन्होंने 2006 में हरियाणवी बोली में लिखना शुरू किया था। इसके बाद 2011 में वे हिंदी में लिखने लगे। हालांकि पढ़ाई ज्यादा नहीं है लेकिन श्रोताओं की नब्ज को अच्छी तरह पकड़ना वे जानते हैं। भाटिया बताते हैं कि हरियाणवी गीत जेल करावेगी रे छोरी गीत उनसे कुंगड़ निवासी प्रवीन शर्मा लेकर गए थे। बाद में इस गाने के बारे में गायक वीनू गौड़ से बात की। देखते ही देखते गाना हिट गया और गाने के साथ जुड़े तमाम लोग भी हिट हो गए।
मन अभी भरा नहीं है
भाटिया के मुताबिक रंगमंच व लेखन के क्षेत्र में अभी उनका मन भरा नहीं है। बचपन से ही एक्टिंग के लिए मंच पर जाने का शौक था। घर की हालत ठीक नहीं थी लिहाजा कामयाबी पाने में वक्त लग गया। अब एक्टिंग के साथ गीत लिखने में रुझान बढ़ गया है और लोग भी पसंद करने लगे हैं।